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CountDown 169: जिससे छीनी आजादी उसी ब्रिटेन को मात देकर भारत ने जीता था चौथा गोल्ड

News18Hindi
Updated: February 6, 2020, 10:43 AM IST
CountDown 169: जिससे छीनी आजादी उसी ब्रिटेन को मात देकर भारत ने जीता था चौथा गोल्ड
भारतीय टीम ने आजादी के बाद पहला मेडल हासिल किया

1948 की भारतीय हॉकी ओलिंपिक टीम (Indian Hockey Olympic Team) में किसी भी खिलाड़ी ने पहले ओलिंपिक में हिस्सा नहीं लिया था

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  • Last Updated: February 6, 2020, 10:43 AM IST
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लंदन. साल 1936 बर्लिन के बाद अगले ओलिंपिक 12 साल बाद 1948 में हुए. 12 साल में भारत (India) में राजनीतिक तौर पर काफी बदलाव आ चुके थे. बड़ी तदाद में एंग्लो इंडियन और मुस्लिम भारत (India) छोड़कर जा चुके थे. ऐसे में 1948 ओलिंपिक में जो भारतीय टीम लंदन (London) पहुंची उसमें कोई भी ऐसा खिलाड़ी शामिल नहीं था जो पहले ओलिंपिक खेल चुका हो. 1936 में भारत की ओर से खेलने वाले एआईएस दारा (AIS DARA) इन ओलिंपिक में पाकिस्तान (Pakistan) के कप्तान थे. हालांकि नई टीम होने के बावजूद भारत (India) ने अपने गोल्डन सफर को जारी रखा और लगातार चौथा गोल्ड मेडल हासिल किया.

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जीत के बाद भारत के गर्वनर जनरल से मिलती 1948 ओलिंपिक की हॉकी टीम


टीम का सफर
भारतीय टीम (Indian Team) ने इस टूर्नामेंट में पांच मुकाबले खेले और सभी में जीत हासिल की. भारत (India) ने सभी मैचों में मिलाकर 25 गोल किए और उसके खिलाफ केवल दो गोल हुए. भारत (India) ने पहले मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया (Australia) को 8-0 से मात दी. इसके बाद उन्होंने अर्जेंटीना (Argentina) को 9-1 से मात दी. भारत ने लीग राउंड के आखिरी मुकाबले में स्पेन (Spain) 2-0 से मात दी. सेमीफाइनल मुकाबले में भारत (India) का सामना हौलेंड (Holland) से हुआ था जिसमें उन्होंने 2-1 से मात दी और फाइनल में जगह बनाई.

अंग्रेजों के खिलाफ हुआ था फाइनल मुकाबला
भारत ने साल 1947 में अंग्रेजों से आजादी हासिल की थी. इसके अगले साल हुए ओलिंपिक में भारतीय हॉकी टीम और ग्रेट ब्रिटेन का आमना-सामना हुआ. दोनों टीमों के बीच 12 अगस्त 1948 को फाइनल मुकाबला खेला गया था. भारत ने इस मुकाबले में 4-0 से जीत हासिल की थी और आजाद भारत के तौर पर पहला गोल्ड मेडल हासिल किया था. भारत की ओर से बलबीर सिंह ने पहले हाफ में दो गोल किए वहीं दूसरे हाफ में पैट जेनसन और त्रिलोचन सिंह एक-एक गोल किया. भारत ने इस जीत के साथ तीन दिन बाद आजादी की पहली सालगिरह मनाई.

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जीत के बाद मेडल लेने पोडियम पर खड़े भारतीय कप्तान
टीम के हीरो
फाइनल मुकाबले में बलबीर सिंह ने शानदार खेल दिखाते हुए टीम को जीत दिलाई थी. वह भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ सेंट्रल फॉरवर्ड साबित हुए थे. अपना पहला ओलिंपिक खेल रहे बलबीर सिंह ने इसके बाद आने वाले दो ओलिंपिक में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके वह टीम की जीत के हीरो रहे.

इस गोल्ड के बाद भारतीय टीम जब वापस पहुंची तो मुंबई में रेड कारपेट डालकर टीम का स्वागत किया गया है. पूरी टीम को दिल्ली बुलाकर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र आग्रवाल ने नेशनल स्टेडियम में सम्मानित किया था. टीम के लिए लंदन में भारत के पहले हाई कमिश्नर वीके कृष्णन ने भी सम्मान समारोह रखा था.

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बलबीर सिंह को हॉकी का बड़ा दिग्गज माना जाता है


1948 के लंदन ओलिंपिक की भारतीय हॉकी टीम
किशन लाल - (कप्तान)
कुंवर दिग्विजय सिंह- (उप-कप्तान)
लेसली क्लॉडियस
वॉल्टर डी सूजा
केशव दत्त
लॉरी फर्नेंडीस
रंगनाथन फ्रांसिस
रणधीर सिंह
गैरी ग्लैकेन
अख्तर हुसैन
पैट्रिक जनसेन
अमिर कुमार
लियो पिंटो
जसवंत सिंह राजपूच
लतीफ-फर-रहमान
बलबीर सिंह
ग्रहनंदन सिंह
त्रिलोचन सिंह
मैक्सी वैज

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First published: February 6, 2020, 7:28 AM IST
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