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फेडरर-नडाल के फैंस को अब मान लेना चाहिए कि नोवाक जोकोविच इस सदी के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं

French Open: नोवाक जोकाविच ने फ्रेंच ओपन दूसरी बार जीता है. (PTI)

French Open: नोवाक जोकाविच ने फ्रेंच ओपन दूसरी बार जीता है. (PTI)

French Open 2021: नोवाक जोकोविच ने सितसिपास को हराकर फ्रेंच ओपन जीत लिया है. यह उनका 19वां ग्रैंडस्लैम खिताब है. टेनिसप्रेमी जानते हैं कि जब नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) 6 साल के थे तब उनके देश में गृहयुद्ध छिडा़ हुआ था. नाटो की सेनाएं उनके शहर पर कई-कई रात बम-गोले गिरातीं, मिसाइल छोड़तीं और नोवाक अपने परिवार के साथ दिन के उजाले का इंतजार करते रहते.

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नई दिल्ली. नोवाक जोकोविच, रोजर फेडरर, राफेल नडाल... इन तीनों खिलाड़ियों में सिर्फ उन्नीस-बीस का फर्क है. सर्बिया के नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) ने 19 ग्रैंडस्लैम खिताब जीते हैं. स्विस किंग फेडरर और स्पेनिश फाइटर नडाल के नाम 20-20 ग्रैंडस्लैम टाइटल हैं. लेकिन अगर आप इन तीनों दिग्गजों की राइवलरी को इसी नंबर के चश्मे से देखेंगे तो गलती कर सकते हैं. 19 टाइटल वाले नोवाक जोकोविच दरअसल रोजर फेडरर (Roger Federer) और राफेल नडाल (Rafael Nadal) दोनों पर ही बीस हैं. कैसे? यह जानने के लिए इन तीनों के करियर, उनके संघर्ष और उपलब्धियों पर नजर डालनी होगी.

21वीं सदी के टेनिस सुपरस्टार्स की जब भी बात होती है तो रोजर फेडरर और राफेल नडाल के नाम सबसे पहले आते हैं. इन दोनों के मुकाबलों को ही इस सदी की सबसे बड़ी राइवलरी कहकर बेचा गया. इसकी वजह भी जायज है. नोवाक के पहले ग्रैंडस्लैम टाइटल को चूमने से पहले फेडरर ऐसी 12 ट्रॉफियां अपने शोकेस में सजा चुके थे. फेडरर से 5 साल छोटे और जोकोविच से एक साल बड़े राफेल नडाल भी तब तक फ्रेंच ओपन (French Open) की 3 ट्रॉफियों घर ले जा चुके थे. 2008 की जनवरी में जब ऑस्ट्रेलियन ओपन शुरू हो रहा था तब जोकोविच के खाते में सिफर था और रोजर-राफा के नाम कुल 15 ग्रैंडस्लैम खिताब.

नोवाक जोकोविच ने 2008 में अपना पहला बड़ा खिताब जीता. सर्बियाई खिलाड़ी ने इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन अपने नाम किया. लेकिन इस जीत से उन्हें वह शोहरत या इज्जत नहीं मिली. वजह, नोवाक इस खिताब के बाद तकरीबन 36 महीने तक कोई ग्रैंडस्लैम नहीं जीत सके. इस दौरान नडाल ने छह और फेडरर ने चार ग्रैंडस्लैम खिताब अपनी झोली में और डाल लिए. यानी जब नोवाक के नाम सिर्फ एक ग्रैंडस्लैम टाइटल था तब फेडरर-नडाल मिलकर 25 ऐसी ट्रॉफियां अपने नाम कर चुके थे.

इसे कुछ यूं समझते हैं. जब नोवाक के नाम एक ग्रैंडस्लैम टाइटल था, तब फेडरर के पास 16 और नडाल के पास 9 ऐसी ट्रॉफियां थीं. आज नोवाक 19 ऐसे खिताब जीत चुके हैं. फेडरर-नडाल 20-20 खिताबों के साथ अब भी नंबर-1 हैं. लेकिन इन दोनों को ही यह बखूबी एहसास होगा कि नोवाक कभी भी वॉक करते हुए उनसे आगे निकल सकते हैं.


