हिमा दास : 19 दिन में 5 गोल्ड... मगर ओलंपिक मेडल की बात अभी रहने ही दीजिए

यूनिवर्सिटी गेम्स में हिस्सा लेने वाले धावकों का मुख्य लक्ष्य इस साल दोहा में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप और अगले साल टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का है. इस लिहाज से हिमा दास (Hima Das) का टाइम क्वालीफाइंग स्टैंडर्ड से दूर है.

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Updated: July 23, 2019, 2:57 PM IST
हिमा दास : 19 दिन में 5 गोल्ड... मगर ओलंपिक मेडल की बात अभी रहने ही दीजिए
हिमा दास ने महज 19 दिनों के अंदर पांच स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है. (फाइल फोटो)
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Updated: July 23, 2019, 2:57 PM IST
इटली के नापोली, कजाखस्तान के अलमाटी, पोलैंड के पोजनैन और कुटनो, किर्गिस्तान के बिक्‍शेक और चेक गणराज्य के टाबोर में ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों ने जमकर पदक बटोरे. जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में भी भारत ने सात स्वर्ण सहित 19 पदक जीते थे, जबकि दोहा में हुई एशियन चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण सहित 17 पदक कब्जाए.

हिमा दास ने यूरोप में हुई 200 मीटर की स्पर्धाओं में लगातार चार स्वर्ण जीतकर कमाल कर दिया. इसके बाद तो उनसे ओलंपिक पदक की उम्मीदों के सपने देखे जाने लगे. मगर क्या वाकई ऐसा है. क्या भारतीय एथलेटिक्स इतनी ऊंचाई पर है. क्या हिमा अगले साल टोक्यो ओलंपिक में भारत को ट्रैक एंड फील्ड में पहला पदक दिलाकर इतिहास रचने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

जहां तक हिमा की बात है तो उन्होंने पोलैंड में 23.65 और 23.97 सेकेंड, जबकि चेक गणराज्य में 23.43 और 23.25 सेकेंड के समय के साथ चार रेस जीतीं. इन चार रेस में उनका जो सर्वश्रेष्ठ समय था, उसने उन्हें 2019 की वर्ल्ड रैंकिंग में 124वें स्‍थान पर ले जाकर खड़ा कर दिया. जी हां, दुनिया में 124वां स्‍थान. मगर ओलंपिक के मानदंड के लिहाज से हिमा का ये प्रदर्शन उन्हें शीर्ष दस में लाने से भी काफी दूर है.

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इस बात में कोई संदेह नहीं है कि ‌ओलंपिक पदक जीतने की सपना देखने के लिए हिमा को बेहद कड़ी मेहनत करनी होगी. (फाइल फोटो)


वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वालीफाइंग मार्क से भी दूर

बेशक दुती के स्वर्ण पदक खास हैं. मगर यह नहीं भूलना चाहिए कि यूनिवर्सिटी गेम्स में हिस्सा लेने वाले धावकों का मुख्य लक्ष्य इस साल दोहा में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप और अगले साल टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का है. इस लिहाज से दुती का टाइम क्वालीफाइंग स्टैंडर्ड से काफी दूर है. यहां तक कि वे दोहा वर्ल्ड चैंपियनिशप के क्वालीफाइंग मार्क तक भी नहीं पहुंच सकी है, जो 200 मीटर की रेस के लिए 23.02 सेकेंड है. वहीं, 400 मीटर के लिए क्वालीफाइंग मार्क 51.80 सेकेंड है.

ये है हिमा का प्रदर्शन
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हिमा दास ने 400 मीटर में जो गोल्ड जीता है, उस टाइमिंग (52.09) से बेहतर 2019 में 207 प्रदर्शन किए जा चुके हैं. मतलब हिमा की टाइमिंग 208th नंबर पर है. एथलीट्स के लिहाज से वो 75th नंबर पर हैं. यानी इस साल 74 एथलीट्स उनसे बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं. 200 मीटर में उन्होंने चार गोल्ड जीते हैं. जो बेस्ट टाइम है, उस लिहाज से वो 128th नंबर पर हैं. यानी 127 एथलीट इस साल उनसे बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं. अब अंदाजा लगा लीजिए कि अगले साल टोक्यो ओलिंपिक में इस‌ प्रदर्शन के साथ वो कहां रहेंगी और वहां पदक जीतने के लिए उन्हें और कितना बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत है.

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हिमा दास का हालिया प्रदर्शन भविष्य के लिए उम्मीद तो जताता है, लेकिन हमें ये भी देखना होगा कि अगर इस कामयाबी को ओलंपिक पदक के पड़ाव तक लेकर जाना है तो फिर उसके लिए अभी लंबा फासला तय करना होगा. (फाइल फोटो)


ओलंपिक की तो बात ही छोड़िए...

अब जरा रियो में 2016 में हुए ओलंपिक खेलों के प्रदर्शन पर नजर डालते हैं. 200 मीटर की महिलाओं की रेस के नतीजे देखकर शायद समझ आ जाएगा कि हिमा दास ओलंपिक पदक की रेस में फिलहाल कहां खड़ी हैं. रियो ओलंपिक में इस स्पर्धा का स्वर्ण जीतने वाली जमैका की इलेन थॉम्पसन ने 21.78 सेकेंड का समय निकाला था. रजत जीतने वाली नीदरलैंड की डैफनी शिपर्स का समय रहा था 21.88 सेकेंड और कांस्य पदक जीतकर तीसरा स्‍थान हासिल करने वाली धाविका थीं अमेरिका की टोरी बाउनी, जिनका समय रहा था 22.15 सेकेंड. चलिए ये तो शुरुआती तीन स्‍थानों पर रहने वाले धावक हुए.

आपको आखिरी आठवें स्‍थान पर रहने वालीं बुल्गारिया की इवेट लालोआ कोलिया के बारे में बताते हैं. दरअसल, इस रेस में आखिरी स्‍थान पर रहने वाली इवेट ने 22.69 सेकेंड का समय निकाला. यहां तक कि 2012 के लंदन ओलंपिक में आठवें स्‍थान पर रहने वाली धाविका का समय भी 22.87 सेकेंड था.

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First published: July 23, 2019, 12:48 PM IST
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