विवाद : कॉमनवेल्थ गेम्स 2010... जब हुआ 70 हजार करोड़ के घोटाले का 'खेल'

सुरेश कलमाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के मुख्य आरोपी

साल 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG 2010) के दौरान भारत का प्रदर्शन तो अच्छा रहा था लेकिन खेलों के आयोजकों ने देश के भरोसे को तार-तार कर दिया

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    नई दिल्ली. 38 स्वर्ण पदक, 27 रजत पदक, 36 कांस्य पदक, कुल 101 पदकों के साथ मेडल टेबल में दूसरा स्थान. पहली बार भारतीय खेल इतिहास में हमारे एथलीटों ने 100 से ज्यादा मेडल जीते. साल 2010 में भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स  (CWG 2010) में भारतीय एथलीटों ने देश का मान बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हालांकि इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 को किसी अच्छी वजह से याद नहीं किया जाता. जब-जब कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का नाम आता है, देश के करोड़ों लोगों का सिर शर्म से झुक जाता है. इसकी वजह थे वो आयोजक जिन्होंने खेल की आड़ में भ्रष्टाचार का ऐसा 'महाखेल' खेला जिसके बाद दुनियाभर में भारत गलत वजहों से सुर्खियों में आ गया. कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में इतने घोटाले हुए कि जिन्हें गिन पाना भी आसान नहीं है. आइए आपको बताते हैं भारतीय इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक CWG घोटाले  (CWG 2010 Scam) की कहानी.

    CWG महाघोटाला
    कॉमनवेल्थ घोटाला साल 2011 में सामने आया और इसे भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक कहा जाता है. माना जाता है कि दिल्ली में आयोजित हुए इन खेलों में बड़े पैमाने पर पैसों का घपला किया गया. अनुमान के मुताबिक कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में देश को 70 हजार करोड़ रुपये का चूना लगाया गया. इस पूरे घोटाले में जो सबसे बड़े आरोपी पूर्व कांग्रेस सासंद सुरेश कलमाड़ी थे जो आयोजन समिति के अध्यक्ष भी थे. कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 खत्म होने के 193 दिन बाद 25 अप्रैल 2011 को सुरेश कलमाड़ी (Suresh Kalmadi) को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया. कलमाड़ी पर पैसों की हेराफेरी का आरोप लगा. उनपर आरोप लगे कि उन्होंने कम पैसों की चीजें 100 से 200 गुना ज्यादा कीमत पर खरीदी. कलमाडी के खिलाफ दायर हुई चार्जशीट में उनपर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया. जानिए सुरेश कलमाडी की सरपरस्ती में क्या-क्या घोटाले किए गए.

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के घोटाले
    कॉमनवेल्थ गेम्स 2010  (CWG 2010 Scam) के लिए 4 स्टेडियम बनाए जाने थे जिसका बजट 1000 करोड़ रुपये तय किया गया था लेकिन इन्हें बनाने में दोगुने से भी ज्यादा 2400 करोड़ रुपये खर्च किये गए. 28 जुलाई 2010 को सेंट्रल विजिलेंस कमिशन की एक रिपोर्ट आई जिसके मुताबिक खेल आयोजकों ने बोगस कंपनियों को पैसा दिया. मतलब वो कंपनियां अस्तित्व में ही नहीं थी और इसके बावजूद उन्हें काम के पैसे दिये गए. यही नहीं खेलों का सामान भी कई गुना कीमतों पर खरीदा गया और उनके फर्जी बिल बनाए गए. कलमाडी की आयोजन समिति ने 80 रुपये का टॉयलेट पेपर 6400 रुपये में खरीदा. बाथरुम का शीशा 17600 रुपये में खरीदा गया जबकि उसकी असल कीमत उस वक्त 3486 रुपये थी. 300 रुपये का साबुन का डिस्पेंसर तकरीबन 10 हजार रुपये में खरीदा गया. एल्टीट्यूब ट्रेनिंग मशीन जिसकी कीमत 9 लाख रुपये होती है, उसे दो करोड़ की कीमत पर खरीदा गया.

    वेन्यू बनाने में भी भ्रष्टाचार
    कॉमनवेल्थ गेम्स 2010  (CWG 2010 Scam) के वेन्यू के निर्माण में भी घपलेबाजी की गई. आयोजन समिति से 5 अगस्त 2010 को संयुक्त निदेश टीएस दरबारी और एम जयचंद्रन की छुट्टी कर दी गई. इसके बाद आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष भी फंस गए और उन्हें भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. अनिल खन्ना पर आरोप था कि उन्होंने टेनिस कोर्ट बनाने के लिए अपने बेटे की कंपनी को ही कॉन्ट्रैक्ट दिया.

    टाइम स्कोरिंग रिजल्ट मशीन में घोटाला
    टाइम स्कोरिंग रिजल्ट मशीन घोटाले में खुद CWG आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी फंसे. कलमाड़ी पर आरोप था कि उन्होंने कंपनियों की अर्जी दाखिल करने से पहले ही एक स्विस कंपनी को मनमाने ढंग से कॉन्ट्रैक्ट दे दिया. टाइम स्कोरिंग रिजल्ट मशीन के लिए 4 नवंबर 2009 को टेंडर खोला गया जबकि स्विस कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट 12 अक्टूबर 2009 को ही दे दिया गया था. स्विस कंपनी को आयोजकों ने 157 करोड़ रुपये दिये जबकि MSL स्पेन ये काम 62 करोड़ रुपये में कर सकती थी. कलमाड़ी पर आरोप था कि उनके इस फैसले की वजह से 95 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस मामले में आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी 9 महीने तक तिहाड़ जेल में बंद रहे, हालांकि इसके बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत दे दी.

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