2011 में हादसे का शिकार हुईं, 50 दिन अस्पताल में बिताए, 8 साल बाद पीवी सिंधु से भी पहले जीता वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड

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Updated: August 27, 2019, 6:41 PM IST
2011 में हादसे का शिकार हुईं, 50 दिन अस्पताल में बिताए, 8 साल बाद पीवी सिंधु से भी पहले जीता वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड
मानसी जोशी ने नौ साल की उम्र से ही बैडमिंटन में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था. (फाइल फोटो)

राजकोट निवासी मानसी जोशी (Manasi Joshi) ने बासेल (Basel) में पीवी सिंधु (PV Sindhu) के गोल्ड (Gold Medal) जीतने से ठीक पहले हुई पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप (Para World Badminton Championship) में स्वर्ण पदक हासिल किया.

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वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप (World Badminton Championship) में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाली स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु (PV Sindhu) स्वदेश लौट चुकीं हैं. उन्होंने इस टूर्नामेंट में अपना पहला स्वर्ण और कुल पांचवां पदक हासिल किया. सिंधु ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो कांस्य और दो रजत पदक भी जीते हैं. मगर स्विट्जरलैंड के बासेल में देश का नाम रोशन करने वाली सिंधु अकेली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं थीं. बल्कि मानसी जोशी (Manasi Joshi) ने भी इस इस देश में हुई पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप (Para World Badminton Championship) में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा है.

मगर मानसी जोशी (Manasi Joshi) की कहानी पीवी सिंधु (PV Sindhu) की तरह सीधी और सरल नहीं है. हालांकि मानसी ने नौ साल की उम्र से ही इस खेल में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी थी. उनके पिता गिरीश जोशी भाभा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर में बतौर वैज्ञानिक काम किया करते थे. उनके दो बेटी और एक बेटा है. तीनों बच्चे अपने पिता को  आदर्श मानते हैं जो खुद भी एक टेनिस खिलाड़ी रह चुके हैं.

मूलरूप से राजकोट निवासी मानसी (Manasi Joshi) ने शुरुआती दिनों में स्कूल और डिस्ट्रिक्ट स्तर पर कई टूर्नामेंट में सफलता हासिल की. मगर 2011 में मानसी की जिंदगी में एक भयानक हादसा हुआ. दरअसल, मानसी टू-व्‍हीलर से कहीं जा रही थीं तभी पीछे से ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी. इस हादसे में उनका बायां पैरा काटना पड़ा. मानसी 50 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं. मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा खेलना शुरू कर दिया. मानसी ने तय किया कि वो अपने सपने को मरने नहीं देंगी. यही वजह रही कि उन्होंने हैदराबाद में पुलेला गोपीचंद की अकादमी में रजिस्ट्रेशन कराया. इसके बाद उन्होंने अपने सपनों को उड़ान देना शुरू कर दिया.

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मानसी ने 2015 में इंग्लैंड में हुई पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में मिक्‍स्ड डबल्स का रजत पदक हासिल किया. ये उनका पहला बड़ा पदक था. इस टूर्नामेंट में गोल्ड जीतने की तैयारी तभी से शुरू हो गई थी. हालांकि हादसे के आठ साल बाद 2019 में मानसी स्वर्णिम कामयाबी हासिल करने में सफल रहीं. 30 साल की इलेक्ट्रोनिक इंजीनियर मानसी ने पीवी सिंधु से कुछ ही घंटे पहले गोल्ड मेडल अपने नाम किया. मानसी ने SL3 महिला सिंगल्स वर्ग के फाइनल में हमवतन पारुल परमार को मात दी.

स्वर्ण पदक जीतने के बाद मानसी ने कहा कि मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी. मैं खुश हूं कि मेरी मेहनत का ऐसा फल मिला. यह वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेरा पहला स्वर्ण पदक है. मानसी की छोटी बहन ने नूपुर ने बताया कि अब मानसी का अगला लक्ष्य अगले साल होने वाले पैरालिंपिक खेल हैं. मानसी के पिता ने बताया कि 2017 में साउथ कोरिया के उल्सान में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी मानसी ने कांस्य पदक हासिल किया था.

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First published: August 27, 2019, 6:38 PM IST
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