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भारतीय हॉकी टीम को कांस्य पदक जिताकर कोच ग्राहम रीड ने लिया जर्मनी से अपना 29 साल पुराना बदला

कांस्य पदक जीतने के बाद कोच  ग्राहम रीड भारतीय हॉकी खिलाड़ियों के साथ (फोटो साभार-Graham Reid twitter)

कांस्य पदक जीतने के बाद कोच ग्राहम रीड भारतीय हॉकी खिलाड़ियों के साथ (फोटो साभार-Graham Reid twitter)

Tokyo Olympics: कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) के नेतृत्व में भारत की पुरुष हॉकी टीम (Indian Hockey Team) ने टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया है. भारतीय हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराया और इसके साथ ही रीड ने जर्मन टीम से अपना 29 साल पुराना बदला लिया.

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    नई दिल्ली. भारतीय पुरुष हॉकी टीम (Indian Mens Hockey Team) ने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में जर्मनी को हराकर 41 साल बाद मेडल जीता है. तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से मात दी. कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम को तैयार करने में ऑस्ट्रेलियाई कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) का बड़ा योगदान रहा. रीड ने 2019 में टीम की कमान संभाली थी और दो सालों में भारतीय हॉकी की तस्वीर बदल दी. इस जीत से साथ ही रीड ने जर्मनी से अपना 29 साल पुराना बदला ले लिया.

    रीड ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज हॉकी प्लेयर रहे हैं. वह बार्सीलोना ओलंपिक 1992 में रजत पदक जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा भी थे. फाइनल मुकाबले में जर्मनी ने ही कंगारू टीम को 2-1 से मात दी थी और रीड का गोल्ड जीतने का सपना तोड़ दिया था. रीड ने कांस्य पदक जीतने के बाद कहा कि यह अद्भुत अहसास है. इस टीम ने इसके लिये कई बलिदान दिये हैं. कोरोना काल में अपने परिवार से दूर रहने और कुछ खिलाड़ियों के कोरोना संक्रमित होने का भी हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जहां ये खिलाड़ी पहुंचे हैं, वहां तक पहुंचने में काफी समय लगता है. कई बलिदान जिनके बारे में किसी को पता भी नहीं होता.’’

    रीड ने कहा, ‘‘देश के साथ-साथ यह टीम भी लंबे समय से पदक का इंतजार कर रही थी. मुझे पता है कि भारत के लिये हॉकी के क्या मायने हैं और इसका हिस्सा बनकर मैं बहुत खुश हूं.’’ भारतीय टीम एक समय 1-3 से पीछे थी और रीड ने कहा कि उन्होंने खिलाड़ियों को वापसी की उम्मीद कभी नहीं छोड़ना सिखाया है. उन्होंने कहा, ‘‘ मैच से पहले मैंने खिलाड़ियों से कहा था कि कुछ होता है तो अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से भी बेहतर करना है. मसलन अगर आप पिछड़ते हो तो खेल का एक अलग ही स्तर दिखाना होगा और उन्होंने वही किया.’’

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    रीड ने कहा, ‘‘मैच पूरा होने तक कभी पूरा नहीं होता. इस टीम की यही खूबी है कि हार माने बिना इसने वापसी की कोशिश की.’’ उन्होंने जर्मनी के वार झेलने वाले गोलकीपर पीआर श्रीजेश की खास तौर पर तारीफ करते हुए कहा, ‘‘गोल के सामने श्रीजेश जैसा खिलाड़ी होना अच्छी बात है. शुक्र है कि हमें शूटआउट में नहीं जाना पड़ा. वह भारतीय हॉकी का धुरंधर है. उसने काफी मेहनत की है और तभी यहां तक पहुंचा.’’

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