लेकिन यह ऐसी वजह नहीं, जिसके कारण हम नोवाक को फेडरर और नडाल से बीस बता रहे हैं. इसके अनेक कारण हैं. पहला कारण तो आमने-सामने के रिकॉर्ड का ही है. फेडरर और नडाल ने नोवाक को जितने मैचों में हराया है, उससे ज्यादा में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है. नोवाक दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने फेडरर और नडाल को हराया ज्यादा है और उनसे हारे कम हैं. नडाल के खिलाफ उनका जीत-हार का रिकॉर्ड 30-28 का है. फेडरर सर्बिया के अपने इस प्रतिद्वंद्वी से 23-27 से पीछे हैं.

यह भी पढ़ें: French Open: क्या यह राफेल नडाल की सबसे बड़ी हार है?

वैसे, यह भी ऐसी वजह नहीं, जो नोवाक को अपने दिग्गज साथियों से बीस  साबित करती है. जीत-हार से ज्यादा बड़ी वजह खेल की बारीकी या विभिन्नता है. तीनों दिग्गजों में नोवाक अकेले हैं, जिन पर किसी खास कोर्ट (हार्ड, क्ले, ग्रास) का स्पेशलिस्ट होने का टैग नहीं लगता. राफेल के शोकेस में जहां पेरिस की लाल बजरी का रंग ज्यादा दिखेगा तो फेडरर की ट्रॉफियों में विंबलडन की घास की हरियाली खूब नजर आएगी.

नोवाक जोकोविच पिछले 50 साल में ऐसे पहले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने हर ग्रैंडस्लैम को कम से कम दो-दो बार जीता है. उनसे पहले ऐसा रॉड लेवर ने किया था. नडाल ने 20 में से 13 ग्रैंडस्लैम पेरिस में जीते हैं तो फेडरर ने ऐसी 8 ट्रॉफियां लंदन में जीती हैं. फेडरर फ्रेंच ओपन और नडाल ऑस्ट्रेलियन ओपन सिर्फ एक बार जीत पाए हैं. इत्तफाक से दोनों को यह जीत 2009 में मिली थी.


आपको एक और कारण जानना चाहिए जो नोवाक को फेडरर और नडाल से आगे ले जा सकता है. वह है लड़ाकापन. आपने ‘मसल्समैन’ राफा को दबाव में अक्सर चीखते-चिल्लाते, हारते-बिखरते देखा होगा. आक्रामकता के लिए नडाल को आमतौर पर जोकोविच या नडाल से ज्यादा नंबर दिए जाते हैं. लेकिन जोकोविच ऐसे मौके पर जिस मुस्कुराहट के साथ दबाव को परे धकेलते हैं, वह अद्भुत है. फेडरर को पसंद किए जाने की एक वजह उनके खेल के साथ-साथ उनकी खूबसूरत स्माइल भी है, लेकिन स्विट्जरलैंड का यह सितारा हारते वक्त खासा परेशान नजर आता है. मुस्कुराता तो बिलकुल भी नहीं है. वहीं, जोकोविच हारते वक्त भी कम ही बिखरते हैं. फ्रेंच ओपन (French Open 2021) के फाइनल में सितसिपास (Stefanos Tsitsipas) से 2 सेट से पिछड़ने के बावजूद नोवाक दर्शकों को चियर करने के लिए कह रहे थे. और यह वो नजारा है, जो बार-बार दिख्ता है. विरोधी खिलाड़ी अगर मैच प्वाइंट पर है तब भी नोवाक दर्शकों से चिल और चियर करने की उम्मीद करते हैं. प्यारी मुस्कुराहट के साथ.

हार के कगार पर भी ना हारने की यह अदा जोकोविच के बचपन से जुड़ी है. टेनिसप्रेमी जानते हैं कि जब नोवाक 6 साल के थे तब उनके देश में गृहयुद्ध छिडा़ हुआ था. नाटो की सेनाएं उनके शहर पर कई-कई रात बम-गोले गिरातीं, मिसाइल छोड़तीं और नोवाक अपने परिवार के साथ दिन के उजाले का इंतजार करते. उजाले की यही उम्मीद नोवाक के खेल में नजर आती है. उनके खेल की यही तासीर यह संभावना भी पैदा करती है कि जब नोवाक रिटायर होंगे, तब उनके नाम फेडरर-नडाल या किसी और पुरुष खिलाड़ी के मुकाबले ज्यादा ग्रैंडस्लैम होंगे. फेडरर और नडाल के फैंस को भी यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि नोवाक ने उनके चहेते सितारों को बार-बार हराकर यह साबित कर दिया है कि 21वीं सदी में वे अपने हर प्रतिद्वंद्वी पर बीस ही नहीं इक्कीस हैं.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

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