अचंत शरत कमल: भारत में टेबल टेनिस को पहचान दिलाने वाले खिलाड़ी, जिसने दी खेल को नई दिशा

अचंत शरत कमल: भारत में टेबल टेनिस को पहचान दिलाने वाले खिलाड़ी, जिसने दी खेल को नई दिशा
अचंत शकत कमल भारत के टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं

अचंत शरत कमल (Achant Sharat Kamal) कॉमनवेल्थ में टेबल टेनिस चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक पाने वाले प्रथम भारतीय खिलाड़ी हैं

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नई दिल्ली.  पिछले कुछ सालों में भारत में हर खेल के स्तर पर सुधार हुआ है. बात करे टेबल टेनिस (Table Tennis) की तो पिछले कुछ समय में भारत (India) में लोग इस खेल को और खेल से जुड़े लोगों को जानने लगे हैं. इसका अधिकतर श्रेय जाता है अचंत शरत कमल (Achantha Sharath Kamal) को जिन्होंने लगभग दो दशकों से इस खेल को भारत में जिंदा रखा है. तमिलनाडु के इस खिलाड़ी ने विदेशों के दबदबे वाले इस खेल में भारत (India) का प्रतिनिधित्व किया.

2003 से शुरू हुआ अचंत का सफर
अचंत शरत ने अपनी योग्यता तभी साबित करनी शुरू कर दी थी जब उन्होंने तमिलनाडु राज्य के खिताब पर सीनियर कैटेगरी में कब्जा कर लिया था. उन्होंने 2003 में टेबिल टेनिस की राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती थी. इसके बाद 2004 में शरत कमल ने कुआलांलपुर में हुई 16वीं राष्ट्रमंडल टेबिल टेनिस चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता.

इसके बाद 2004 में शरत कमल ने क्वालांलपुर में हुई 16वीं राष्ट्रमंडल टेबल टेनिस चैंपियनशिप (Commonwealth Table Tennis Championship) में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता. अचंत शरत कमल (Achantha Sharath Kamal) ने यह पदक जीत कर प्रथम भारतीय खिलाड़ी होने का गौरव पाया. इसी कारण उन्हें उस साल अर्जुन अवॉर्ड दिया गया.



बीजिंग ओलिंपिक ने बदली भारत में टेबल टेनिस की दशा


उन्होंने कतर में 2006 एशियन गेम्स (Asian Games) और कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में देश का प्रतिनिधित्व किया और सुर्खियां बटोरीं. शरत कमल धीरे-धीरे इस खेल के पोस्टर बॉय बनते जा रहे थे. साल 2008 में वह बीजिंग ओलिंपिक गेम्स में शिरकत करने वाले इकलौते भारतीय सिंगल्स खिलाड़ी बने. वह भारत में उस खेल को आगे ले जाना चाहते थे. उनका मानना है कि बीजिंग गेम्स ने भारत टेबल टेनिस टेनिस की दशा बदली और वे एक इस मुल्क में एक अच्छी शुरुआत की तरह गिना जाएगा.

उन्होंने 2010 में मिशिगन में आयोजित US टेबल टेनिस चैंपियनशिप जीती. उसी साल उन्होंने मिस्र ओपन भी जीता. ITTF प्रो टूर पर सिंगल ख़िताब जीतने वाले वह पहले भारतीय बने. उन्होंने पुरुषों के टीम की भी अगुवाई की, जिसने नौ बार की चैंपियन इंग्लैंड को हराया.

अचंत शरत कमल ने युवाओं को किया प्रेरित
 साथियान गणानाशेखरन (G Sathiyan) और मनिका बत्रा (Manika Batra) ने इनके कदमों पर चल अपनी एक अलग जगह बना ली है और यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय टेबल टेनिस (Table Tennis) का भविष्य सुरक्षित हाथों में है. 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में जब भारत ने दो गोल्ड मेडल जीत बता दिया कि खेल कोई भी हो, मेहनत और अनुभव बहुत अहम पहलू निभाता है. एशियन गेम्स में मेंस टीम और मिक्स्ड टीम ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत अपने फॉर्म को जारी रखा. व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने के अतिरिक्त अंचत ने सिंगापुर के विरुद्ध भारतीय टेबिल टेनिस को जिताने में महत्त्वपूर्ण रोल अदा किया.

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