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Olympic CountDown 170 Days: फाइनल में जर्मन गोलकीपर ने तोड़ दिया था ध्यानचंद का दांत, फिर भी भारत ने पूरी की गोल्डन हैट्रिक

News18Hindi
Updated: February 5, 2020, 11:58 AM IST
Olympic CountDown 170 Days: फाइनल में जर्मन गोलकीपर ने तोड़ दिया था ध्यानचंद का दांत, फिर भी भारत ने पूरी की गोल्डन हैट्रिक
बर्लिन ओलिंपिक में गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम (hockey india)

भारत (India) ने बर्लिन (Berlin) ओलिंपिक में लगातार तीसरी बार हॉकी में गोल्ड मेडल हासिल किया था

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  • Last Updated: February 5, 2020, 11:58 AM IST
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नई दिल्ली. भारत (India) ने 1936 में हॉकी (Hockey) में अपनी गोल्डन हैट्रिक पूरी की थी. बर्लिन (Berlin) में हुए इन ओलिंपिक खेलों में भारत ने मेजबान जर्मनी (Germany) को मात देकर जीत हासिल की थी. यह आखिरी बार था जब अविभाजित भारतीय टीम ने ओलिंपिक खेलों (Olympic Games) में हिस्सा लिया था. भारत की ओर से पिछले दो ओलिंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाले स्टार खिलाड़ी ध्यानचंद (Dhyanchand) को इस बार कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई और यह उनका आखिरी ओलिंपिक साबित हुआ क्योंकि दूसरे वर्ल्ड वॉर के कारण अगले 12 सालों तक ओलिंपिक खेल नहीं हुए थे.

टीम का सफर
भारतीय टीम 15 दिनों का सफर करके जर्मनी पहुंची थी. टीम ने पहुंचकर प्रैक्टिस मैच खेला था जिसमें उन्हें 1-4 से हार मिली थी. हालांकि टूर्नामेंट में वह पूरी लय में दिखाई दिए थे. टीम ने लीग राउंड में हंगरी को 4-0 से, अमेरिका को 7-0 और जापान को 9-0 से हराया था. सेमीफाइनल मुकाबले से पहले इकतीदार दारा (Iqtidar Dara) को टीम में शामिल किया गया है. उन्हें सेमीफाइनल मुकाबले से एक दिन पहले हवाई जहाज से बर्लिन (Berlin) पहुंचाया गया था. दारा की मदद से सेमीफाइनल में फ्रांस को 10-0 से मात दी थी और फाइनल में जगह बनाई.

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ध्यानचंद ने अपने प्रदर्शन के दम पर फाइनल में जर्मनी को मात दी थी


फाइनल मुकाबले में टूट गया था ध्यानचंद का दांत
फाइनल मुकाबला 15 अगस्त 1936 को खेला गया था. मैच शुरू होने से पहले टीम ने ड्रेसिंग रूम में कांग्रेस के तिरंगे झंडे को सलाम किया था. उम्मीदों के मुताबिक भारतीय टीम फ्रांस पर भारी पड़ रही थी. टीम 6-0 से आगे चल रही थी तभी फ्रांस की टीम ने आक्रामक खेलना शरू किया और ध्यानचंद (Dhyanchand)  को निशाने पर लिया. खेल के समय ध्यानचंद (Dhyanchand) और जर्मन गोलकीपर के बीच भिडंत हो गई और भारतीय स्टार को मैदान से बाहर जाना पड़ा. ध्यानचंद वापस मैदान पर आए तो उनका एक दांत टूट चुका था और वह नंगे पैर मैदान पर उतरे. इसके बाद भारतीय टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए 8-1 से जीत दर्ज की. जीत के बाद भारतीय टीम ने ब्रिटिश राष्ट्रगान नहीं बल्कि वंदे मातरम गाया.

 
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एडॉल्फ हिटलर भारतीय टीम से काफी प्रभावित हुए थे


टीम के हीरो
फाइनल मुकाबले में ध्यानचंद (Dhyanchand) के खेल से वीआईपी स्टैंड में खड़े नाजी नेता एडॉलफ हिटलर काफी प्रभावित हुए थे. हिटलर ने भारतीय स्टार को नाजी सेना में कर्नल की जगह ऑफर की थी इस शर्त पर कि वह जर्मनी आ जाएं, लेकिन ध्यानचंद नहीं माने थे. ध्यानचंद (Dhyanchand) के सम्मान में वियाना में उनकी मूर्ति बनाई गई थी जिसमें उनके चार हाथ और हॉकी स्टिक थी. जर्मनी के लोगों का कहना था कि दो पैर दो हाथ वाला कोई भी इंसान ऐसा खेल नहीं दिखा सकता. ध्यानचंद ने इस पूरे टूर्नामेंट में शानदार कप्तानी के साथ-साथ 11 गोल दागे वहीं उनके भाई रूप सिंह ने भी 11 गोल किए. टीम के गोलकीपर एलेन एक बार फिर शानदानर खेल दिखाते हुए स्टार साबित हुए.

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फाइनल में ध्यानचंद का दांत टूट गया था


टीम
ध्यान चंद - (कप्तान)
रिचर्ड जे एलेन - (गोलकीपर)
अली इकतीदार शाह दारा
लियोनेल सी एमेट
पॉल पीटर फर्नेंडीस
जोसेफ गालीबर्डी
अर्नेस्ट जॉन गुडसर कलेन
मोहम्मद हुसैन
सैयद मोहम्मद जाफर
एहसान मोहम्मद खान
अहमद शेर खान
मिर्जा नासिर-उड-दिन मासूद
सिरिल जे
बाबू नरसू
जोसेफ फिलिप
शब्बद सहाहब-उड-दीन
गुरचरण सिंह गेरवाल
रूप सिंह

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First published: February 5, 2020, 11:58 AM IST
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