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ओलंपिक 2036 की मेज़बानी के लिए अहमदाबाद शुरू करेगा तैयारियां, जानें कैसे होता है शहर का चुनाव

2036 की मेजबानी करना चाहता है अहमदाबाद, जल्द शुरू करेगा तैयारियां (सांकेतिक तस्वीर)

जानिए ओलंपिक (Olympics) का इतिहास और कैसे किया जाता है मेज़बान शहर का चुनाव? ओलंपिक का आयोजन तभी हो सकता है अगर कोई शहर दो लाख करोड़ की राशि खर्च करने की क्षमता रखता हो

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जय मिश्रा
अहमदाबाद.
खबर है कि सरकार ने 2036 में अहमदाबाद में ओलंपिक खेलों के आयोजनों की मेज़बानी की तैयारियां शुरू कर दी हैं. अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (AUDA) ने इसके लिए अहमदाबाद में जरूरी बुनियादी सुविधाओं के सर्वेक्षण के लिए एक एजेंसी की सेवा लेने की तैयारी कर रही है ताकि यहां 2036 में ओलंपिक खेलों का आयोजन किया जा सके. यह एजेंसी अहमदाबाद में अगले तीन महीने में सर्वेक्षण करेगी और ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए जरूरी बातों से संबंधित एक रिपोर्ट पेश करेगी. जानिए ओलंपिक का इतिहास और कैसे होता है मेज़बान शहर का चुनाव, अहमदाबाद शहर की क्या है विशेषता?

ओलंपिक की मेज़बानी के लिए शहर का चुनाव कैसे होता है?
ओलंपिक खेलों की मेज़बानी के लिए शहर का चुनाव अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक कमिटी (IOC) करती है. हर दो साल पर दुनिया के बड़े शहर इसके लिए नामांकन करते हैं. बहुत मुमकिन यह है कि ओलंपिक की मेज़बानी के लिए शहर का चुनाव सात साल पहले हुआ. शहर के चुनाव में कई बातों का ध्यान रखा जाता है. खेल परिसरों की सुविधा और पर्यटकों, पत्रकारों, एथलीटों आदि के लिए रहने की अच्छी व्यवस्था. सक्षम ट्रांसपोर्ट व्यवस्था, स्टेडियम और प्रैक्टिस स्थलों पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा व्यवस्था शामिल है.

दूसरे चरण में क्या होता है?
दूसरे चरण में, विश्व एटलस के अनुसार, जो शहर ओलंपिक की मेज़बानी का दावा पेश करना चाहते हैं उन्हें $150,000 की फ़ीस ओलंपिक कमिटी को देनी होती है. हालाँकि, नए नियम के तहत IOC इस बात पर ग़ौर करती है कि शहर में कौन-कौन सी सुविधाएँ पहले से मौजूद हैं.

निविदा के लिए प्रेज़ेंटेशन
ओलंपिक की मेज़बानी के लिए शहर को कुल छह मुद्दों की तैयारी करनी होती है और IOC को इसके बारे में रिपोर्ट पेश कर बताना होता है. इनमें शामिल हैं प्रतिस्पर्धा के लिए विजन और लेगेसी, आयोजन स्थल का मास्टर प्लान, अलायन्मेंट-रीजनल विकास योजना, आयोजन के लिए फ़ंडिंग, खेलों की तिथि, एथलीटों का अनुभव, ओलंपिक गांवों, दर्शकों के लिए सुविधाएं, पैरालिम्पिक खेलों की योजना, प्रशासन और सुरक्षा आदि. शहर को ये सारी सूचनाएं देनी होती हैं. इन सभी मामलों में, शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है और इसके बाद ही शहर का चुनाव होता है.

ओलंपिक के आयोजन पर कितना खर्च होता है?
ओलंपिक का आयोजन तभी हो सकता है अगर भारत का कोई शहर दो लाख करोड़ की राशि खर्च करने की क्षमता रखता है. टोक्यो ओलंपिक का बजट 7.3 अरब डॉलर था जबकि इस पर 25 अरब डॉलर तक का खर्च हुआ. 2016 के रियो ओलंपिक का बजट 17 अरब डॉलर का था जबकि वास्तविक खर्च 20 अरब डॉलर हुआ.

ओलंपिक का इतिहास
हर चार साल पर आयोजित होने वाला ओलंपिक दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन है. 1986 से इसकी शुरुआत दुनियाभर में होने लगी. पहली बार दुनिया में ओलंपिक का आयोजन एथेंस, यूनान में हुआ. इस प्रतिस्पर्धा में दुनिया के 14 देशों ने हिस्सा लिया. 1992 तक, ग्रीष्म और शीतकालीन ओलंपिक खेलों का आयोजन होता था. पर बाद में निर्णय लिया गया कि ये दोनों ही ओलंपिक अलग-अलग आयोजित होंगे, एकसाथ नहीं. ग्रीष्म ओलंपिक जुलाई से अगस्त के बीच आयोजित होता है जबकि शीतकालीन ओलंपिक का आयोजन मार्च में होता है.

कौन-कौन से खेल हैं शामिल
ग्रीष्म और शीत ओलंपिक खेलों में अलग-अलग खेलों को शामिल किया गया है. ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में तीरंदाज़ी, एथलेटिक्स (फ़ील्ड एंड ट्रैक), एथलेटिक्स (मैराथन-रेस वॉक्स), एक्वेटिक्स, एक्वेटिक्स (तैराकी मैराथन), बैडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, कनोई-कयक, कनोई-कयक (स्प्रिंग), माउंटेन बाइक, साइक्लिंग (रोड), साइक्लिंग (ट्रैक), इक्वेस्ट्रीयन, फेंसिंग, फ़ुट्बॉल (फ़ाइनल्ज़), फ़ुट्बॉल (प्रिलिम्स), गोल्फ़, जिमनास्टिक्स, हैंड्बॉल, हॉकी, जूडो, मॉडर्न पेंटाथलॉन, रोविंग, रग्बी, सेलिंग, ताएकवोंडों, टेनिस, ट्रायऐथलॉन, वॉलीबॉल, वॉलीबॉल (बीच), वेटलिफ़्टिंग, कुश्ती को ग्रीष्म ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया है.

ओलंपिक की इनामी राशि
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति कोई नक़द पुरस्कार नहीं देता है लेकिन कई देश अपने मेडल जीतने वाले एथलीटों को बोनस देते हैं. अमेरिका अपने एथलीटों को गोल्ड मेडल जीतने पर $37,500, सिल्वर मेडल जीतने पर $22,500 और ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर $15,000 देता है. टीम खेलों में हर खिलाड़ियों के बीच राशि बांट दी जाती है.
Published by:Anoop Dev Singh
First published: