'बैडमिंटन असली खेल है-मुर्गो की लड़ाई नहीं'

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भारत की शीर्ष महिला युगल बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पेटा के नए विज्ञापन में मुर्गो की लड़ाई के खिलाफ जागरूकता फैलाती नजर आएंगी.

  • Agencies
  • Last Updated: August 5, 2016, 12:48 PM IST
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भारत की शीर्ष महिला युगल बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पेटा के नए विज्ञापन में मुर्गो की लड़ाई के खिलाफ जागरूकता फैलाती नजर आएंगी.

रियो ओलम्पिक में हिस्सा लेने के लिए ब्राजीलियाई महानगर रियो डी जेनेरियो पहुंच चुकीं ज्वाला पेटा के इस विज्ञापन में रैकेट लिए खड़ी हैं और उनके बगल में मुर्गे का चित्र बना हुआ है और लिखा हुआ है, 'बैडमिंटन असली खेल है-मुर्गो की लड़ाई नहीं'.

ज्वाला ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि लोग इस जागरूकता अभियान को गंभीरता से लेंगे. अगर आप कोई खेल खेलना चाहते हैं तो बैडमिंटन, क्रिकेट, टेनिस या इसी तरह का दूसरा कोई खेल खेलिए, लेकिन मुर्गो को मत लड़ाइए."



लड़ाई में इस्तेमाल होने वाले मुर्गो को आक्रामक बनाने के लिए उन्हें बेहद संकरे पिजड़ों में रखा जाता है. इसके अलावा लड़ाई में खून-खराबा और रोमांच को बढ़ाने के लिए मुर्गो के पंजों में बेहद नुकीले कांटे लगा दिए जाते हैं. लड़ाई में अक्सर मुर्गो की आंखें जख्मी हो जाती हैं और उनके पंख तथा पंजे टूट जाते हैं.
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