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Wrestling World Championship : भारतीय पहलवानों के दांव से दुनिया हुई चित, जानिए रजत मिलने के बाद भी कैसे 'सुनहरा' रहा ये सफर

News18Hindi
Updated: September 30, 2019, 7:37 PM IST
Wrestling World Championship : भारतीय पहलवानों के दांव से दुनिया हुई चित, जानिए रजत मिलने के बाद भी कैसे 'सुनहरा' रहा ये सफर
भारत (India) ने इस साल वर्ल्ड चैंपियनशिप (World wrestling Championship) में एक सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल समेत कुल पांच मेडल हासिल किए. इस टूर्नामेंट में यह अब तक का भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है

भारत (India) ने इस साल वर्ल्ड चैंपियनशिप (World wrestling Championship) में एक सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल समेत कुल पांच मेडल हासिल किए. इस टूर्नामेंट में यह अब तक का भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है

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  • Last Updated: September 30, 2019, 7:37 PM IST
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नई दिल्ली. कजाकिस्तान के नूर सुल्तान (Noor Sultan) में इस साल हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप (World Wrestling Championship) कई मायनों में भारत के लिए खास रही. अखाड़ों में ट्रेन होकर निकले भारतीय रेसलर्स (Indian Wrestlers) ने दुनिया के मैट पर ऐसे दांव लगाए कि सब उनके मुरीद हो गए. भारत ने इस साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल समेत कुल पांच मेडल हासिल किए. इस टूर्नामेंट में यह अब तक का भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. भारत के लिए दीपक पूनिया  (86 किग्रा)  ने सिल्वर, रवि कुमार दाहिया (57 किग्रा), राहुल अवारे (61 किग्रा), बजरंग पूनिया (65 किग्रा) और विनेश फोगाट ने (53 किग्रा) ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. राहुल अवारे को छोड़कर बाकी सभी ने ओलिंपिक कोटा भी हासिल किया.

विनेश और बजरंग तक सीमित नहीं रही भारतीय रेसलिंग
टूर्नामेंट से पहले भारत की मेडल की सबसे ज्यादा उम्मीदें बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) औऱ विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) से थी जिन्होंने कॉमनवेल्थ (Commonwealth Games) और एशियन गेम्स (Asian Games) में देश को गोल़्ड मेडल दिलाया था. टूर्नामेंट का अंत होते-होते भारत को ऐसे रेसलर मिले जिनसे भारतीय फैंस अब ओलिंपिक में मेडल की उम्मीद करेंगे. इन रेसलर्स में सबसे बड़ा नाम नाम बनकर उभरे हैं  जूनियर वर्ल्ड चैंपियन दीपक पूनिया. दीपक पहली बार सीनियर टूर्नामेंट में उतरे, और पहली बार में ही ऐतिहासिक सिल्वर मेडल हासिल कर लिया. मेडल के साथ-साथ उन्होंने देश के लिए ओलिंपिक कोटा भी हासिल किया. 19 साल के इस खिलाड़ी ने हर मैच में बार पूरे दबदबे के साथ जीत हासिल की ताकी कोई भी उन्हें बच्चा समझने की भूल न करे.

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दीपक पूनिया ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है


भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ताकत, तकनीक, रणनीति और जोश से न सिर्फ दिग्गजों को मात दी बल्कि विरोधियों, उनके कोच और मैच देखने आए दर्शकों को भी प्रभावित किया. हालांकि देश की सबसे बड़ी पहचान सुशील कुमार इस बार कमाल नहीं कर पाए लेकिन बाकी रेसलर्स के प्रदर्शन ने तिरंगे की शान को कम नहीं होने दिया. स्क्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के कोच ने भारतीय खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा, 'भारत की रेसलिंग में बहुत सुधार हुआ है, पहले उनकी पहचान केवल सुशील कुमार थे लेकिन अब यह उससे कहीं ज्यादा है.'

