इस 'अनोखे' कबड्डी मैच पर हाईकोर्ट रखेगा नज़र, जानें वजह...

अदालत की निगरानी में दिल्‍ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शनिवार को कबड्डी मैच खेला जाएगा.

आईएएनएस
Updated: September 16, 2018, 7:48 AM IST
इस 'अनोखे' कबड्डी मैच पर हाईकोर्ट रखेगा नज़र, जानें वजह...
भारतीय कबड्डी टीम
आईएएनएस
Updated: September 16, 2018, 7:48 AM IST
भारतीय खेलों के इतिहास में पहली बार अदालत की निगरानी में दिल्‍ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शनिवार को कबड्डी मैच खेला जाएगा. यह मुकाबला उन पुरुष व महिला खिलाड़ियों के बीच में खेला जाएगा, जिन्होंने 18वें एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और जिन्हें इन खेलों के लिए टीम में नहीं चुना गया था. इन मैचों का आयोजन कराने का निर्णय दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले महीने किया था.

दरअसल, एशियाई खेलों के लिए भारतीय कबड्डी टीमों के रवाना होने से पहले पूर्व कबड्डी खिलाड़ी महीपाल सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और उन्होंने एमेच्योर कबड्डी महासंघ (एएफकेआई) पर घूस लेकर खिलाड़ियों के चयन का आरोप लगाया था. इसके बाद अदालत ने निर्णय लिया कि खेलों के समापन के बाद एक मैच का आयोजन किया जाएगा ताकि यह पता चल पाए कि खिलाड़ियों के चयन के मामले में महिपाल सिंह के आरोप सही हैं या नहीं.

मुख्य जस्टिस न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि एशियाई खेलों से लौटने के बाद खेलों के लिए गई भारतीय टीम (महिला एवं पुरुष) का मैच उन खिलाड़ियों से होगा जो राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना पाए थे.

अदालत ने दो अगस्त के अपने आदेश में कहा था '15 सितम्बर 2018 की सुबह 11 बजे चयन प्रक्रिया को आयोजित किया जाएगा.' पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस (सेवानिवृत्त) एस.पी गर्ग को खेल एवं युवा मंत्रालय के एक अधिकारी के साथ चयन का पर्यवेक्षक नियुक्त किया.

जस्टिस (सेवानिवृत्त) गर्ग शनिवार को स्टेडियम में मौजूद रहेंगे. याचिकाकर्ता महिपाल सिंह के वकील बी.एस नागर ने कहा, 'यह मुकाबला उन पुरुष और महिला खिलाड़ियों के बीच होगा जिन्होंने एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और जिन्हें टीम का हिस्सा नहीं बनाया गया था. टीम का हिस्सा नहीं बनाए गए खिलाड़ी वहीं होंगे जिन्होंने राष्ट्रीय शिविर में भाग लिया था. इसमें (आदेश में) यह नहीं कहा गया कि एशियाई खेलों की टीम का हिस्से रहने वाले खिलाड़ियों का मैच में भाग लेना अनिवार्य हैं, इसे खिलाड़ियों के विवेक पर छोड़ दिया गया है.'

नागर का मानना है कि खिलाड़ी इससे बचने की कोशिश कर सकते हैं. उन्होंने कहा, 'खिलाड़ियों ने 31 अगस्त को कहा था कि इस मुकाबले से उनकी प्रतिष्ठा पर फर्क पड़ेगा और यह कि वे चोटिल हैं और ऐसी ही तमाम बातें. वे मैच को टालने की कोशिश कर रहे हैं और यह कह रहे हैं कि इसमें उनकी गलती नहीं है. उन्हें (एशियाई खेलों की टीम को) डर है कि कहीं एक गुमनाम टीम उन्हें हरा ना दे.'

इस मैच की बकायदा रिकार्डिग की जाएगी जो अदालत में बतौर साक्ष्य पेश की जाएगी और इसी वीडियो फुटेज के आधार पर अदालत अपना फैसला लेगी.
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