पूर्व कप्तान सरदार सिंह ने इंटरनेशनल हॉकी से लिया संन्यास

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सरदार सिंह ने हॉकी को अलविदा कहने का फैसला किया है. इसपर उनका कहना है कि वह पिछले 12 साल में काफी हॉकी खेल चुके हैं, अब युवाओं के आगे आने का समय आ गया है.

भाषा
Updated: September 12, 2018, 11:41 PM IST
पूर्व कप्तान सरदार सिंह ने इंटरनेशनल हॉकी से लिया संन्यास
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान सरदार सिंह, फाइल फोटो
भाषा
Updated: September 12, 2018, 11:41 PM IST
पूर्व भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह ने बुधवार को अपने चमकदार करियर को अलविदा कहने का फैसला किया है. संन्यास का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल में वह काफी हॉकी खेल चुके हैं और अब युवाओं के लिये जिम्मेदारी लेने का समय आ गया है.

सरदार सिंह ने कहा कि उन्होंने एशियाई खेलों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद यह फैसला लिया है, जिसमें भारत अपने खिताब का बचाव करने में असफल रहा और उसे कांस्य पदक के साथ संतोष करना पड़ा. सरदार की उम्र भी बढ़ रही है और अब उनके खेल में पहले जैसी फुर्ती देखने को नहीं मिलती, जिससे एशियाई खेलों के दौरान उनके प्रदर्शन की काफी आलोचना हुई.

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पूर्व कप्तान ने कहा, 'हां, मैंने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने का फैसला किया है. मैंने अपने करियर में काफी हॉकी खेली है. 12 साल का समय बहुत लंबा होता है. अब भविष्य की पीढ़ी का जिम्मेदारी संभालने का समय आ गया है. उन्होंने कहा, 'मैंने चंडीगढ़ में अपने परिवार, हॉकी इंडिया और अपने दोस्तों से सलाह मशविरा करने के बाद यह फैसला किया है. मुझे लगता है कि अब हॉकी से आगे के बारे में सोचने का सही समय आ गया है.' दिलचस्प बात है कि जकार्ता में एशियाई खेलों के दौरान सरदार ने कहा था कि उनके अंदर काफी हॉकी बची है और उन्होंने 2020 टोक्यो में अपना अंतिम ओलंपिक खेलने की इच्छा व्यक्त की थी.

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बता दें कि हॉकी इंडिया ने बुधवार को राष्ट्रीय शिविर के लिये 25 सदस्यीय मजबूत कोर ग्रुप की घोषणा की जिसमें उनका नाम शामिल नहीं था. जिससे अटकलें लगायी जा रही हैं कि उन्हें संन्यास लेने के लिए बाध्य किया गया है. शिविर की टीम से बाहर किये जाने के बारे में पूछने पर सरदार ने सवाल को टालते हुए कहा कि वह शुक्रवार को नयी दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपने संन्यास की आधिकारिक घोषणा करेंगे.

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वर्ष 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में सरदार सिंह सीनियर टीम में शामिल हुए थे. इसके बाद वह टीम की मध्यपंक्ति में अहम खिलाड़ी बने रहे. 32 वर्षीय इस खिलाड़ी ने देश के लिये 350 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और 2008 से लेकर 2016 तक आठ वर्षों तक राष्ट्रीय टीम की कप्तानी भी संभाली. इसके बाद टीम की कमान पी. आर श्रीजेश को सौंप दी गयी. वर्ष 2008 सुल्तान अजलन शाह कप में टीम की अगुवाई retiresके दौरान वह भारतीय टीम की कप्तानी करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी बने थे. उन्हें 2012 में अर्जुन पुरस्कार और 2015 में पद्म श्री से नवाजा गया. उन्होंने दो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व भी किया है.

गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों की टीम से बाहर किये जाने के बाद इस खिलाड़ी ने अपनी फिटनेस पर कड़ी मेहनत की और चैम्पियंस ट्राफी के लिये शानदार वापसी की. जिसमें भारतीय टीम ने रजत पदक जीता. उम्र के साथ वह थोड़े धीमे जरूर हुए लेकिन सरदार अब भी भारतीय टीम के सबसे फिट खिलाड़ियों में से एक हैं. फिटनेस संबंधित सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'इस फैसले के पीछे फिटनेस कारण नहीं है. मैं कुछ और साल तक हॉकी खेलने के लिये पूरी तरह से फिट हूं. लेकिन हर चीज का समय होता है और मुझे लगता है कि अब मेरे लिये जीवन में आगे बढ़ने का समय आ गया है.'

सरदार ने कहा कि उन्होंने अपना फैसला मुख्य कोच हरेंद्र सिंह को बता दिया है और उन्होंने यह भी कहा कि वह घरेलू सर्किट में हॉकी खेलना जारी रखेंगे. हरियाणा के सिरसा के इस खिलाड़ी का करियर विवादों से दूर नहीं रहा. उनपर भारतीय मूल की ब्रिटिश महिला ने बलात्कार का आरोप भी लगाया था, जिससे उन्होंने हमेशा इनकार किया था. उन्हें इस मामले में लुधियाना पुलिस के विशेष जांच दल द्वारा क्लीन चिट मिल गयी थी.
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