भारतीय रेसलर्स की ताकत से हैरान दुनिया
कई विदेशी कोच भारतीय खिलाड़ियों के स्टेमिना और ताकत से हैरान दिखे. सेमीफाइनल मुकाबले में भारत के स्टार रेसलर बजरंग पूनिया का सामना करने वाले दौलत नियाजबेकोव के कोच ने बजरंग की तारीफ करते हुए स्क्रोल  से कहा, 'वह कमाल के रेसलर हैं, छह मिनट के मुकाबले में उनकी ताकत देखने लायक हैं. उनके जैसा स्टेमिना दुनिया के किसी भी रेसलर में नहीं है.' भारत को ब्रॉन्ज दिलाने वाले रवि दाहिया भी भले ही सेमीफाइनल में हार गए हों लेकिन उन्होंने अपने खेल से विरोधियों को भी अपना फैन बना लिया. सेमीफाइनल में रवि को हराने वाले रेसलर उगयुव ने माना कि ओलिंपिक में रवि मेडल के बड़े दावेदार होने वाले हैं क्योंकि उनके अंदर जिस तरह की ताकत है वह किसी भी बड़े रेसलर को मात दे सकते हैं.
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बजरंग पुनिया पिछले सत्र में सिल्वर मेडल और 2013 में 60 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था.


तकनीक में भी अव्वल रहे भारतीय खिलाड़ी
बदलते समय के साथ भारत ताकत के साथ-साथ तकनीक में भी प्रभावी साबित हुआ है. एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली विनेश फोगाट ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहली बार मेडल हासिल किया और विरोधियों को यह संदेश भी दे दिया कि भारतीय रेसिंग बदलते समय के साथ और बेहतर हो रही है. विनेश के मुकाबले के बारे में बात करते हुए कमेंटेटर रोर्बट्स सैली ने टूर्नामेंट में विनेश के मुकाबले के दौरान कहा था, 'विनेश के एंगल और मूव लाजवाब हैं. वह ताकत के साथ-साथ अच्छा डिफेंस कर रही है जो जरूरी है. आमतौर पर ऐसा देखने को नहीं मिलता.' विनेश भारत की ओर से ओलिंपिक कोटा हासिल करने वाली पहली महिला रेसलर हैं. इस रेसलर ने यह साबित किया कि देश में रेसलिंग केवल बड़े पर्दे पर दंगल और सुल्तान जैसी फिल्मों तक सीमित नहीं है, अब ओलिंपिक मेडलिस्ट से लेकर वर्ल्ड नंबर खिलाड़ियों को मात देकर बल्कि पोडियम तक पहुंच चुकी है.

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विनेश फोगाट ने 53 किलो भारवर्ग में कांस्‍य पदक जीतकर 2020 ओलिंपिक का टिकट कटाया. (AP Photo)


दुनिया के लिए स्टार बन रहे हैं भारतीय रेसलर
भारत के वर्ल्ड चैंपियनशिप के अभियान ने दुनिया की नजर में भारतीय रेसलिंग के स्तर को बढ़ा दिया है. बजरंग पूनिया जैसे रेसलर अब दुनिया के लिए स्टार बन चुके हैं जिनका ऑटोग्राफ और तस्वीर लेने के लिए फैंस होटल और स्टेडियम के बाहर इंतजार करने लगे हैं. वहीं उम्मीदों से परे राहुल अवारे के मेडल ने यह जता दिया कि भारत में अभी कितनी प्रतिभा जिसका वर्ल्ड मैट पर उतरना बाकी है और जल्द ही रेसलिंग की दुनिया में भारत का बोलबाला होगा. टोक्यो ओलिंपिक में बेशक भारतीय रेसलर बड़ी चुनौती के साथ-साथ ओलिंपिक मेडल के बड़े दावेदार भी होंगे.

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First published: September 30, 2019, 7:37 PM IST
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