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सेना के इस जांबाज जवान ने देश के लिए खो दिया था एक पैर, अब जीता ऐतिहासिक गोल्ड

News18Hindi
Updated: October 29, 2019, 2:58 PM IST
सेना के इस जांबाज जवान ने देश के लिए खो दिया था एक पैर, अब जीता ऐतिहासिक गोल्ड
आनंदा गुनासेकरन भारतीय सेना में सूबेदार की रैंक पर हैं

आनंदा गुनासेकरन (Anandan Gunasekaran) ने साल 2005 भारतीय सेना (Indian Army) की मद्रास सैपर्स (Madras Sappers) रेजिमेंट में साथ शामिल हुए थे.

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  • Last Updated: October 29, 2019, 2:58 PM IST
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नई दिल्ली. चीन (China) के वुहान (Wuhan) में हुए मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स (Military World Games) में भारत (India) के जांबजों का प्रदर्शन शानदार रहा. भारत के लिए मेडल जीतने वालों में 32 साल के आनंदन गुनासेकरन (Anandan Gunasekaran) भी शामिल है जिन्होंने देश के लिए इन खेलों में तीन गोल्ड मेडल हासिल किए. ब्लेड रनर आनंदन (Anandan Gunasekaran) देश के लिए अपना एक पैर खो चुके हैं का अब पैराओलिंपिक्स (Paraolympics) में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं. आनंदन (Anandan Gunasekaran) ने वुहान में 100मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था. उन्होंने 100 मीटर में 12.00 सेकंड का समय निकालकर टूर्नामेंट में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया.

2008 में बम बलास्ट में खोया था एक पैर
गुनासेकरन ने साल 2005 भारतीय सेना में शामिल हुए थे. हालांकि रनिंग उन्होंने साल 2008 में हुए हादसे के बाद ही शुरू की. न्यूज18 की खबर के मुताबिक साल 2008 के जून में जम्मू और कश्मीर के कुपवारा जिले के नाउगाम इलाके में बम बलास्ट हुआ था जिसमें गुनासेकरन ने अपना पैर खो दिया था. हादसे को याद करते हुए गुनासेकरन ने बताया, 'उस दिन हम एलओसी पर वायर चेकिंग कर रहे थे. मेरे तीन साथी मुझसे आगे चल रहे थे. तभी मेरा पैर लैंडमाइन के ऊपर रखा गया. वह इलाका माइन फील्ड नहीं था लेकिन शायद मेरी ही किसमत खराब थी.'

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आनंदन गुनासेकरन ने वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में तीन गोल्ड मेडल हासिल किए हैं


बलास्ट के बाद उन्हें श्रीनगर के अस्पताल में लाया गया जहां से उन्हें पुणे ट्रांसफर किया गया. पुणे के अस्पताल में ही उनका ऑपरेशन किया गया और पैर के घुटने से नीचे का हिस्सा कटा गया. गुनासेकरन ने बताया कि अगले छह महीने तक उन्होंने अपने परिवार को इस बारे में नहीं बताया. जब वह घर पहुंचे तो उनकी मां दोबारा ड्यूटी जॉइन करने के खिलाफ थी लेकिन गुनासेकरन घर से भाग गए और ड्यूटी जॉइन की.

भारतीय सेना ने दिया प्रोसथेटिक ब्लेड

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साल 2008 में नाउगाम में हुए बम बलास्ट में आनंदा गुनासेकरन ने अपना एक पैर खो दिया था

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हादसे के बाद उनकी दिलचस्पी पैराओलिंपिक खेलों की ओर बढ़ी और उन्होंने रनिंग शुरू की. साल 2012 में उन्होंने लकड़ी के प्रोसथेटिक लेग से 2.5 किमी का रास्ता 9.58 मिनट में तय किया और अपने कमांडर से प्रोसथेटिक ब्लेड की डिमांड की जो उन्हें साल 2014 में मिला. यहां से उनके एथलेटिक सफर की शुरुआत हुई. उन्होंने साल 2014 में पैराओलिंपिक ग्रैंड प्रिक्स में तीन मेडल हासिल किए.
इसके बाद से उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने शुरू किया. अपने सफर पर गुनासेकरन ने कहा, 'हर इंसान के लिए जरूरी है कि वह कभी मुश्किल हालातों में हिम्मत नहीं हारे. जिंदगी में मेरा लक्ष्य है कि जब भी मैं गिरुं खुद को संभालूं और फिर खड़ा होकर दौड़ना शुरू करूं.

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First published: October 29, 2019, 2:11 PM IST
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