लाइव टीवी

लॉकडाउन में भुखमरी से जूझ रही इस एथलीट को था मरने का डर, मदद के लिए आगे आई सरकार

News18Hindi
Updated: May 19, 2020, 5:23 PM IST
लॉकडाउन में भुखमरी से जूझ रही इस एथलीट को था मरने का डर, मदद के लिए आगे आई सरकार
लॉन्ग रनर हैं प्राजक्ता गोडबोले

नागपुर की झुग्गियों में रहने वाली एथलीट प्राजक्ता गोडबोले (Prajakta Godbole) के पास एक वक्त के खाने के लिए पैसे नहीं हैं

  • Share this:
नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण बेहद ही खराब वित्तीय स्थिति का सामना कर रही लंबी दूरी की भारतीय धावक प्राजक्ता गोडबोले (Prajkta Goodbole) को आखिर महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ पार्टी से मदद मिली.

प्राजक्ता (Prajkta Goodbole) की परेशानी की खबर पीटीआई-भाषा ने जारी की थी. चौबीस साल की प्राजक्ता नागपुर में सिरासपेठ झुग्गी में अपने माता-पिता के साथ रहती हैं.उनके पिता विलास गोडबोले पहले सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम करते थे, लेकिन वह एक दुर्घटना के बाद लकवाग्रस्त हो गये. प्राजक्ता की मां अरुणा रसोइये के तौर पर काम करके 5000 से 6000 रूपये महीना तक कमाती थीं जो उनके घर को चलाने का एकमात्र साधन था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से शादियां नहीं हो रहीं तो उन्हें दो जून का खाना जुटाने के लिये भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्राजक्ता को शिव सेना (Shivsena0 की ओर से मदद पहुंचायी गयी. महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में गठबंधन सरकार है.

मदद के लिए आगे आए उद्धव ठाकरे
शिवसेना नागपुर शहर के प्रमुख प्रकाश जाधव ने पीटीआई को बताया कि पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जब प्राजक्ता की स्थिति के बारे में पता चला तब उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों (सम्पूर्ण प्रांतों) के माध्यम से उन्हें मदद पहुंचाने का निर्देश दिया.



उन्होंने कहा, ‘कुछ दिन पहले, हमने एथलीट (प्राजक्ता) को राशन और 16,000 रुपये की छोटी राशि प्रदान की. हम उसके संपर्क में रहेंगे और हर संभव सहायता प्रदान करेंगे.’ प्राजक्ता ने 2019 में इटली में विश्व विश्वविद्यालय खेलों की 5000 मीटर रेस में भारतीय विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया था, जिसमें उन्होंने 18:23.92 का समय निकाला था लेकिन वह फाइनल दौर के लिये क्वालीफाई नहीं कर पायी थीं.



प्राजक्ता ने बताया था दुखा
प्राजक्ता (Prajakta Godbole) ने पीटीआई-भाषा से कहा था, 'हम पास के लोगों की मदद पर ही निर्भर हैं. वे हमें चावल, दाल और अन्य चीजें दे जाते हैं. इसलिये हमारे पास अगले दो-तीन दिन के लिये खाने को कुछ होता है लेकिन नहीं पता कि आगे क्या होगा. हमारे लिये यह लॉकडाउन काफी क्रूरता भरा साबित हो रहा है.' उन्होंने कहा था, 'मैं ट्रेनिंग के बारे में सोच भी नहीं रही हूं क्योंकि मैं नहीं जानती कि इन हालात में मैं कैसे जीवित रहूंगी. हमारे लिये जीवन बहुत कठिन है. इस लॉकडाउन ने हमें बर्बाद कर दिया है.'

लॉकडाउन के बीच पाकिस्तानी क्रिकेटर को मिली खुशखबरी, मैच फिक्सिंग के कारण 5 साल का लगा था बैन

इस बल्‍लेबाज की हैं 5 गर्लफ्रेंड्स, कहा-पत्‍नी के आसपास न होने पर...

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए अन्य खेल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: May 19, 2020, 5:23 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading