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19 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए, लगातार 11 साल बॉक्सिंग चैंपियन, जानिए सलमान खान के 'हवा सिंह' की जिंदगी का सच

19 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए, लगातार 11 साल बॉक्सिंग चैंपियन, जानिए सलमान खान के 'हवा सिंह' की जिंदगी का सच

हवा सिंह ने लगातार दो एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीते.

हवा सिंह ने लगातार दो एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीते.

सलमान खान (Salman Khan) ने हाल ही में सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) अभिनीत फिल्म हवा सिंह (Hawa Singh) का पोस्टर जारी किया है.

    नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्टर सलमान खान (Salman Khan) ने हाल ही में फिल्म हवा सिंह (Hawa Singh) का पोस्टर जारी किया. ये फिल्म भारत के महान मुक्केबाज हवा सिंह की जिंदगी पर आधारित है. सलमान खान निर्मित इस फिल्म में हवा सिंह का किरदार अभिनेता आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) निभा रहे हैं. शायद इस फिल्म का पोस्टर जारी होने से पहले अधिकतर लोगों ने हवा सिंह का नाम तक नहीं सुना होगा. कम ही लोग साधारण सा जीवन जीने वाले इस असाधारण शख्स की कहानी से वाकिफ होंगे. साल 1950 के आसपास का ये वो दौर ‌था जब बॉक्सिंग भारत में इतना अधिक लोकप्रिय खेल नहीं था. मगर तभी हवा सिंह आए.

    19 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए
    हवा सिंह (Hawa Singh) का जन्म आजादी से पहले 16 दिसंबर 1937 को उमर नामक गांव में हुआ था, जो अब हरियाणा में है. उन्होंने 1956 में महज 19 साल की उम्र में आर्मी जॉइन कर ली. आर्मी में बिताए अपने वक्त के दौरान ही उन्होंने बॉक्सिंग करियर की शुरुआत की. कड़ी मेहनत और लगन के बलबूते हवा सिंह को वेस्टर्न कमांड का चैंपियन बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा. साल 1960 में उन्होंने ये तमगा हासिल कर लिया था.

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    बॉक्सर हवा सिंह ने 19 साल की उम्र में आर्मी जॉइन कर ली थी. (फाइल फोटो)


    लगातार 11 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन रहे
    सेना में गत चैंपियन मोहब्बत सिंह को मात देकर हवा सिंह वेस्टर्न कमांड के चैंपियन बने थे. उसके बाद से तो हवा सिंह (Hawa Singh) साल 1961 से लेकर 1972 तक लगातार 11 साल तक राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियन रहे. यहां तक कि आज भी कोई बॉक्सर उनके इस असाधारण रिकॉर्ड के आसपास तक नहीं पहुंच सका है.

    एशियन गेम्स में मचाई धूम
    भारत-चीन सीमा विवाद के चलते इस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए योग्य दावेदार होने के बावजूद हवा सिंह (Hawa Singh) 1962 में जकार्ता एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके. इसके बाद उन्होंने 1966 और 1970 के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. ये दोनों एशियाई खेल थाइलैंड के बैंकाक में हुए थे.

    इस तरह तीसरे स्वर्ण से महरूम रह गए हवा सिंह
    एशियाई खेलों (Asian Games) में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद हवा सिंह 1974 के तेहरान एशियन गेम्स में उतरे. फाइनल में उन्होंने ईरान के अपने प्रतिद्वंद्वी बुरा को चित कर दिया. मगर रेफरी के विवादित फैसले के चलते उन्हें स्वर्ण पदक से महरूम कर दिया गया. इस तरह वो लगातार तीसरा स्वर्ण जीतकर भी जीत नहीं सके.




    1980 में ले लिया संन्यास
    बॉक्सिंग की दुनिया में एकछत्र राज करने के बाद हवा सिंह (Hawa Singh) ने साल 1980 में इस खेल को अलविदा कह दिया और भिवानी जाकर बस गए. यहां हवा सिंह बॉक्सिंग विंग के चीफ कोच बनाए गए. उनके बैच में दस स्टूडेंट्स थे, जिनमें राजकुमार सांगवान भी शामिल हैं.

    बॉक्सिंग को लेकर था सिंपल फंडा 
    एक कोच के रूप में जो लोग भी हवा सिंह (Hawa Singh) से मिले, उनसे वह अक्सर कहा करते थे कि बॉक्सिंग एक बेहद सरल खेल है. ये सिर्फ पंच लगाने और पंच से बचने के बारे में ही है. उनका ट्रेनिंग देने का तरीका भी काफी दिलचस्प था. वह अपने स्टूडेंट्स के हाथ उनके कंधे या कमर पर पीछे की ओर से रखवाकर दौड़ लगाने के लिए कहते थे. उनका कहना था कि इससे कंधे भी मजबूत होते हैं और पैर भी.

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    हवा सिंह का 62 साल की उम्र में निधन हो गया था. (फाइल फोटो)


    मोहम्मद अली का सामना करने का था सपना
    भारत के स्टार बॉक्सर हवा सिंह (Hawa Singh) ओलिंपिक में महान बॉक्सर मोहम्मद अली (Mohammed Ali) का सामना करना चाहते थे. मगर उनकी ये मुराद पूरी नहीं हो सकी. उन्हें 1966 में अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया, जबकि 1968 में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ द्वारा बेस्ट स्पोर्ट्समैन ट्रॉफी दी गई. वहीं साल 2000 में उन्हें भारत सरकार ने द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए चुना.

    अचानक छोड़ दी दुनिया
    14 अगस्त 2000 को अचानक हवा सिंह (Hawa Singh) का निधन हो गया. 62 वर्षीय ये मुक्केबाज तब भिवानी में ही था और 15 दिन बाद ही उन्हें द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजा जाना था. उनके निधन के बाद उनकी पत्नी अंगूरी देवी ने ये पुरस्कार ग्रहण किया.

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