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कभी खुद के पास नहीं होता था दो वक्त का खाना, आज गरीबों के लिए मसीहा बन गई यह भारतीय खिलाड़ी

नई दिल्ली. स्टार फर्राटा धाविका दुती चंद ने बुधवार को कहा कि वह अपनी लग्जरी कार अपनी ट्रेनिंग के लिए पैसा जुटाने के इरादे से नहीं बल्कि इसलिए बेच रही हैं क्योंकि इसके रखरखाव का खर्चा काफी अधिक है. इस तरह से इस धाविका ने कार को बेचने को लेकर हुए विवाद को खत्म करने की कोशिश की. कुछ दिन पहले दुती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी कि वह रखरखाव के अधिक खर्चे के कारण अपनी बीएमडब्ल्यू कार बेचना चाहती हैं. इस पोस्ट को बाद में डिलीट कर दिया गया लेकिन खेल समुदाय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी. पूर्व डेविस कप खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने दुती का समर्थन किया जबकि अन्य ने कहा कि उन्हें केंद्रीय खेल मंत्रालय, ओडिशा सरकार और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) से समर्थन मिल रहा है.

नई दिल्ली. स्टार फर्राटा धाविका दुती चंद ने बुधवार को कहा कि वह अपनी लग्जरी कार अपनी ट्रेनिंग के लिए पैसा जुटाने के इरादे से नहीं बल्कि इसलिए बेच रही हैं क्योंकि इसके रखरखाव का खर्चा काफी अधिक है. इस तरह से इस धाविका ने कार को बेचने को लेकर हुए विवाद को खत्म करने की कोशिश की. कुछ दिन पहले दुती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी कि वह रखरखाव के अधिक खर्चे के कारण अपनी बीएमडब्ल्यू कार बेचना चाहती हैं. इस पोस्ट को बाद में डिलीट कर दिया गया लेकिन खेल समुदाय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी. पूर्व डेविस कप खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने दुती का समर्थन किया जबकि अन्य ने कहा कि उन्हें केंद्रीय खेल मंत्रालय, ओडिशा सरकार और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) से समर्थन मिल रहा है.

भारत (India) की दिग्गज एथलीट में शामिल दुती चंद (Dutee Chand) ओड़िशा की रहने वाली है

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान देते हुए भारतीय फर्राटा धाविका दुती चंद (Dutee Chand) ने भुवनेश्वर से लगभग 70 किलोमीटर दूर अपने पैतृक गांव के लोगों को खाने का पैकेट बांटे. दुती (Dutee Chand) इस काम के लिए अधिकारियों से विशेष पास लेकर ओडिशा के जाजपुर जिले में अपने गांव चाका गोपालपुर गयी.

    गांव वालों की मदद के लिए पहुंची दुती
    दुती ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘इस लॉकडाउन से मेरे गांव के लोगों को बहुत तकलीफ में है. मैं बस उनकी मदद करना चाहती थी. इसलिए, मैंने विशेष पास लिया और शुक्रवार को अपने गांव पहुंचकर लगभग 1000 लोगों को भोजन के पैकेट वितरित किए.’ उन्होंने कहा, 'मैंने और मेरे परिवार ने गांव वालों को मेरी यात्रा के बारे में पहले ही बता दिया था. लोग मेरे घर आए और मैंने उन्हें खाने का पैकेट दिया.’

    चौबीस साल की दुती फिलहाल भुवनेश्वर की एक संस्था से ‘बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन’ की पढाई कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मैं फिर से वहां जाने की योजना बना रही हूं और गांव के लोगों को खाने के और पैकेट बाटूंगी. गांव में लगभग 5000 लोग है और अगली बार मैं वहां 2000 खाने के पैकेट लेकर जाऊंगी.’

    उन्होंने कहा कि इस काम में केआईआईटी के संस्थापक और सांसद अच्युता सामंत ने मदद की. उन्होंने कहा, ‘मैंने केआईआईटी के संस्थापक से मदद के लिए संपर्क किया. मैंने अपने जेब से 50,000 रुपये खर्च किये और बाकी उनके मदद से संभव हुआ.’

    लोगों की मदद करके खुश हैं दुती
    दुती (Dutee Cha ने अभी ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं किया है और विश्व एथलेटिक्स ने इस साल के अंत तक क्वालिफिकेशन प्रक्रिया को रोक दिया है. उन्होंने कहा, ‘अगर मैंने क्वालुफाई कर लिया होता तो स्वाभाविक है कि यह मेरे लिए अच्छा होता . यह आसान नहीं है. लेकिन जब मैं उन मुस्कुराते हुए चेहरों को देखता हूं तो मुझे खुशी होती है. गांव के बड़े बुजुर्गों ने मुझे ओलंपिक में पदक लाने के लिए आशीर्वाद दिया.’

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