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कार ड्राइवर का हुआ पूरा सपना, बेटा बना केरल का नया फुटबॉल सेंसेशन

जेसीन टीके (Jesin TK) ने कर्नाटक के खिलाफ अपनी टीम की 7-3 की जीत में पांच गोल दागे और इतिहास रच दिया.

जेसीन टीके (Jesin TK) ने कर्नाटक के खिलाफ अपनी टीम की 7-3 की जीत में पांच गोल दागे और इतिहास रच दिया.

जेसीन अब संतोष ट्रॉफी के इतिहास में एक विकल्प के रूप में पांच गोल करने वाले पहले खिलाड़ी हैं. वह टूर्नामेंट में एक खेल में सबसे अधिक गोल करने के केरल रिकॉर्ड के नए मालिक भी हैं, जो पहले आसिफ साहिर के पास था. साहिर ने 1999 के संस्करण में बिहार के खिलाफ चार रन बनाए थे.

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कोच्चि. मंजेरी के पायनाड स्‍टेडियम में गुरुवार को संतोष ट्रॉफी (Santosh Trophy) का पहला सेमीफाइल मैच खेला गया. यहां एक कार ड्राइवर का बेटा केरल का फुटबॉल सेंसेशन बन गया है. 22 वर्षीय जेसीन टीके (Jesin TK) ने कर्नाटक के खिलाफ अपनी टीम की 7-3 की जीत में पांच गोल दागे और इतिहास रच दिया. जेसीन के पिता मोहम्मद निज़ार एक कार ड्राइवर हैं. वह अपने बेटे को फुटबॉल खिलाड़ी के तौर पर देखना चाहते थे.

गुरुवार को जब केरल और कर्नाटक के बीच संतोष ट्रॉफी का सेमीफाइनल मैच खेला जा रहा था, तब मोहम्मद निज़ार ड्यूटी पर थे. वह स्टैंड से लाइव मैच देखना चाहते थे, लेकिन मलप्पुरम के नीलांबुर से ड्यूटी खत्म कर 30 किमी दूर पायनाड स्‍टेडियम आते-आते काफी देर हो चुकी थी.

JESIN

अपने परिवार के साथ जेसिन.

फिर भी मोहम्मद निज़ार किसी तरह स्टेडियम पहुंचे और स्टैंड से पहली बार अपने बेटे को देखा. उनके 22 वर्षीय बेटे जेसीन टीके ने केरल के लिए इतिहास रच दिया था और फुटबॉल की नई सनसनी बन गए थे.

जेसीन अब संतोष ट्रॉफी के इतिहास में एक विकल्प के रूप में पांच गोल करने वाले पहले खिलाड़ी हैं. वह टूर्नामेंट में एक खेल में सबसे अधिक गोल करने के केरल रिकॉर्ड के नए मालिक भी हैं, जो पहले आसिफ साहिर के पास था. साहिर ने 1999 के संस्करण में बिहार के खिलाफ चार रन बनाए थे.

मोहम्मद निज़ार खुद फुटबॉल खेलना और देखना पसंद है.आर्थिक तंगी के कारण वह खुद तो फुटबॉल खिलाड़ी नहीं बन पाए. फुटबॉल के प्रति दिवानगी में ही उन्होंने अपने बेटे को एक फुटबॉल खिलाड़ी बनाने का सपना देखा था. निज़ार का कहना है कि यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है. एक तरह से वह अपने अधूरे सपनों को अपने बेटे के जरिए साकार कर रहे हैं.

मोहम्मद निज़ार कहते हैं, “मैं एक फुटबॉलर बनना चाहता था, लेकिन मैं ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा था. घर की जिम्मेदारियां जो थीं. फिर भी मैं ट्रैक एंड फील्ड, बास्केटबॉल और कबड्डी जैसे विभिन्न खेलों में शामिल हो गया. अंत में कुछ भी नहीं बन पाया. मुझे ठीक से सलाह देने वाला कोई नहीं था. जेसीन एथलेटिक्स में भी अच्छा था और उसे दौड़ना पसंद था. मैंने अपने बेटे को एक ही सलाह दी कि एक समय में एक चीज पर ध्यान देना चाहिए. मुझे खुशी है कि वह फुटबॉल से जुड़ा हुआ है.”

कर्नाटक के खिलाफ 30वें मिनट में मेजबान टीम एक गोल से पीछे चल रही थी. चार मिनट के भीतर स्ट्राइकर ने थ्रू बॉल तक पहुंचने के लिए दौड़ते हुए गोलकीपर के ऊपर से गेंद उठाकर स्कोर को बराबर कर दिया.

इसके बाद उन्होंने 42वें और 44वें मिनट में 15 मिनट में हैट्रिक पूरी करने के लिए फिर से गोल किया, जिससे केरल को दूसरे हाफ में दो और गोल करने से पहले जीत के लिए आश्वस्त किया.

केरल युनाइटेड के लिए खेलने वाले जेसिन का कहना है कि उनकी पदोन्नति का श्रेय केरल के कोच बिनो जॉर्ज को दिया जाता है, जो क्लब का मार्गदर्शन भी करते हैं.साथ ही साथ मम्पड के एमईएस कॉलेज के कोच भी हैं, जहां वह स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए अरबी पढ़ रहे हैं.

जेसीन ने कहा, “मैं कभी भी किसी जिले की टीम का हिस्सा नहीं रहा. लेकिन मुझे आई-लीग 2 डिवीजन, केरल प्रीमियर लीग और अब संतोष ट्रॉफी खेलने का मौका मिला. एमईएस में मेरे कोचों, रफीक सर, मुरुगन सर और जॉर्ज सर की बदौलत ऐसा हो पाया है. साथ ही मेरी दादी ने भी मदद की. उन्होंने मुझे फुटबॉल खेलने के लिए जूते खरीदकर दिए थे.”

Tags: Football news, Indian Footballer

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