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Olympic Count down 158 Days: कर्णम मलेश्‍वरी, भारत की पहली महिला ओलिंपिक मेडलिस्‍ट

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Updated: February 17, 2020, 3:38 PM IST
Olympic Count down 158 Days: कर्णम मलेश्‍वरी, भारत की पहली महिला ओलिंपिक मेडलिस्‍ट
कर्णम मलेश्‍वरी

कर्णम मलेश्‍वरी ने 25 साल की उम्र में साल 2000 में हुए सिडनी ओलिंपिक में वेटलिफ्टिंग में 69 किलो भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था.

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  • Last Updated: February 17, 2020, 3:38 PM IST
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नई दिल्‍ली: कर्णम मलेश्‍वरी (Karnam Malleshwari). भारत की पहली ओलिंपिक मेडलिस्‍ट महिला. भारत की पहली और इकलौती ओलिंपिक मेडलिस्‍ट वेटलिफ्टर. आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव वुसावनीपेटा से ताल्‍लुक रखने वाली कर्णम मलेश्‍वरी (Karnam Malleshwari) ने 25 साल की उम्र में साल 2000 में हुए सिडनी ओलिंपिक में वेटलिफ्टिंग में 69 किलो भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था. उन्‍होंने फाइनल में कुल 240 किलो ( 110 किलो स्‍नैच और 130 किलो क्‍लीन एंड जर्क) उठाया था और अगर कोच के गणित में गड़बड़ी नहीं हुई होती तो संभव है कि भारत को पहला व्‍यक्तिगत गोल्‍ड मेडल साल 2000 में ही मिल जाता. कर्णम मलेश्‍वरी को सिडनी ओलिंपिक्‍स में गोल्‍ड न जीतने का मलाल अब भी रहता है.

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 कर्णम मलेश्‍वरी ने 69 किलो भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था  (सांकेतिक फोटो)


कर्णम मलेश्‍वरी 5 बहनों में से एक थी और सभी वेटलिफ्टिंग में थी. 12 साल की उम्र में उन्‍होंने कोच नीलमशेट्टी अप्‍पन्‍ना की देखरेख में प्रैक्टिस कर दी थी. बाद में दिल्‍ली में स्‍पोर्टस अथॉरिटी ऑफ इंडिया में जाने के बाद तो कर्णम ने मुड़कर नहीं देखा. सिडनी ओलिंपिक में जाने से पहले वह दो बार वर्ल्‍ड चैंपियन बन चुकी थीं और उन्‍हें राजीव गांधी खेल रत्‍न मिल चुका था. ओलिंपिक में मेडल जीतने से पहले वह 29 अंतरराष्‍ट्रीय मेडल जीत चुकी थीं और इनमें से 11 गोल्‍ड थे.

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कर्णम मलेश्‍वरी पहली भारतीय ओलिंपिक मेडलिस्‍ट महिला है.




फाइनल में कर्णम मलेश्‍वरी ने स्‍नैच वर्ग में 110 किलो वजन उठाया. क्‍लीन एंड जर्क में उन्‍होंने 125 किलो वजन से शुरुआत की और फिर 130 किलो वजन उठाया. यह अपने आप में ही बड़ी उपलब्धि थी. लेकिन कर्णम मलेश्‍वरी रूकना नहीं चाहती थीं. कोच से इस दौरान गणना में कुछ गड़बड़ी हो गई और उन्‍होंने 137.5 किलो वजन उठाना चाहा लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी. इस वजह से उन्‍हें कांस्‍य पदक से ही संतोष करना पड़ा. कर्णम मलेश्‍वरी अगर 132.5 किलो वजन उठातीं तो उन्‍हें गोल्‍ड मेडल मिल जाता.

इस बारे में कर्णम मलेश्‍वरी ने बहुत बार कहा है, 'यह मेरे पूरे जीवन का प्रयास था. इसलिए कुछ दुख है कि मैं गोल्‍ड नहीं जीत सकी. कांस्‍य अच्‍छा है लेकिन सोना तो सोना ही होता है. मेरी तुलना भी अभिनव बिंद्रा की तरह होती.'

जिस समय कर्णम मलेश्‍वरी वजन उठाकर इतिहास रच रहे थीं उस समय उन्‍हें कवर करने के लिए बहुत कम पत्रकार मौजूद थे. टूर्नामेंट कवर करने गए 42 में से केवल 4 पत्रकार ही कर्णम मलेश्‍वरी के इवेंट में गए थे. इस बारे में कर्णम ने बताया, 'बहुत कम लोग थे. क्‍लीन एंड जर्क पूरा किया तो लोगों को लगा कि भारत पदक जीत रहा है तब लोग आए थे.'

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First published: February 17, 2020, 3:38 PM IST
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