अंतरराष्ट्रीय रेफरी अनुपमा का कोविड-19 के कारण निधन, हॉकी इंडिया ने जताया शोक

अनुपमा ने साल 2004 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर के तौर पर अपना करियर शुरू किया और वह अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैचों में महिला रेफरी की जिम्मेदारी निभाने वालीं पहली भारतीय महिला थीं. (Twitter)

अनुपमा ने साल 2004 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर के तौर पर अपना करियर शुरू किया और वह अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैचों में महिला रेफरी की जिम्मेदारी निभाने वालीं पहली भारतीय महिला थीं. (Twitter)

अनुपमा पचीमांडा (Anupama Puchimanda) ने रेफरी के तौर पर 88 अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैचों में जिम्मेदारी निभाई. वह अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैचों में महिला रेफरी की जिम्मेदारी निभाने वालीं पहली भारतीय महिला थीं. उन्होंने साल 2004 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 1:01 AM IST
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नई दिल्ली. हॉकी इंडिया (Hockey India) ने रविवार को पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर अनुपमा पचीमांडा (Anupama Puchimanda) के निधन पर शोक व्यक्त किया. अनुपमा की घातक कोविड-19 संबंधित परेशानियों के चलते बुधवार को मौत हो गई. अनुपमा ने कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में अंपायरिंग की जिसमें सैंटियागो में 2005 बीडीओ जूनियर विश्व कप (महिला), दिल्ली में 2013 में हीरो हॉकी वर्ल्ड लीग राउंड-2 और कुआलालुम्पुर में 2013 महिला एशिया कप शामिल हैं.

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ज्ञानेंद्रो निंगोम्बाम ने अनुपमा के शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, ‘सुबह हम बहुत ही बुरी खबर से साथ उठे, बेंगलुरु में अनुपमा के निधन की खबर मिली.’

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उन्होंने कहा, ‘वह भारत की पहली कुछ महिला अंपायरों में से एक थीं जिन्होंने बहुत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में अंपायरिंग की थी. हम, हॉकी इंडिया उनके परिवार के सदस्यों और दोस्तों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं.’


8 जुलाई 1980 को कोडागु (कर्नाटक के जिले) में जन्मी अनुपमा ने रेफरी के तौर पर 88 अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैचों में जिम्मेदारी निभाई. वह वर्ल्ड जूनियर हॉकी, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) में भी रेफरी रहीं. उन्होंने साल 2004 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर के तौर पर अपना करियर शुरू किया और वह अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैचों में महिला रेफरी की जिम्मेदारी निभाने वालीं पहली भारतीय महिला थीं. उन्हें अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ ने सबसे युवा अंपायरों के तौर पर चुना था जिसमें 10 पुरुष और महिला शामिल थे.
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