साइना नेहवाल की राह मुश्किल, करियर को बढ़ाना है तो चुनकर खेलें टूर्नामेंट : विमल

साइना नेहवाल और किदांबी श्रीकांत टोक्यो ओलिंपिक में नहीं खेल पाएंगे. (Instagram)

साइना नेहवाल और किदांबी श्रीकांत टोक्यो ओलिंपिक में नहीं खेल पाएंगे. (Instagram)

पूर्व भारतीय बैडमिंटन कोच विमल कुमार ने कहा कि साइना नेहवाल (Saina Nehwal) अभी कुछ साल और खेल सकती हैं लेकिन चोट से बचना काफी मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि साइना को सही रणनीति बनाकर चुनिंदा टूर्नामेंट ही खेलने होंगे लेकिन सर्किट पर खेलते हुए चोट से बचे रहना मुश्किल होगा.

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नई दिल्ली. भारत के पूर्व बैडमिंटन कोच विमल कुमार (Vimal Kumar) का मानना है कि कोरोना महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) खेलने का सपना टूटने के बाद साइना नेहवाल (Saina Nehwal) का आगे का सफर कठिन है. उन्होंने कहा कि साइना को अपने करियर को विस्तार देने के लिए टूर्नामेंट चुनकर ही खेलना होगा. चोट और खराब फॉर्म से जूझती आईं साइना चौथा ओलंपिक नहीं खेल सकेंगी क्योंकि बीडब्ल्यूएफ ने कोरोना महामारी के कारण आखिरी तीन क्वालिफायर रद्द कर दिए.

विमल कुमार ने पीटीआई से कहा, ‘साइना 2005-06 में सुर्खियों में आई थीं और प्रकाश पादुकोण के कारण खेल में अगली पीढी को प्रेरित करने वाली बन गईं. वह लगातार अच्छा खेलीं और कई साल तक खेलती रहीं. यह दुखद है कि वह इस बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकीं. आखिरी दो मैचों में वह बदकिस्मत रहीं.’

31 साल की साइना को दुनिया की नंबर एक रैंकिंग तक पहुंचाने वाले विमल का मानना है कि लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता कुछ साल और भारतीय बैडमिंटन को दे सकती हैं, बशर्ते वह सही योजना बनाकर खेले और अपने शरीर का ध्यान रखे. उन्होंने कहा, ‘वह कुछ साल और खेल सकती हैं लेकिन यह मुश्किल होगा. उन्हें सही रणनीति बनाकर चुनिंदा टूर्नामेंट ही खेलने होंगे. उनके पास इतना अनुभव है कि वह सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को हरा सकती हैं लेकिन उन्हें रैंकिंग पर ध्यान नहीं देना चाहिए क्योंकि सर्किट पर खेलते हुए चोट से बचे रहना मुश्किल होगा.’

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साइना अपने करियर में 24 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं जिनमें 11 सुपरसीरीज खिताब शामिल हैं. इसके अलावा वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत और कांस्य जीता. उन्होंने  लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक जीता है. बीजिंग ओलंपिक 2008 में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं. साइना रियो ओलंपिक 2016 में दूसरे दौर से बाहर हो गई थीं. घुटने की चोट से उबरकर वापसी करते हुए उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता लेकिन पिछले दो साल में टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने से चूक गईं.

क्या वह अगला ओलंपिक खेल सकेगी, यह पूछने पर विमल ने कहा, ‘यह बहुत मुश्किल है. वह लगातार चोटिल हो रही हैं. वैसे भी मेरा मानना है कि ओलंपिक अब उनकी प्राथमिकता नहीं होना चाहिए. वह अब भी युवा खिलाड़ियों से बेहतर हैं लेकिन अब फोकस युवाओं पर होना चाहिए. उन्हें अपने दम पर सर्किट पर खेलना चाहिए, अगर उनके भीतर खेलने की ललक बाकी है तो. उनका कोच अब पारूपल्ली कश्यप है और अगर वह कुछ साल और खेल सकीं तो भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह अच्छा होगा.’

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