इंडिया के लिए फुटबॉल खेला, अब पेट पालने को बकरियां चराने और दिहाड़ी करने को मजबूर

तनुजा बागे ओडिशा और इंडियन टीम का प्रतिनिधित्‍व कर चुकी हैं. 20 साल की बागे गोलकीपर के रूप में खेलती थीं.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 11:01 PM IST
इंडिया के लिए फुटबॉल खेला, अब पेट पालने को बकरियां चराने और दिहाड़ी करने को मजबूर
तनूजा बागे.
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Updated: July 18, 2019, 11:01 PM IST
भारत में खेलों के स्‍तर को उठाने और क्रिकेट के इतर दूसरे खेलों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर जोर देने की कवायद चल रही है. हालांकि इस बारे में अभी लंबा सफर तय होना है क्‍योंकि अभी भी बाकी खेलों में खिलाड़ी आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो पाए हैं. इसी से जुड़ी खबर ओडिशा से हैं. यहां पर एक राष्‍ट्रीय स्‍तर की महिला फुटबॉलर घर चलाने और पेट की भूख मिटाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी व बकरियां चराने को मजबूर है. द न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस की खबर के अनुसार, तनुजा बागे ओडिशा और इंडियन टीम का प्रतिनिधित्‍व कर चुकी हैं. 20 साल की बागे गोलकीपर के रूप में खेलती थीं. लेकिन गरीबी के चलते उनसे यह खेल छूट गया और अब आजीविका के लिए मजदूरी कर रही हैं.

ओडिशा के झारसुगुडा जिले के देबादिही गांव की रहने वाली बागे ने कई इनाम और सम्‍मान जीते लेकिन इनमें से कोई भी अब उनके काम का नहीं है. बागे को सरकारी मदद का इंतजार है ताकि वह सम्‍मानित जीवन जी सके.

फुटबॉल के साथ ही रग्‍बी में भी पारंगत
रिपोर्ट के अनुसार, उनका जन्‍म गरीब आदिवासी परिवार में हुआ. 2003 में जब वह 14 साल की थीं तब उन्‍होंने फुटबॉल खेलना शुरू किया था. ब्रजराजनगर में कुछ सीनियर फुटबॉलर्स के साथ उन्‍होंने ट्रेनिंग लीं. इसके बाद वे ओडिशा टीम के लिए चुन ली गईं. यहां पर अच्‍छे प्रदर्शन ने उन्‍हें इंडियन टीम में गोलकीपर के रूप में जगह दिला दी. 2011 तक इंडियन टीम के लिए उन्‍होंने 4 मैच खेले. फुटबॉल के साथ ही वह रग्‍बी में भी नेशनल लेवल तक खेल चुकी हैं.

उन्‍होंने द न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया, 'मेरे अवार्ड और सर्टिफिकेट किसी काम के नहीं क्‍योंकि पेट भरने के लिए भी मुझे संघर्ष करना पड़ रहा है. गरीबी के चलते मैं अब खेलों के बारे में सोच भी नहीं सकती.'

झोपड़ी में रहने को मजबूर
तनुजा के पास अपना पक्‍का मकान भी नहीं है. उनके पति भी दिहाड़ी मजदूर हैं. दोनों ने सरकारी जमीन पर एक झोपड़ी बना रखी है और इसी में रहते हैं. तनुजा की एक तीन साल की बेटी भी है. दिहाड़ी मजदूरी के साथ ही राशन कार्ड से मिलने वाले सामान से उनका घर चलता है.
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प्राइवेट नौकरी कम सैलरी के चलते छोड़नी पड़ी
उन्‍होंने बताया कि कुछ साल पहले पूर्व कलेक्‍टर बीबी पटनायक की वजह से उन्‍हें एक प्राइवेट स्‍कूल में बच्‍चों को फुटबॉल सिखाने का काम मिला था. उन्‍हें हर महीने 8000 रुपये देने का वादा किया था लेकिन मिले केवल 3000 रुपये. साथ ही 15 किलोमीटर दूर साइकिल चलाकर जाना पड़ता था. ऐसे में वह काम उन्‍हें छोड़ना पड़ा.

क्राउडफंडिंग से मदद की कोशिश
प्रशासन ने उनकी मदद करने का आश्‍वासन दिया है. वर्तमान कलेक्‍टर ज्‍योति रंजन प्रधान ने कहा कि वह जल्‍द ही तनुजा से मिलेंगे और जरूरी मदद करेंगे. इसी बीच सोशल मीडिया पर तनुजा की खबर आने के बाद कई लोगों ने क्राउडफंडिंग के जरिए उनकी मदद का बीड़ा उठाया है.

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First published: July 18, 2019, 10:59 PM IST
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