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Tokyo Paralympics: डिस्कस थ्रोअर विनोद कुमार ने 'अयोग्य' पाए जाने के बाद गंवाया ब्रॉन्ज, जानिए वजह

Tokyo Paralympics: डिस्कस थ्रोअर विनोद कुमार ने 'अयोग्य' पाए जाने के बाद गंवाया ब्रॉन्ज, जानिए वजह

विनोद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक में चक्का फेंक में ब्रॉन्ज जीता था लेकिन अयोग्य पाए जाने के कारण उन्हें मेडल नहीं मिल सका. (Twitter/SAI_Media)

विनोद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक में चक्का फेंक में ब्रॉन्ज जीता था लेकिन अयोग्य पाए जाने के कारण उन्हें मेडल नहीं मिल सका. (Twitter/SAI_Media)

BSF जवान विनोद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) के चक्का फेंक (Discus Throw) इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था लेकिन वह इसका जश्न नहीं मना पाए. उन्हें पैरालंपिक खेलों के पैनल ने विकार के क्लासीफिकेशन निरीक्षण में ‘अयोग्य’ पाया. कुछ प्रतिस्पर्धियों ने नतीजे को चुनौती दी थी.

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    नई दिल्ली. भारत को सोमवार को बड़ा झटका लगा जब चक्का फेंक एथलीट विनोद कुमार (Discus Thrower Vinod Kumar) को टोक्यो पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) में ब्रॉन्ज मेडल देने से पहले ‘अयोग्य’ घोषित कर दिया गया. विनोद ने चक्का फेंक में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था लेकिन वह इसका जश्न नहीं मना पाए. उन्हें पैरालंपिक के पैनल द्वारा विकार के क्लासीफिकेशन निरीक्षण में ‘अयोग्य’ पाया गया. इसके कारण पुरुषों की एफ52 स्पर्धा का कांस्य पदक विनोद ने गंवा दिया.

    बीएसएफ के 42 साल के जवान विनोद कुमार ने रविवार को 19.91 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो से एशियाई रिकॉर्ड बनाते हुए पोलैंड के पियोट्र कोसेविज (20.02 मीटर) और क्रोएशिया के वेलिमीर सैंडोर (19.98 मीटर) के पीछे तीसरा स्थान हासिल किया था. हालांकि कुछ प्रतिस्पर्धियों ने इस नतीजे को चुनौती दी.

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    F-52 स्पर्धा में वे एथलीट हिस्सा लेते हैं जिनकी मांसपेशियों की क्षमता कमजोर होती है और उनके मूवमेंट सीमित होते हैं, हाथों में विकार होता है या पैर की लंबाई में अंतर होता है जिससे खिलाड़ी बैठकर प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेते हैं. आयोजकों ने एक बयान में कहा, ‘पैनल एनपीसी (राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति) भारत के एथलीट विनोद कुमार को ‘स्पोर्ट क्लास’ आवंटित नहीं कर पाया और खिलाड़ी को ‘क्लासिफिकेशन पूरा नहीं किया’ (सीएनसी) चिन्हित किया गया.’ इसके अनुसार, ‘एथलीट इसलिए पुरुषों की F-52 चक्का फेंक स्पर्धा के लिए अयोग्य है और स्पर्धा में उसका नतीजा अमान्य है.’

    विनोद कुमार के पिता 1971 भारत-पाक युद्ध में लड़े थे. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में जुड़ने के बाद ट्रेनिंग करते हुए वह लेह में एक चोटी से गिर गये थे जिससे उनके दोनों पैर चोटिल गये थे. इसके कारण वह करीब एक दशक तक बिस्तर पर रहे थे और इसी दौरान उनके माता-पिता दोनों का देहांत हो गया था. पैरा खिलाड़ियों को उनके विकार के आधार पर वर्गों में रखा जाता है. क्लासिफिकेशन प्रणाली में उन खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति मिलती है जिनका विकार एक सा होता है.

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    आयोजकों ने 22 अगस्त को विनोद का क्लासिफिकेशन किया था. भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की अध्यक्ष दीपा मलिक ने पीटीआईसे कहा कि अब पीसीआई कुछ नहीं कर सकता. उन्होंने कहा, ‘क्लासीफिकेशन को प्रतियोगिता के दौरान चुनौती दी जा सकती है और यह खारिज भी हो सकती है. भारत अब कुछ नहीं कर सकता.’

    Tags: Indian para athletes, Indian Paralympics, Sports news, Tokyo Paralympics, Tokyo Paralympics 2020

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