सड़क किनारे सब्जी बेच रही है नेशनल खिलाड़ी, मदद के नाम पर सरकार ने दिए सिर्फ 20 हजार

सड़क किनारे सब्जी बेच रही है नेशनल खिलाड़ी, मदद के नाम पर सरकार ने दिए सिर्फ 20 हजार
सब्जी बेच रही है नेशनल खिलाड़ी! (File Photo)

माता-पिता की नौकरी छूटने की वजह से एक नेशनल खिलाड़ी (National Player Selling Vegetables) सड़क किनारे सब्जी बेच रही है

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नई दिल्ली. जब खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाने की जगह दो वक्त की रोटी के लिए सड़क पर काम करने लगें तो सोचिए ये देश कैसे ओलिंपिक जैसी महाप्रतियोगिताओं में मेडल जीत सकता है. झारखंड के धनबाद में एक ऐसी ही नेशनल लेवल की खिलाड़ी सड़क पर सब्जी बेच रही है. राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज सोनू खातून (Archer Sonu Khatoon) आर्थिक तंगी की वजह से सब्जी बेचने को मजबूर है. गजब की बात तो ये है कि जब झारखंड सरकार को इसका पता चला तो उसने इस तीरंदाज की मदद की लेकिन मदद भी ऐसी कि जानकर कोई भी हैरान रह जाए.

झारखंड सरकार ने दिए 20 हजार रुपये
आर्थिक तंगी के कारण सब्जी बेचने को मजबूर राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज सोनू खातून को झारखंड सरकार ने बुधवार को 20,000 रुपये का चेक सौंपा. राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने धनबाद के उपायुक्त को सोनू खातून (Archer Sonu Khatoon) को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिये. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, 'यह पीड़ादायक है कि सोनू अपने परिवार के भरण पोषण के लिए सब्जी बेचने को विवश है.'

सोनू खातून के माता-पिता की नौकरी छूटी




प्रवक्ता ने बताया कि कि यह तीरंदाज धनुष टूट जाने के कारण खेल में सक्रिय रूप से भाग नहीं पायी और उन्हें सब्जी बेचकर जीविकोपार्जन करना पड़ा. उन्होंने कहा, 'इस तीरंदाज को सहायता स्वरूप बीस हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया. भविष्य में भी इन्हें जिला प्रशासन द्वारा हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी.' धनबाद जिला तीरंदाजी संघ के जुबेर आलम ने बताया कि 18 वर्षीय सोनू ने 2011 में राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में कांस्य पदक जीता था. तीन बहनों में सबसे बड़ी सोनू के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है.



पुणे मे जीता था कांस्य पदक
बता दें साल 2011 में सोनू खातून (Archer Sonu Khatoon) ने पुणे में हुए 56वें राष्ट्रीय स्कूल आर्चरी प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था. इसके बाद भी सोनू ने कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. वो टाटा आर्चरी एकेडमी में भी रही हैं. दो साल पहले उनका धनुष टूट गया और उसके बाद सोनू की प्रैक्टिस छूट गई. सोनू के पिता मजदूर हैं और मां घरों में सफाई करती हैं. कोरोना वायरस के बाद हुए लॉकडाउन के चलते उनकी नौकरी छूट गई. यही वजह है कि सोनू सड़क पर सब्जी बेच रही हैं. (भाषा के इनपुट के साथ)

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