भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी निक्की प्रधान के गांव में मैदान तक नहीं, खिलाड़ी कीचड़ में खेलने को मजबूर

Nikki Pradhan के गांव में कीचड़ में हॉकी खेलने को मजबूर खिलाड़ी! (फोटो-निक्की प्रधान फेसबुक)

भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी निक्की प्रधान (Nikki Pradhan) के गांव की सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे. खूंटी के हेसल गांव ने भारत को कई महिला खिलाड़ी दी हैं लेकिन यहां एक भी हकी मैदान नहीं है.

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रांची. ओलंपिक के दरवाजे पर दूसरी बार दस्तक देने के साथ ही खूंटी में निक्की प्रधान (Nikki Pradhan) का हेसल गांव (Hesal village) फिर से सुर्खियों में आ गया. मुरहू प्रखंड के इस गांव करीब 60 घर हैं. जिसने देश को 26 राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक खिलाड़ी दिए हैं. इसमें 13 महिला हॉकी खिलाड़ी सरकारी नौकरी में हैं. न्यूज 18 ने जब निक्की के पिता से बेटी और गांव की उपलब्धियों पर सवाल पूछा तो उनका दर्द साफ उभर आया. उनकी मानें तो खिलाड़ियों के इस गांव में ज्यादातर मकान आज भी कच्चे ही हैं. साथ ही नालियां नहीं रहने की वजह से चारों तरफ गंदगी का अंबार है. ऐसे में बारिश के दिनों में मुश्किलें और भी बढ़ जाती है. हालांकि निक्की के पिता यह कहना नहीं भूले कि राष्ट्रीय खेल को पहचान दिलाने वाले इस गांव में एक भी हॉकी का मैदान नहीं है. ऐसे में गांव की बेटियों की उपलब्धियों पर गांव का पिछड़ापन भारी पड़ता है.

निक्की प्रधान के पिता सोमा प्रधान ने कहा कि गांव में बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने की जरूरत है. राज्य सरकार के मंत्री खिलाड़ियों को सम्मान देने गांव तो जरूर पहुंचते हैं. लेकिन गांव की जरूरतों और विकास पर उनकी नजर नहीं जाती. उन्होंने जल्द से जल्द हेसल गांव में एक हॉकी का मैदान बनाने की मांग की.

हेसल गांव की बेटियों ने कमाया है हॉकी में नाम
हेसल गांव में मौजूद हर घर में बेटियों की हॉकी जोड़ी गर्व की एक कहानी है. निक्की प्रधान पुष्पा प्रधान, शशि प्रधान, अनिमा सोरेंग, जसमति तिड़ू, हेलेन सोय, दुलारी पूर्ति जैसे 26 हॉकी खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं. वही गांव की कई लड़कियां राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर टीम में दस्तक देने के लिए जी तोड़ कोशिश में जुटीं हैं. लेकिन गांव में एक भी हॉकी का मैदान नहीं होना इनकी तैयारियों में एक बड़ा फर्क पैदा कर रहा है.

हेसल गांव में हॉकी मैदान तक नहीं




गांव की कई लड़कियां कीचड़ के बीच ही हॉकी खेलती नजर आती हैं. लड़कियों ने बताया कि सरकार अगर इसी गांव में एक हॉकी का मैदान बनाती है तो खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. गरीबी से जूझ रही इन खिलाड़ियों ने सरकार से हॉकी समेत खेल से जुड़े दूसरे संसाधनों की भी मांग की.

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