दिग्गज हॉकी खिलाड़ी एमके कौशिक हारे जिंदगी की जंग, कोविड-19 से थे संक्रमित

दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों में शुमार एमके कौशिक को कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. (Kiren Rijiju/Twitter)

दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों में शुमार एमके कौशिक को कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. (Kiren Rijiju/Twitter)

भारतीय हॉकी को एक ही दिन में दोहरा झटका लगा है. साल 1980 में मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के दो सदस्य एमके कौशिक (MK Kaushik) और रविंदर पाल सिंह (Ravinder Pal Singh) का कोरोना वायरस संक्रमण के चलते निधन हो गया था.

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नई दिल्ली. पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी और कोच एमके कौशिक (MK Kaushik) कोरोना से जंग हार गए और इस वायरस से लड़ते हुए शनिवार को उनका निधन हो गया. साल 1980 में मॉस्को ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे कौशिक को परेशानी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिवार के अनुसार, 66 साल के कौशिक के ऑक्सीजन स्तर में लगातार बदलाव हो रहा था.

भारतीय हॉकी को एक ही दिन में दोहरा झटका लगा है. इससे पहले मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रविंदर पाल सिंह का भी कोरोना से निधन हो गया था. वह 65 साल के थे और करीब दो सप्ताह तक कोरोना वायरस से जंग लड़ते रहे. शुक्रवार को उनकी हालत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था.

इसे भी पढ़ें, ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी रविंदर पाल सिंह का कोरोना से निधन

भारत की महिला और पुरुष, दोनों सीनियर टीमों को कोचिंग दे चुके कौशिक दिल्ली के एक नर्सिंग होम में भर्ती थे. गत 24 अप्रैल को उनके सीने का सीटी स्कैन कराया गया था, जिसके बाद संक्रमण होने के कारण उन्हें निमोनिया के लक्षणों का पता चला. कौशिक को 17 अप्रैल को कोविड-19 के लक्षण दिखने शुरू हुए थे, लेकिन इसके पहले की उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी. उनके बेटे एहसान (Ehsan) ने इससे पहले बताया था कि उनका ऑक्सीजन लेवल रात में काफी नीचे चला जाता है, जो चिंता की बात है.


कौशिक की पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव आई थीं, जो उसी नर्सिंग होम में भर्ती हैं. हालांकि वह रिकवर हो रही थीं. कौशिक भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार रहे जिन्होंने 1980 में मॉस्को में स्वर्ण पदक जीता था. हरियाणा के इस पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी ने 1980 के ओलंपिक में तीन गोल दागे थे, जिनमें से एक फाइनल मुकाबले में भारत ने स्पेन को आठवें ओलंपिक खिताब के लिए हराया था. उन्हें साल 1998 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था, साल 2002 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

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