Tokyo Olympics: स्प्रिंटर दुती चंद बोलीं- अच्छा नहीं खेलने पर तो लोग विराट कोहली को भी नहीं छोड़ते

भारतीय महिला स्प्रिंटर दुती चंद का नाम हाल ही में राजीव गांधी खेल रत्न के लिए भेजा गया है. ओडिशा सरकार ने उनके नाम की सिफारिश की है. (Dutee chand Twitter)

विश्व रैंकिंग कोटा के जरिये टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में जगह बनाने वाली स्प्रिंटर दुती चंद (Dutee Chand) का लक्ष्य 11. 10 सेकंड की टाइमिंग निकालना है. उन्होंने कहा कि अगर मैं इतना समय निकालने में सफल रही, तो सेमीफाइनल में जगह बना सकती हूं.

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    नई दिल्ली. विश्व रैंकिंग कोटा के जरिये टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में जगह बनाने वाली स्प्रिंटर दुती चंद (Dutee Chand) का लक्ष्य 11. 10 सेकंड की टाइमिंग निकालना है. उन्होंने कहा कि अगर मैं इतना समय निकालने में सफल रही तो सेमीफाइनल में जगह बना सकती हूं. सीधे क्वालीफाई करने में नाकाम रहने के बाद दुती ने विश्व रैंकिंग कोटा के जरिये टोक्यो का टिकट कटाया है.

    ओडिशा की इस एथलीट ने न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि मैंने एशियाई स्तर पर पदक जीता है. लेकिन ओलंपिक में दुनिया भर के शीर्ष खिलाड़ी आते हैं. अमेरिका या जर्मनी के धावकों का टाइमिंग तो 10 सेकंड के आसपास तक चला जाता है. इसलिए मैने 11.10 सेकेंड का लक्ष्य रखा है. ताकि सेमीफाइनल में जगह पक्की कर पाऊं.

    दुती ने विश्व रैंकिंग कोटा से ओलंपिक में जगह बनाई
    एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता दुती राष्ट्रीय अंतर राज्य सीनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 100 मीटर फाइनल में चौथे स्थान पर रही थी, जो उनकी ओलंपिक से पहले आखिरी रेस थी. इससे पहले उन्होंने इंडियन ग्रां प्री 4 में महिलाओं की 100 मीटर दौड़ में 11. 17 सेकंड का समय निकालकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था. वह ओलंपिक के लिये सीधे क्वालीफाई करने से 0. 02 सेकंड से चूक गईं थीं .सौ मीटर चार्ट में 44वीं और 200 मीटर में 51वीं रैंकिंग होने से उन्होंने क्वालीफाई कर लियाा था.

    'अपेक्षाओं का दबाव नहीं लेती'
    दुती को टोक्यो ओलंपिक के पदक दावेदारों में गिना जा रहा है. वो अपेक्षाओं के दबाव से वाकिफ हैं. लेकिन उसे अपने खेल पर हावी नहीं होने देती हैं. इसके साथ ही निजी जिदंगी की परेशानियों को भी वह ट्रैक पर लेकर नहीं आती. उन्होंने कहा कि अपेक्षाओं का दबाव पहले रहता था. अब इतना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं कि दबाव नहीं लगता. लगातार चार साल से पदक जीत रही हूं और इसी से लोगों की उम्मीदें बंधी है. खेल में प्रदर्शन बोलता है और अच्छा नहीं खेलने पर तो लोग विराट कोहली को भी नहीं छोड़ते.

    'परेशानियों का असर खेल पर नहीं पड़ने देती'
    अपने समलैंगिक रिश्ते के कारण अक्सर आलोचना झेलने वाली दुती ने कहा कि निजी जिंदगी की परेशानियों का असर मैं खेल पर नहीं पड़ने देती हूं. ट्रैक पर दिमाग सिर्फ खेल पर रहता है. दूसरे क्या कहते हैं, उससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जब अपने रिश्तेदार या दोस्त बोलते हैं, तो दुख होता है हालांकि खेल में सब भूल जाती हूं.

    ओडिशा सरकार ने इस साल देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेलरत्न के लिये उनका नाम भेजा है. इस बारे में उन्होंने कहा कि मुझे खेलरत्न तो पहले ही मिल जाना चाहिए था. दो बार एशियाई खेलों में, चार बार एशियाई चैम्पियनशिप में पदक जीता है. यूनिवर्सिटी खेलों में स्वर्ण और एशियाई जूनियर चैम्पियनशिप में दो बार स्वर्ण जीता है. लेकिन मैं शुक्रगुजार हूं ओडिशा सरकार की, जिसने अर्जुन पुरस्कार के बाद खेलरत्न के लिये भी मेरा नाम भेजा है.

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