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15 जनवरी… 29 साल पुरानी वो तारीख… जब इंदौरी क्रिकेटर ने रचा था इतिहास

15 जनवरी… 29 साल पुरानी वो तारीख… जब इंदौरी क्रिकेटर ने रचा था इतिहास

15 जनवरी… मकर संक्राति का अगला दिन… उत्तरायण का सूर्य…. मौसम में गुलाबी ठंड… और चेन्नई (उस वक्त मद्रास) शहर… जी हां 29 साल पहले कुछ ऐसा ही अहसास था… जब मूल रूप से उत्तर प्रदेश के और इंदौर में रच बस गए… नरेन्द्र हिरवानी ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था.

15 जनवरी… मकर संक्राति का अगला दिन… उत्तरायण का सूर्य…. मौसम में गुलाबी ठंड… और चेन्नई (उस वक्त मद्रास) शहर… जी हां 29 साल पहले कुछ ऐसा ही अहसास था… जब मूल रूप से उत्तर प्रदेश के और इंदौर में रच बस गए… नरेन्द्र हिरवानी ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था.

15 जनवरी… मकर संक्राति का अगला दिन… उत्तरायण का सूर्य…. मौसम में गुलाबी ठंड… और चेन्नई (उस वक्त मद्रास) शहर… जी हां 29 साल पहले कुछ ऐसा ही अहसास था… जब मूल रूप से उत्तर प्रदेश के और इंदौर में रच बस गए… नरेन्द्र हिरवानी ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था.

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  • Pradesh18
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    15 जनवरी… मकर संक्राति का अगला दिन… उत्तरायण का सूर्य…. मौसम में गुलाबी ठंड… और चेन्नई (उस वक्त मद्रास) शहर… जी हां 29 साल पहले कुछ ऐसा ही अहसास था… जब मूल रूप से उत्तर प्रदेश के और इंदौर में रच बस गए… नरेन्द्र हिरवानी ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था.

    हिरवानी ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण 11 जनवरी 1988 को किया और चार दिन बाद 15 जनवरी 1988 को रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हो गया. हिरवानी के नाम पदार्पण टेस्ट में विश्व में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड दर्ज हैं. हिरवानी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में 136 रन पर 16 विकेट लिए थे.

    भारत के लिए यह टेस्ट बेहद अहम था. चार टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले तीन टेस्ट बाद वेस्टइंडीज को 1-0 से बढ़त मिली हुई थी. सीरीज में बराबरी हासिल करने के लिए यह टेस्ट जीतना हर हाल में जरूरी थी. ऐसे निर्णायक टेस्ट में नरेन्द्र हिरवानी को पदार्पण का मौका मिला था.

    स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों की कमजोरी का हिरवानी ने पूरा फायदा उठाया. चेपॉक का विकेट कुछ ऐसा था कि पहले ही दिन से उस पर गेंद जबर्दस्त तरीके से घूमाव ले रही थी.

    Narendra Hirwani

    भारत ने पहली पारी में कपिल देव के शतक की बदौलत 382 रन बनाए. मैच के पहले दिन तो हिरवानी को कोई मौका नहीं मिला. दूसरे दिन वेस्टइंडीज को बल्लेबाजी का और हिरवानी को अपनी गेंदबाजी का जलवा दिखाने का मौका मिला.

    हिरवानी ने गस लोगी, रिची रिचडर्सन और कार्ल हूपर के रूप में तीन विकेट लिए. दूसरे दिन का खेल खत्म होने पर वेस्टइंडीज का स्कोर पांच विकेट पर 147 रन था.

    तीसरा दिन हिरवानी के लिए बेहद खास रहा था. वेस्टइंडीज ने पांच विकेट से 147 रन से आगे खेलना शुरू किया और शेष पांचों विकेट हिरवानी ने झटक लिए, जिसमें महान बल्लेबाज सर विवियन रिचर्डस का विकेट भी शामिल था.

    हिरवानी ने 68 रन के निजी स्कोर पर रिचर्डस को क्लीन बोल्ड कर दिया था. हिरवानी को अब भी वो गेंद याद हैं, 'वो गुगली थी जिसे दुनिया का सबसे धाकड़ बल्लेबाज पढ़ने में नाकाम रहा था और उसके डंडे उड़ गए.' पहली पारी के बाद हिरवानी का गेंदबाजी विश्लेषण था 18.3 ओवर में 61 रन देकर आठ विकेट.

    भारत ने तीसरे दिन चार विकेट पर 181 रन बनाए और चौथे दिन आठ विकेट पर 217 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी. वेस्टइंडीज को जीत के लिए 416 रन का लक्ष्य मिला था.

    41.2 ओवर में मैच का नतीजा आ गया. हिरवानी ने दूसरी पारी में भी वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों की कमर तोड़ दी. इस बार तो महज 15.2 ओवर में ही उन्होंने 75 रन देकर आठ विकेट चटकाए, जिसमें सर विव रिचर्ड्स का विकेट फिर शामिल था. इस बार सर रिचर्ड्स केवल चार रन बना पाए थे.

    दरअसल, पहली पारी में हिरवानी की गेंदबाजी से वेस्टइंडीज के बल्लेबाज इस तरह खौफजदा हुए कि दूसरी पारी में उन्होंने गेंदबाजी आक्रमण से हटाने के लिए आक्रमक बल्लेबाजी करना शुरू कर दी थी. नतीजा यह रहा कि पांच बल्लेबाज स्टंप आउट हुए. इस तरह हिरवानी के नाम पर पदार्पण टेस्ट में सबसे किफायती गेंदबाजी कर 16 विकेट हासिल करने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया.

    नरेंद्र हिरवानी के नाम पर 17 टेस्ट मैचों में 66 विकेट दर्ज हैं. वहीं, 18 वनडे में हिरवानी ने 23
    विकेट हासिल किए थे.

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