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वीआईपी डिमांड करना रेसलिंग कोच को पड़ा भारी, फेडरेशन ने की छुट्टी

News18Hindi
Updated: October 3, 2019, 6:34 PM IST
वीआईपी डिमांड करना रेसलिंग कोच को पड़ा भारी, फेडरेशन ने की छुट्टी
WFI के साथ करीमी का अनुबंध टोक्यो ओलिंपिक तक था

करीमी (Hossein Karimi) पर यह आरोप लगाया गया है कि वह खिलाड़ियों से दूरी बनाकर रखते थे और वीआईपी डिमांड किया करते थे

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  • Last Updated: October 3, 2019, 6:34 PM IST
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भारतीय कुश्ती महासंघ (Indian Wrestling Federation) ने पुरुष फ्रीस्टाइल कोच हुसैन करीमी  (Hossein Karimi) को छह महीने में ही बर्खास्त करते हुए दावा किया किया कि ईरान (Iran) का यह कोच अपने साथ वीआईपी संस्कृति लेकर आया जिसका देश में पालन नहीं किया जा सकता. करीमी का अनुबंध टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympic) तक था. ईरान के इस कोच को उनकी बर्खास्तगी का नोटिस बुधवार को सौंपा गया.

वीआईपी कल्चर चाहते थे करीमी

डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर ने पीटीआई से कहा, ‘वह वीआईपी संस्कृति का पालन कर रहे थे और उनकी मांगों को मानना बेहद मुश्किल हो गया था. हमने भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) को इसकी जानकारी दे दी है. हम अब नया कोच ढूंढ रहे हैं.’

करीमी के साथ काम करते हुए डब्ल्यूएफआई को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था इस बारे में पूछने पर तोमर ने कहा कि वह कभी कोचों या पहलवानों के साथ रिश्ते नहीं बना पाए.

तोमर ने कहा, ‘उनकी हमेशा कोई ना कोई शिकायत या मांग होती थी. उन्होंने साइ परिसर में रहने से इनकार कर दिया जहां राष्ट्रीय शिविर चल रहा था इसलिए हमें साइ केंद्र के समीप उनके लिए फ्लैट किराए पर लेना पड़ा. वह जब भी भारत में यात्रा करते थे तो हमें उन्हें कार मुहैया करानी पड़ती थी.’

उन्होंने कहा, ‘वह हमेशा टूर्नामेंटों के दौरान अकेले रहने पर जोर देते थे जबकि अन्य कमरे साझा करते थे. नूर-सुल्तान में विश्व चैंपियनशिप के दौरान भी यूडब्ल्यूडब्ल्यू के निर्देशों के अनुसार दो लोगों को कमरा साझा करना था लेकिन वह अकेले रहे. उनकी सभी मांगों को स्वीकार करना मुश्किल था.’

खिलाड़ियों से बना रखी थी दूरीकरीमी को 3500 डालर के मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था लेकिन डब्ल्यूएफआई ने कहा कि उनकी अतिरिक्त मांगों के कारण खर्चे 5000 डॉलर पहुंच गया था. डब्ल्यूएफआई के लिए चिंता की एक अन्य बड़ी बात यह था कि करीमी का अपने शिष्यों तक के साथ कोई लगाव नहीं था.

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वर्ल्ड चैंपियनशिप करीमी की बतौर कोच आखिरी प्रतियागिता थी जिसमें भारत ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है


तोमर ने कहा, ‘टूर्नामेंट के दौरान वह मैट पर जाते थे लेकिन पहलवानों का पसीना साफ करने से इनकार कर दिया जो मुकाबले के दौरान प्रत्येक कोच करता है. यहां तक कि शिविर में ट्रेनिंग के दौरान इसी कारण से वह उदारण के साथ तकनीक नहीं समझाते थे क्योंकि उन्हें पसीने से तर-बतर पहलवानों को छूने में समस्या थी.’

दूसरी तरफ करीमी ने कहा कि भारत में खेल की प्रगति के लिए अच्छी व्यवस्था नहीं है. करीमी ने कहा, ‘उन्होंने मेरा अनुबंध रद्द कर दिया. भारत में व्यवस्था सही नहीं है. यहां काफी समस्या है.’डब्ल्यूएफआई ने विश्व चैंपियनशिप के दौरान उज्बेकिस्तान और रूस के कुछ कोचों से बात की और कुछ इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन करने को कहा. राष्ट्रीय शिविर एक नवंबर से शुरू होगा और डब्ल्यूएफआई के इससे पहले किसी को नियुक्त करने की उम्मीद है.
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First published: October 3, 2019, 6:34 PM IST
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