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Poster Boy: राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के ऐतिहासिक सिल्वर ने रखी है भारतीय निशानेबाजी की सुनहरी नींव

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भारतीय निशानेबाज रहे हैं

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भारतीय निशानेबाज रहे हैं

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने 2004 में हुए एथेंस ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीता था

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    नई दिल्ली. ओलिंपिक (Olympic) के इतिहास में भारत सबसे कामयाब देशों की श्रेणी में आज भी काफी पीछे  है. यही कारण है कि देश में जब भी कोई खिलाड़ी चार साल में एक बार होने वाले इन खेलों के महाकुंभ में पोडियम तक पहुंच जाता है तो देश में उसकी इज्जत भी उतनी ही बढ़ जाती है. हमारे देश में आज शायद काफी सुधार हुआ है लेकिन एक दशक पहले तक हालात ऐसे नहीं थे. देश में किसी भी खेल के भविष्य़ को लेकर खिलाड़ी खुद तब तक आश्वस्त नहीं होते थे जब तक कोई इसमें बड़ी उपलब्धी हासिल न करले. भारत ने टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympic) के लिए सबसे ज्यादा कोटा शूटिंग में हासिल किए हैं, हालांकि इस खेल में देश ओलिंपिक पोडियम पर निशाना लगा सकता है यह सिखाने वाले थे राज्यवर्धन सिंह राठौड़.

    एथेंस ओलिंपिक में राठौड़ ने रचा था इतिहास
    राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने निशानेबाजी में एथेंस ओलिंपिक 2004 (Athens Olympic 2004) में रजत पदक जीता था और साथ ही इतिहास रच दिया था.भारत ने इससे पहले व्यक्तिगत खेल में कभी सिल्वर मेडल नहीं जीता था. इससे पहले केडी जाधव, लिएंडर पेस और कर्णम मलेश्‍वरी ओलिंपिक में मेडल जीतने में कामयाब रहे थे लेकिन सबके नाम ब्रॉन्ज मेडल ही था. राठौड़ ने पदक का रंग बदलकर देश में निशानेबाजी की दशा बदल दी. उन्‍होंने पुरुषों के डबल ट्रैप इवेंट में रजत पदक जीता था.

    राठौड़ ने दी अभिनव-नारंग को प्रेरणा
    राठौड़ के मेडल जीतने के बाद देश में निशानेबाजी को लेकर काफी बदलाव आया. लोगों ने कम उम्र में बच्चों को ट्रेन करना शुरू किया. वहीं भारतीय निशानेबाजों को भी खुद पर आत्मविश्वास आया कि वह इतने बड़े स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं. 2004 में राठौड़ के अलावा इन खेलों में सानामाचा चानू, कुंजारानी, अभिनव बिंद्रा और सुमा शिरुर जैसे खिलाड़ियों ने अच्‍छा प्रदर्शन किया लेकिन ये सभी फाइनल में पदक से दूर रह गए थे. हालांकि अभिनव बिंद्रा ने इसके अगले ही ओलिंपिक में गोल्ड जीता था. गोल्ड मेडल जीतने वाले बिंद्रा ने कहा था 'राठौड़ ने मुझे बदल दिया. उनके सिल्वर मेडल ने मुझे गोल्ड मेडल जीतने का हौंसला दिया.' इसके बाद यह सिलसिला रुका नहीं और लंदन गेम्स में ब्रॉन्ज़ जीतने वाले गगन नारंग (Gagan Narang) ने भी राठौड़ को अपना आदर्श माना था. इसी के साथ विजय कुमार (Vijay Kumar) ने भी बिंद्रा से प्रेरणा लेते हुए लंदन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था.

    2008 के बीजिंग ओलंपिक में राज्य वर्धन सिंह राठौड़ शेरवानी में मार्चपास्ट में भारतीय दल के मुखिया बनकर तिरंगा लेकर चल रहे थे, तब उनके चेहरे पर आत्मविश्वास था और इसी आत्मविश्वास ने उन पर उम्मीदों का बोझ लाद दिया था. शायद इसी बोझ के तले वे इतने दब गए कि फाइनल तक भी नहीं जा सके, जबकि बीजिंग में अभिनव बिंद्रा ने सोने के पदक पर निशाना लगाकर पूरे भारत का दिल जीत लिया. हालांकि राठौड़ इससे निराश नहीं हुए क्योंकि वह जानते थे कि आने वाली पीढ़ी के लिए मंच तैयार कर चुके हैं.

    ओलिंपिक में निशाने बाजों से है काफी उम्मीदें
    राठौड़ का बोया बीज आज देश को फल दे रहा है. इस साल ओलिंपिक कोटा हासिल करने के मामले में भारत काफी आगे रहा है. देश के 15 निशानेबाज कोटा हासिल कर चुके हैं. इसमें महिला 10मीटर पिस्टल में मनु भाकर, यशस्विनी, 25 मी पिस्टल में चिंकी, राही, पुरुष 10 मी पिस्टल में सौरव, अभिषेक, पुरुष 10 मी राइफल में दिव्यांश, दीपक, महिला 10 मी राइफल में अपूर्वी, अंजुम, थ्री पोजीशन में संजीव, ऐश्वर्य, तेजस्विनी, स्कीट में मेहराज व अंगद ने कोटा हासिल किया है. इनके अलावा पिस्टल और राइफल के मिक्स्ड इवेंट में भारत की दो-दो टीमों को एंट्री मिलेगी. ऐसे में भारत के शूटर 19 मेडल के लिए ओलिंपिक में दावेदारी करेंगे.

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