जब एक साथ खेलने वाले आए एक दूसरे के खिलाफ, तो शुरू हुई हॉकी की सबसे बड़ी 'जंग'

जब एक साथ खेलने वाले आए एक दूसरे के खिलाफ, तो शुरू हुई हॉकी की सबसे बड़ी 'जंग'
भारत और पाकिस्तान के बीच हर खेल में होती है कड़ी प्रतिद्वंदिता

भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच हॉकी (Hockey) के मैदान पर प्रतिद्वंदिता सालों से कायम है

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नई दिल्ली. साल 1947 में भारत को अंग्रेजों के 200 साल की गुलामी से आजादी मिली और साथ ही मिला पाकिस्तान (Pakistan) नाम का पड़ोसी. बरसों से इन देशों के बीच इस तरह की दुश्मनी कायम है जो बॉर्डर पर हथियारों से जंग से लेकर खेल के मैदान तक पर दिखाई देती है. आज अगर भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच क्रिकेट मैच होता है तो दुनिया की सांसे थम जाती हैं. मैदान पर सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, दोनों देशो के फैंस स्टेडियम से लेकर सोशल मीडिया पर एक दूसरे के सामने खड़े होते हैं. क्रिकेट में यह प्रतिद्वंदिता तो फिर भी बाद में आई लेकिन हॉकी में आजादी के अगले साल से ही कायम है. भारत और पाकिस्तान का विभाजन 1947 में हुआ जिसके बाद एक साथ भारत के लिए ओलिंपिक का इतिहास रचने वाले खिलाड़ी एक दूसरे के सामने आ गए और शुरू हुई ऐसी प्रतिद्वंदिता जिसने आज हर खेल को अपनी चपेट में ले लिया है.

1956 में पहली बार हुआ आमना-सामना
आजादी के बाद दोनों देशों ने 1948 में हुए ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लिया, 1936 में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाली टीम में इफ्तिकार अली भी शामिल थे जो पाकिस्तान के पहले कप्तान बने. आजादी के बाद भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) का सामना पहली बार ओलिंपिक 1956 (Olympic 1956) में हुआ. इस मुकाबले में भारत ने 1-0 से जीत हासिल की थी. उस दौर में जब ओलिंपिक में भारत का स्वर्णिम दौर चल रहा रहा था, 1960 रोम ओलिंपिक (Rome Olympics) में पूरे देश को करारा झटका लगा. 1956 ओलिंपिक में मिली हार का हिसाब पूरा करते हुए रोम में पाकिस्तान ने भारत का गोल्डन सफर रोक दिया था. 1928 के बाद ऐसा पहली बार हुआ था कि जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम गोल्ड नहीं जीत पाई. खिताबी मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को 1-0 के अंतर से हराया था.
कौन-किस पर पड़ता है भारी
मौजूदा समय में भले ही भारत हर लिहाज से पाकिस्तान (Pakistan) पर हावी दिखता हो लेकिन यह भी सच है कि पाकिस्तान ने लंबे समय तक भारत पर अपना वर्चस्व साबित किया है. भारत में भले ही धनराज पिल्लै, दिलीप टिर्की, और महान ध्यान चंद जैसे खिलाड़ी रहे हैं लेकिन पाकिस्तान के सोहेल अब्बास, शाहबाज अहमद औऱ सरकार जैसे खिलाड़ियों से सजी पाकिस्तानी टीम भारत पर भारी पड़ती थी.



ओलिंपिक - भारत ने आठ ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीते हैं वहीं पाकिस्तान के हिस्से में केवल तीन ही मेडल है. भारत के इन मेडल में से तीन मेडल आजादी से पहले के हैं जब पाकिस्तान भारत का हिस्सा था.

वर्ल्ड कप - भारत ने 1975 में पहली और इकलौती बार वर्ल्ड कप खिताब हासिल किया था.वहीं पाकिस्तान अब तक चार बार वर्ल्ड चैंपियन बन चुका है.

चैंपियंस ट्रॉफी - भारत आज तक यह टूर्नामेंट कभी नहीं जीत पाया वहीं पाकिस्तान ने तीन बार चैंपियन बना है.

एशियन गेम्स - भारत और पाकिस्तान सात बार एशियन गेम्स के फाइनल में आमने-सामने आए हैं. पाकिस्तान जहां आठ बार एशियाई चैंपियन बना वहीं भारत केवल तीन बार ही चैंपियन बना पाया. वहीं कॉमनवेल्थ में अब तक दोनों मेडल हासिल नहीं कर पाए हैं.  इसके अलावा दोनों के बीच साल 1978 से लेकर 2006 के बीच आठ टेस्ट सीरीज खेली गई हैं जिसमें भारत केवल एक ही सीरीज जीत पाया है वहीं पाकिस्तान ने छह सीरीज अपने नाम की है.

खिलाड़ियों पर कैसा होता है दबाव
टीम के पूर्व कप्तान पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) ने एक वीडियो इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए वह सबसे ज्यादा दबाव महसूस करते हैं, उतना जितना कि वह शायद नंबर वन टीम के खिलाफ भी नहीं करते. टीम के अंदर वह दबाव फिर भी कम होता लेकिन फैंस और देशवासियों की उम्मीदें अलग ही दबाव बना देती हैं. वहीं लंबे समय से टीम के कोच रहे हरेंद्र सिंह का कहना कि बॉर्डर पर जो कुछ होता है उसका असर खिलाड़ियों पर भी पड़ता है. मैं उन्हें हमेशा कहता हूं कि इस्तेमाल अपने खेल को बेहतर बनाने में करो. टीम के मिड फील्डर मनप्रीत का कहना है कि पाकिस्तान के खिलाफ हर खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता है. जब-जब पाकिस्तान सामने होता है खिलाड़ियों में अलग ही जोश होता है. दोनों ही देशों के फैंस को मंजूर नहीं कि वह सामने वालों से हार जाए.

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