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सियाचिन में ड्यूटी के दौरान बर्फ से परेशान हो बने खिलाड़ी, अब भारत की ओर से खेलेंगे ओलिंपिक

News18Hindi
Updated: October 5, 2019, 5:14 PM IST
सियाचिन में ड्यूटी के दौरान बर्फ से परेशान हो बने खिलाड़ी, अब भारत की ओर से खेलेंगे ओलिंपिक
अविनाश 18 साल की उम्र से सेना में हैं

अविनाश साबले (Avinash Sable) 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद 5 महर रेजीमेंट से जुड़ गए थे. साल 2013-14 में सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier) में तैनात थे

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  • Last Updated: October 5, 2019, 5:14 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के अविनाश सबले (Avinash Sable)   ने दोहा (Doha) में चल रही विश्व चैंपियनशिप (World Athletics Championship)  में पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज इवेंट में अपने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ते हुए टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympic) के लिए क्वालिफाई किया, लेकिन वह फाइनल में 13वें स्थान पर रहे. अविनाश ने तीन दिन में दूसरी बार अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा.

महाराष्ट्र के मांडवा गांव के किसान के बेटे अविनाश ने आठ मिनट 21.37 सेकेंड का समय निकालकर ओलिंपिक क्वालिफाइंग मानक समय 8:22.00 से बेहतर प्रदर्शन किया लेकिन वह शुक्रवार की रात पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में 13वें स्थान पर रहे. भारतीय सेना के इस 25 वर्षीय हवलदार ने कई मुश्किलों का सामना किया है.

सियाचिन की मुश्किलों ने दी खेलने की प्रेरणा

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अविनाश साबले ने 8 मिनट 21.37 सेकंड का समय लिया और टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया.


अविनाश 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद 5 महार रेजीमेंट से जुड़ गए थे. साल 2013-14 में सियाचिन ग्लेशियर में तैनात थे. इस दौरान उन्होंने बहुत सी मुश्किलों का सामना किया. अविनाश ने ईएसपीएन को बताया, 'मैं बहुत छोटा था और वहां बहुत अकेला महसूस करता था. मैं अपने परिवार वालों से भी बात नहीं कर पाता. मैंने जिंदगी में पहले कभी बर्फ नहीं देखी थी. वहां हर जगह बर्फ ही थी. वहां केवल ठंड थी.' अविनाश ने बताया कि उन्होंने इसके बाद ही तय किया कि वह खेल की ओर अपना ध्यान लगाएंगे ताकि उन्हें सियाचिन जैसी जगह ना जाना पड़ा. इसके बाद उनकी तैनाती 2015 में लालगढ़ जाटान में हुई जहां उन्हें साथियों ने खेल में आगे बढ़ने की सलाह दी.

साल 2015 में शुरू किया करियर

वर्ष 2015 में उन्होंने अंतर-सेना क्रॉस कंट्री रेस में हिस्सा लिया और फिर वह सेना के कोच अमरीश कुमार के मार्गदर्शन में 2017 में स्टीपलचेज में भाग लेने लगे. मंगलवार को वह हीट रेस में जगह बनाने नाकाम रहे थे लेकिन नाटकीय परिस्थितियों के बाद उन्होंने शुक्रवार को फाइनल में जगह बनाई.
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भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने विरोध दर्ज कराया था कि हीट के दौरान अन्य खिलाड़ियों ने उनके मार्ग में बाधा उत्पन्न की थी. इसे विरोध को स्वीकार किए जाने के बाद उन्हें पुरूषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में शामिल किया गया.

वीडियो फुटेज की जांच के बाद रेस के रैफरी ने माना कि दो मौकों पर अविनाश के मार्ग में रूकावट पैदा की गयी थी. भारत के विरोध को स्वीकार कर लिया गया और नियम 163.2 (बाधा पहुंचाने) के अंतर्गत उन्हें फाइनल में शामिल किया गया.

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First published: October 5, 2019, 5:14 PM IST
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