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टोक्यो ओलंपिक को यादगार बनाना चाहेंगी इतिहास रच चुकी भारतीय तलवारबाज भवानी

टोक्यो ओलंपिक को यादगार बनाना चाहेंगी इतिहास रच चुकी भारतीय तलवारबाज भवानी

चेन्नई की 27 साल की सेबर तलवारबाज भवानी देवी (Bhavani devi/Instagram)

चेन्नई की 27 साल की सेबर तलवारबाज भवानी देवी (Bhavani devi/Instagram)

Tokyo Olympics: भवानी देश की पहली (महिला या पुरुष) तलवारबाज हैं, जो ओलंपिक में शिरकत करेंगी. भारत में तलवारबाजी युद्ध कौशल के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन खेल के रूप में यह इतना लोकप्रिय नहीं है.

    नई दिल्ली. यूं तो तलवारबाजी भारतीय रणबांकुरों की शौर्यगाथाओं का हिस्सा रही है, लेकिन खेल के रूप में इसे पहचान दिलाई टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज सीए भवानी देवी ने. शौर्य और सफलता की नयी कहानी लिख चुकी यह वीरांगना अब अब टोक्यो में शानदार प्रदर्शन करके भारतीय ओलंपिक के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना लिखना चाहेंगी. भारत का ओलंपिक खेलों की स्पर्धाओं में भागीदारी का दायरा धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है और इसी कड़ी में नया नाम जुड़ा चेन्नई की 27 साल की सेबर तलवारबाज भवानी देवी का.

    भवानी देश की पहली (महिला या पुरुष) तलवारबाज हैं, जो ओलंपिक में शिरकत करेंगी. भारत में तलवारबाजी युद्ध कौशल के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन खेल के रूप में यह इतना लोकप्रिय नहीं है. विश्व रैंकिंग में इस समय 42वें स्थान पर काबिज भवानी ने बुडापेस्ट में सेबर तलवारबाजी विश्व कप की टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया के क्वॉर्टरफाइनल में हंगरी को हराने से ओलंपिक में जगह बनाई. दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों को टीम रैंकिंग के हिसाब से ओलंपिक में जगह मिल गई थी और एशिया के लिए सुरक्षित कोटे पर भवानी ने आधिकारिक रैंकिंग एशिया/ओसनिया जोन से क्वॉलिफाई किया.

    टोक्यो ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हैं भवानी देवी
    भवानी ने क्वॉलिफाई करने के बाद इटली से वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में कहा था, ''किसी ने मुझसे पूछा कि अब ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर लिया है तो क्वॉर्टरफाइनल तक पहुंचने के लिए कैसे योजना बना रही हो. मैंने कहा कि सिर्फ क्वॉर्टरफाइनल क्यों, फाइनल्स क्यों नहीं.'' आत्मविश्वास से भरी भवानी ने कहा था, ''मैं टोक्यो ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूं और मैं खुद को यह सोचने में सीमित नहीं करना चाहती कि वैश्विक स्पर्धा में मैं क्या हासिल कर सकती हूं और क्या नहीं. संभावनायें असीमित हैं.''

    राष्ट्रमंडल तलवारबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं भवानी
    राष्ट्रमंडल तलवारबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय भवानी ने 11 साल की उम्र में तलवारबाजी खेलना शुरू किया और वह भी इसलिए क्योंकि वह पढ़ाई से बचना चाहती थीं और इस खेल में आने का भी दिलचस्प वाकया है. उनकी कक्षा में सभी को अपनी पसंद के खेल चुनने थे लेकिन तब उनका नंबर आया तो इस खेल में किसी ने अपना नाम नहीं लिखवाया था. 2004 से हुई शुरूआत के बाद इस खेल से लगाव धीरे धीरे बढ़ता रहा.

    भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) कोच सागर लागू ने उनकी प्रतिभा को देखकर उन्हें केरल के थालासेरी में साइ सेंटर में ट्रेनिंग के लिए बुलाया और कुछ समय बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक हासिल करना शुरू कर दिया. भवानी ने पहला अंतरराष्ट्रीय पदक 2009 राष्ट्रमंडल चैम्पियनशिप में तीसरे स्थान पर रहकर हासिल किया.

    आठ बार की राष्ट्रीय चैम्पियन हैं भवानी देवी
    उन्होंने 2014 एशियाई चैम्पियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा का रजत पदक जीता जबकि अगले साल इसी चैम्पियनशिप के इसी स्पर्धा का कांस्य पदक अपने नाम किया था. मध्यम वर्ग परिवार से ताल्लुक रखने वाली आठ बार की राष्ट्रीय चैम्पियन भवानी ने इस खेल के खर्चे को देखते हुए एक बार इसे छोड़ने का भी मन बना लिया था क्योंकि इसके लिए पहने जाने वाला विशेष तरह का सूट ही काफी महंगा होता है और उनकी माँ को उनके लिए अपने गहने तक बेचने पड़ गए थे.

    इसी तरह की कई चुनौतियों का सामना करने वाली भवानी के सपनों की उड़ान यहीं तक सीमित नहीं है, वह ओलंपिक पदक हासिल करना चाहती हैं. इसलिए रियो 2016 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने से चूकने के बाद वह पिछले पांच वर्षों से कोच निकोला जानोटी के साथ इटली में ट्रेनिंग में जुटी हैं. भवानी 2017 में महिलाओं के विश्व कप में भारत की ओर से पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने वाली तलवारबाज बनीं. 2018 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में सीनियर राष्ट्रमंडल तलवारबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता. वह अब तक कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक जीत चुकी हैं.

    महिला तलवारबाजी 1924 में पेरिस ओलंपिक में शामिल की गई थी
    ओलंपिक में 1896 एथेंस ओलंपिक में ही तलवारबाजी को शामिल कर दिया गया था और तब से वह इन खेलों का हिस्सा बना हुआ है. महिला तलवारबाजी 1924 में पेरिस ओलंपिक में शामिल की गई थी. महिलाएं पहले फॉएल में भाग लेती थी लेकिन अटलांटा ओलंपिक 1996 से उन्होंने एपे और एथेन्स 2004 से सेबर में हिस्सा लेना शुरू किया था. ओलंपिक तलवारबाजी में यूरोपीय देशों का दबदबा रहा है. इटली ने इसमें अब तक 49 स्वर्ण पदक सहित 127 पदक जीते हैं. उसके बाद फ्रांस (45 स्वर्ण सहित 123 पदक) और हंगरी (37 स्वर्ण सहित 88 पदक) का नंबर आता है.

    तलवारबाजी खेल में दो प्रतियोगी हाथों में तलवार लेकर एक दूसरे के शरीर पर प्रहार करने की कोशिश करते हैं. शरीर के कुछ तय अंग होते हैं जिन पर प्रहार किया जा सकता है. इसके तीनों प्रारूपों के लिए अलग-अलग नियम होते हैं. ओलंपिक में पुरुष और महिला वर्ग में व्यक्तिगत फॉएल, व्यक्तिगत एपे, व्यक्तिगत सेबर तथा इन तीनों प्रारूपों की दोनों वर्गों में टीम स्पर्धाएं शामिल हैं.

    Tags: Bhavani Devi, Indian Fencer, Olympics, Olympics 2020, Tokyo 2020, Tokyo Olympics, Tokyo Olympics 2020

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