धोनी का छलका दर्द, भारत में मैच हारने पर क्रिकेटरों को समझा जाता है हत्यारा

टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी चाहते थे कि उनके जीवन पर बनी फिल्म ‘एमएस धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी’ में उनकी यात्रा को दिखाया जाए, लेकिन उनका गुणगान नहीं किया जाए. धोनी ने ये बातें खुद इस फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे से कही थी.

Bhasha
Updated: September 16, 2016, 1:58 PM IST
धोनी का छलका दर्द, भारत में मैच हारने पर क्रिकेटरों को समझा जाता है हत्यारा
File Photo: PTI
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Updated: September 16, 2016, 1:58 PM IST
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी चाहते थे कि उनके जीवन पर बनी फिल्म ‘एमएस धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी’ में उनकी यात्रा को दिखाया जाए, लेकिन उनका गुणगान नहीं किया जाए. धोनी ने ये बातें खुद इस फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे से कही थी.

दरअसल, इन दिनों अपनी फिल्म का प्रचार करने अमेरिका आए महेंद्र सिंह धोनी ने अपने जीवन और एक छोटे शहर के प्रतिभावान लड़के से भारत के सबसे सम्मानित कप्तानों में से एक बनने के बदलाव पर बात की. यह फिल्म दुनियाभर में 30 सितंबर को रिलीज होगी.

फिल्म को लेकर हुए क्रेजी
धोनी ने कहा, ‘एक चीज मैंने पांडे (निर्देशक नीरज) को कही कि इस फिल्म में मेरा गुणगान नहीं होना चाहिए. यह पेशेवर खिलाड़ी के सफर के बारे में है और इसे यही दिखाना चाहिए.’

धोनी से जब यह पूछा गया कि क्या वह चिंतित हैं कि फिल्म देखने के बाद एक व्यक्ति और क्रिकेटर के रूप में दुनिया उन्हें किस तरह देखेगी तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है.

वर्ल्ड कप का बड़ा असर पड़ा
उन्होंने कहा, ‘शुरूआत में जब फिल्म की धारणा रखी गई तो मैं थोड़ा चिंतित था, लेकिन एक बार काम शुरू होने के बाद मैं चिंतित नहीं था. मैं सिर्फ अपनी कहानी बयां कर रहा था.’
धोनी ने साथ ही अपने क्रिकेट जीवन के उन लम्हों को भी साझा किया, जिनका उन पर बड़ा असर पड़ा. भारतीय कप्तान ने कहा कि 2007 विश्व कप में हार और टीम के खिलाफ प्रतिक्रिया का उन पर गहरा असर पड़ा. कुछ हद तक यह अनुभव उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट रहा.

'मेरे घर पर पत्थर बरसाए थे'
उन्होंने कहा कि जब टीम क्रिकेट मैच हारती है तो भारत में समझा जाता है कि वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने कोई अपराध किया है या वे हत्यारे या आतंकवादी हैं. धोनी ने 2007 विश्व कप के पहले दौर से बाहर होने के बुरे समय को भी याद किया जब लोगों ने उनके घर पर पत्थर बरसाए थे.

धोनी ने स्वीकार किया कि उनकी कप्तानी उनकी दिल की आवाज अधिक है, क्योंकि उन्होंने जीवन के अनुभव से काफी कुछ सीखा है.

यह पूछने पर कि क्या वह खुद अपनी भूमिका निभा सकते थे तो धोनी ने कहा, ‘अभिनय काफी मुश्किल काम है. इसे अभिनेताओं पर छोड़ देना चाहिए, जिन्हें पता है कि क्या करना है. खड़गपुर रेलवे स्टेशन में टीटीई के रूप में काम करने ने उन्हें कड़ा बनाया और वह बेहतर व्यक्ति बने.’

सुशांत सिंह राजपूत की तारीफ
आत्मकथा के बारे में पूछने पर धोनी ने कहा कि किताब लिखने में अधिक प्रयास लगते हैं और ऐसा करने में समय लगेगा. उन्होंने कहा, ‘किताब अपना समय लेगी. किताब लिखने की धारणा असल में फिल्म से पहले आई थी, लेकिन इसके लिए अधिक प्रयास की जरूरत है. किताब अधिक विस्तृत होगी.’

धोनी ने फिल्म के एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को ‘शानदार अभिनेता’ करार दिया, जिन्होंने फिल्म के लिए कड़ी मेहनत की. धोनी ने बताया कि सुशांत चाहते थे कि उन्हें क्रिकेट खेलते हुए धोनी की मानसिकता के बारे में पता चले.

ऐसे मिलेगा ओलंपिक में मेडल
उन्होंने कहा, ‘यह मुश्किल था, क्योंकि काफी चीजें ऐसी थी जो मैं उसे नहीं बता सकता था. मैं अब भी सक्रिय क्रिकेट खेल रहा हूं और कप्तानी कर रहा हूं. पर्याप्त बुनियादी ढांचा और मार्गदर्शन के अलावा जज्बा भारत को ‘खेल राष्ट्र’ बना सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘खेल में कम समय में नतीजे नहीं मिलते. एक ओलंपिक के बाद अगर हम खेल में निवेश करें और कहें कि अगले ओलंपिक में स्वर्ण पदक मिलेगा तो खेल में ऐसा नहीं होता. यह ऐसे काम करता है कि आप बुनियादी ढांचा मुहैया कराएं, खानपान और स्वास्थ्य के बारे में शिक्षा दें. एक समय बाद जब सभी चीजें खिलाड़ियों को मिलेंगी तो देश खेल राष्ट्र के रूप में विकसित होगा.’
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