राहुल गांधी को बॉक्सिंग के गुर सिखाने वाले कोच का निधन, मुक्केबाजी में पहला द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिला था

ओपी भारद्वाज बॉक्सिंग में द्रोणाचार्य अवॉर्ड हासिल करने वाले पहले कोच थे. 10 दिन पहले ही उनकी पत्नी का भी निधन हुआ था. (file photo)

ओपी भारद्वाज बॉक्सिंग में द्रोणाचार्य अवॉर्ड हासिल करने वाले पहले कोच थे. 10 दिन पहले ही उनकी पत्नी का भी निधन हुआ था. (file photo)

द्रोणाचार्य पुरस्कार हासिल करने वाले भारत के पहले बॉक्सिंग कोच ओपी भारद्वाज (OP Bhardwaj Dies) का शुक्रवार को 82 साल की उम्न में निधन हो गया. उन्होंने 2008 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को भी कुछ महीनों तक बॉक्सिंग के गुर सिखाए थे, उनकी कोचिंग में भारतीय मुक्केबाजों ने एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीते थे.

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नई दिल्ली. भारतीय बॉक्सिंग जगत के लिए बुरी खबर है. इस खेल में पहला द्रोणाचार्य अवॉर्ड हासिल करने वाले कोच ओपी भारद्वाज( OP Bhardwaj Dies) का लंबी बीमारी के कारण शुक्रवार को निधन हो गया. वो 82 साल के थे. उन्होंने 2008 में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को भी दो महीने तक मुक्केबाजी के गुर सिखाए थे. उनकी पत्नी संतोष की भी 10 दिन पहले ही बीमारी के कारण मौत हो गई थी.

पूर्व मुक्केबाजी कोच और भारद्वाज के पारिवारिक मित्र टीएल गुप्ता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा से कहा कि स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों के कारण ओपी भारद्वाज पिछले दिनों से काफी बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे. पत्नी के निधन से भी उन्हें आघात पहुंचा था.

ओपी भारद्वाज को 1985 में द्रोणाचार्य पुरस्कार मिला था

भारद्वाज को 1985 में बालचंद्र भास्कर भागवत (कुश्ती) और ओएम नांबियार (एथलेटिक्स) के साथ कोचिंग के सबसे बड़े द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. ये पुरस्कार इसी साल ही शुरू हुए थे. भारद्वाज 1968 से 1989 तक भारतीय राष्ट्रीय मुक्केबाजी टीम के कोच थे. वह राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे. उनके कोच रहते हुए भारतीय मुक्केबाजों ने एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और दक्षिण एशियाई खेलों में पदक जीते.
जीएस संधू ने भी ओपी भारद्वाज के निधन पर दुख जताया

भारद्वाज पाटियाला के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (NIS) में पहले चीफ इंस्ट्रक्टर थे. बॉक्सिंग के पूर्व नेशनल कोच जीएस संधू ने भी ओपी भारद्वाज के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि मैं एनआईसी पटियाला में उनके शुरुआती छात्रों में से एक था. मेरी भारद्वाज जी से बड़ी गहरी दोस्ती थी. मैं छात्र रहने के साथ ही उनके साथ काम भी कर चुका था. उन्होंने देश में बॉक्सिंग की नींव रखी थी. वो हमेशा खिलाड़ियों की मदद के लिए तैयार रहते थे. वो ट्रेनिंग के दौरान खड़े होकर सिर्फ निर्देश नहीं देते थे, बल्कि मुक्केबाजों के साथ खुद दौड़ते थे. ये ऐसा गुण था, जिसे मैंने उनसे सीखा था.

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