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भारतीय हॉकी को हर बार बुलंदी पर ले जाते हैं टोक्यो ओलंपिक, 1964 के बाद 2021 बना गवाह

Tokyo Olympics 2020: भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में मेडल जीता. उसने जर्मनी को 5-4 से हराया. (AP)

Tokyo Olympics 2020: भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में मेडल जीता. उसने जर्मनी को 5-4 से हराया. (AP)

Tokyo Olympics 2020: भारत की पुरुष हॉकी टीम (Indian Hockey Team) ने टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया है. अब भारत ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्ली. अब तो इस बात पर मुहर लग गई है कि टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) होते ही इसलिए हैं कि भारत (Indian Hockey) हॉकी में अपना परचम लहराता रहे. तभी तो टोक्यो गेम्स 2020 (Tokyo 2020) भारत को उस बुलंदी पर ले गया है, जो भारतीय हॉकी प्रेमियों का बरसों से सपना रहा है. सोने पर सुहागा यह कि भारत की दोनों टीमें (महिला एवं पुरुष) ऐसा कर रही हैं. भारत की पुरुष हॉकी टीम (Indian Hockey Team) ने टोक्यो में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया है. अब भारतीय महिला टीम शुक्रवार को मेडल के मुकाबले में उतरेगी. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) और भारतीय हॉकी (Indian Hockey) का क्या कुछ खास रिश्ता है. यह जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना होगा.

    भारत (India) का ओलंपिक में सुनहरा इतिहास है. टोक्यो गेम्स 2020 से पहले भारत ने ओलंपिक में 8 गोल्ड समेत 11 मेडल जीते थे. एक जमाना था जब भारतीय दल कोई मेडल लाए या ना लाए, लेकिन हॉकी टीम सोना जीतकर ही लौटती थी. हॉकी टीम के स्वर्णिम सफर का यह सिलसिला रोम में तब टूटा जब पाकिस्तान ने फाइनल में भारत को हरा दिया. तब हम सिल्वर लेकर लौटे थे. लेकिन मेडल जीतने के बावजूद हमारी हॉकी टीम की 1928 से चली आ रही बादशाहत छिन गई थी.

    1964 में टोक्यो में ओलंपिक गेम्स हुए. अब तो हर भारतीय को उगते सूरज के देश से आस थी. भारतीय खेलप्रेमियों के लिए उन दिनों ओलंपिक का मतलब बस हॉकी में गोल्ड जीतना हुआ करता था, जिसे 1960 में पाकिस्तान ने हमसे छीन लिया था. लेकिन यह दर्द ज्यादा नहीं रहा. भारत ने टोक्यो में ओलंपिक चैंपियन का अपना खोया रुतबा फिर हासिल कर लिया. वह भी डिफेंडिंग चैंपियन पाकिस्तान को हराकर.

    भारत ने ओलंपिक में 1964 के बाद एक और गोल्ड 1980 में जीता. मॉस्को ओलंपिक का यह गोल्ड भारतीय हॉकी के लिए एक बार फिर चैंपियन का रुतबा लेकर आया. लेकिन इसके बाद लंबा सूखा आया. 2008 आते-आते तो ऐसा लगने लगा कि भारत हॉकी में अब कभी मेडल जीत ही नहीं पाएगा. जब बीजिंग ओलंपिक के लिए भारत क्वालीफाई करने में नाकाम रहा तो देश में दो तरह के लोग सामने आए. एक वे जो इस हार से हताश होकर शोक संदेश लिख रहे थे और दूसरे वे जो अपनी हॉकी को फिर से बुलंदियों पर ले जाने का प्लान बना रहे थे.

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    जैसा कि होता है कामयाबी उसे ही मिलती है जो अंधेरा होने पर रोशनी का इंतजार करता है, ना कि निराशा में डूबता है. उम्मीद रखने वालों ने हॉकी ने निराश भी नहीं किया और आज हमारे पास एक बार फिर मेडल है. निराश-हताश लोग ब्रॉन्ज में भी कमियां निकालेंगे. लेकिन उनकी मत सुनिए. यह तो हमारी हॉकी का नया आगाज है. पुनर्जन्म. तभी तो 20वीं सदी में पुरुषों का राज था और 21वीं सदी में हमारी महिला और पुरुष टीम कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं. पुरुष टीम ने जर्मनी की दमदार टीम को 5-4 से हराकर मेडल पर कब्जा कर लिया है. महिला टीम के लिए मेडल जीतने का यही मौका शुक्रवार को आने वाला है.

    भारत की महिला टीम ने दिखाया है कि वह दुनिया की किसी भी टीम को हराने में सक्षम है. अब शुक्रवार को वह मेडल के मुकाबले में ब्रिटेन से भिड़ेगी. परिणाम तो वक्त के गर्भ में है. हम जीते तो मेडल लेकर आएंगे. लेकिन अगर हार गए तो.. यकीन मानिए भारतीय हॉकी टीमें तब भी चैंपियन जैसी ही होंगी. हमारी दोनों टीमों ने अब लड़ना सीख लिया है और जब आपको लड़ना आ जाए तो जीत बहुत दिन दूर नहीं रहती.

    Tags: Hockey, Indian Hockey, Olympics, Olympics 2020, Tokyo 2020, Tokyo Olympics, Tokyo Olympics 2020, ओलंपिक

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