सम्मान नहीं मिलने पर इस भारतीय टीम के कोच ने छोड़ा देश

जीवनजोत सिंह (Jiwanjot singh) की अगुआई में 2014 में भारत के तीरंदाजों ने इतिहास रचा था. 2018 एशियन गेम्स में भी भारत को सिल्वर मेडल मिले थे

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Updated: August 14, 2019, 4:56 PM IST
सम्मान नहीं मिलने पर इस भारतीय टीम के कोच ने छोड़ा देश
पिछले साल एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय आर्चरी टीम कोच जीवनजोत के साथ वापस आने पर पीएम नरेन्द्र मोदी से भी मिलने पहुंची थी. (फाइल फोटो)
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Updated: August 14, 2019, 4:56 PM IST
खेल मंत्रालय  की ओर से द्रोणाचार्य अवॉर्ड (Dronacharya award) अवॉर्ड छिनने से नाराज भारतीय तीरंदाजी टीम में मुख्य कोच रह चुके जीवनजोत सिंह (Jiwanjot singh) ने निराश होकर आखिरकार देश छोड़ ही दिया है. वो पिछले कई महीनों से कनाडा में हैं और वहीं पर तींरदाजों काे तैयार कर रहे हैं.

जीवनजोत (Jiwanjot singh) 2014 और 2018 एशियन गेम्स में भारतीय टीम के कोच थे और उनकी अगुआई में 2014 एशियाड में पुरुष कंपाउंड टीम ने गोल्ड जीता, जबकि 2018 में महिला और पुरुष दोनों टीम ने सिल्वर मेडल जीता था. विश्व चैंपियनशिप में भी उनकी अगुआई में ही टीम ने भारत  की झोली में मेडल डाले थे. जीवनजोत ने इस शानदार परिणाम के दम पर पिछले साल द्रोणचार्य अवार्ड (Dronacharya award) के लिए आवेदन किया ‌था.

मंत्रालय के उन्हें इस अवार्ड के लिए चुन भी लिया था, लेकिन कुछ  दिन बाद ही मंत्रालय में उनका नाम काट दिया. जिससे वह काफी निराश भी हुए थे. इससे दुखी होकर उन्होंने पिछले साल ही भारतीय टीम के काेच पद से भी इस्‍तीफा दे दिया था.  अवार्ड छिनने के बाद वह अदालत की शरण में भी पहुंचे थे.

कनाडा में दे रहे हैं ट्रेनिंग

जीवनजोत कनाडा के ब्रेंप्टन चल गए हैं.


जीवनजोत (Jiwanjot singh) देश छोड़कर कनाडा के ब्रेंप्टन चले गए हैं. वहां उनके पास ट्रेनिंग के लिए बच्‍चे भी आने लगे हैं, जिन पर वह पूरी मेहनत कर रहे हैं. जुलाई में उन्होंने  वहां सिख हैरिटेज सेंटर में सात दिनों  का कैंप भी लगाया ‌था.

कहीं गलती की सजा तो नहीं 
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उनसे द्रोणाचार्य अवार्ड (Dronacharya award)  छिनने के पीछे माना जाता है कि कुछ साल पहले हुई उनसे एक गलती. दरअसल कुछ साल पहले वर्ल्ड यूनिवर्सियाड के ब्रॉन्ज मेडल मैच में भारतीय टीम नहीं पहुंच पाई थी और पूरी जिम्मेदारी जीवनजोत पर आ गई. हालांकि उस गलती की सजा तीरंदाजी संघ और एआईयू ने उन्हें दे दी थी.

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First published: August 14, 2019, 4:37 PM IST
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