Role Model : अभिनव बिंद्रा ने भेदी 'मछली की आंख', 120 साल के भारतीय ओलिंपिक इतिहास का सबसे कामयाब एथलीट

Role Model : अभिनव बिंद्रा ने भेदी 'मछली की आंख', 120 साल के भारतीय ओलिंपिक इतिहास का सबसे कामयाब एथलीट
बीजिंग में जीता था बिंद्रा ने गोल्ड

भारत को ओलिंपिक में पहला व्‍यक्तिगत गोल्‍ड मेडल दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) का करियर इतिहास रचने से ठीक दो साल पहले खत्‍म होने की कगार पर पहुंच गया था

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2020, 8:01 PM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. शूटिंग...जिसमें वो खिलाड़ी ही महारथ हासिल कर सकता है, जो एकटक लक्ष्‍य को सही से देख सके. बिना पलक झपकाए आंखें सिर्फ लक्ष्‍य पर हो. 2008 से पहले माना जाता था कि इस खेल के लिए खिलाड़ी की आंखें बिल्‍कुल सही होनी चाहिए. मतलब खिलाड़ी बिना किसी मदद के दूर और पास की चीज को बेहतर तरीके से देख सके. मगर 2008 के बाद इस खेल को लेकर चल रही ऐसी कुछ मान्‍यता बदल गई.

अब कहा जाने लगा कि इस खेल के लिए खिलाड़ी में सबसे ज्‍यादा ध्‍यान लगाने की क्षमता होनी चाहिए. दरअसल वर्षों की इस मान्‍यता को बदला था अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने. चश्‍मा लगाकर लक्ष्‍य भेदने वाला एक ऐसा निशानेबाज, जिसने 2008 में ओलिंपिक में गोल्‍ड जीतकर हर किसी को गलत ठहरा दिया. 2008 बीजिंग ओलिंपिक में जैसे ही बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफल में फाइनल शॉट लगाया, पूरा देश झूम उठा.

120 साल के भारतीय ओलिंपिक इतिहास में भारत ने पहली बार व्‍यक्तिगत गोल्‍ड मेडल जीता था. 1980 के बाद पहली बार भारत को ओलिंपिक में गोल्‍ड मेडल मिला. 1980 में भारत ने पुरुष हॉकी का गोल्‍ड मेडल जीता था. बिंद्रा व्‍यक्तिगत ओलिंपिक गोल्‍ड मेडल जीतने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी हैं. उन्‍होंने अपने करियर में कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में नौ मेडल और एशियन गेम्‍स में तीन मेडल जीते हैं. 22 साल के करियर में बिंद्रा ने 150 मेडल जीते. 5 सितंबर 2016 को अभिनव बिंद्रा ने संन्‍यास ले लिया था.



जन्‍म से ही कमजोर थींं आंखें
28 सितंबर 1982 को देहरादून में जन्‍में अभिनव बिंद्रा  (Abhinav Bindra) ने बहुत जल्‍द ही राइफल को हाथ में थाम लिया था, मगर बहुत ही कम लोग जानते हैं कि उनकी आंखें जन्‍म से ही कमजोर थी. शुरुआत में उनकी आंखों का नंबर -2 का था और जब वो शूटिंग में आए, तब उनकी दोनों आंखों का नंबर -4 था. मगर इसके बावजूद उन्‍होंने अपनी आंखों की रोशनी को कमजोरी नहीं बनने दिया और उस चीज पर पकड़ बनानी शुरू की, जिससे खेल जीता जाता है. जिससे लक्ष्‍य को भेदा जाता है.

abhinav bindra , abhinav-bindra interesting facts, abhinav bindra life style, sports news, अभिवन बिंद्रा, स्‍पोर्ट्स न्‍यूज, अभिनव बिंद्रा करियर
म्‍यूनिख वर्ल्‍ड कप के बाद अभिनव बिंद्रा की जिंदगी बदल गई


15 साल की उम्र में कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स: बिंद्रा ने जब 1998 कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में हिस्‍सा लिया, तब उनकी उम्र सिर्फ 15 साल थी. उस समय वो सबसे युवा खिलाड़ी थे. वहीं 2000 समर ओलिंपिक में हिस्‍सा लेने वाले बिंद्रा सबसे युवा प्रतिभागी थे. 2000 ओलिंपिक में बिंद्रा क्‍वालिफिकेशन राउंड में 11वें स्‍थान पर रहे थे.

2001 के बाद बदली जिंदगी: बिंद्रा की जिंदगी 2001 के बाद बदली. 2001 म्‍यूनिख वर्ल्‍ड कप में उन्‍होंने नया जूनियर वर्ल्‍ड रिकॉर्ड बनाते हुए ब्रॉन्‍ज मेडल जीता. उन्‍होंने 600 में से 597 अंक हासिल किए थे. इसके बाद बिंद्रा का सफर शुरू हुआ.

करियर पर खतरा: बिंद्रा जिस समय अपने करियर में पीक पर थे, उसी समय एक चोट ने उनके करियर को खतरे में डाल दिया. बात 2006 की है, जब रीढ़ ही हड्डी की चोट उनके करियर के लिए खतरा बन गई. उनकी रीढ़ की हड्डी में खिंचाच आने लगा. इसके बाद रिहैब प्रोग्राम की मदद से उनका खिंचाव कम हुआ और बेहतर पोजीशन के लिए उन्‍होंने कुछ तकनीकी बदलाव किए.

नहीं करना चाहते शादी: बिंद्रा के फैंस आज भी उनसे एक ही सवाल पूछते हैं कि वो शादी कब करेंगे. बिंद्रा की मां उन्‍हें भारत का सबसे योग्‍य बैचलर मानती हैं. कुछ समय पहले एक इंटरव्‍यू में बिंद्रा ने कहा था कि वह कभी शादी नहीं करना चाहते. हालांकि 37 साल की उम्र में भी उनका क्रेज महिला फैंस के बीच कम नहीं हुआ है.

संन्‍यास के बाद: संन्‍यास के बाद अभिनव बिंद्रा  (Abhinav Bindra) ने बिजनेस की राह पकड़ ली. वें अभिनव फ्यूचरिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ भी हैं. इनका काम खेल और स्‍वास्‍थ्‍य सेवा में साइंस और टेक्‍नोलॉजी को लाना है. स्‍पोर्ट्स साइंस और एंडवांस पीएमआर सेंटर का एक ग्रुप एबीटीपी के जरिए 5 हजार से अधिक एथलीट्स और मरीज  की मदद की जाती है. अभिनव बिंद्रा का फाउंडेशन एथलीट्स को इस टेक्‍नोलॉजी और हाइ परफॉर्मेंस फिजिकल ट्रेनिंग का फ्री में लाभ देती है. पिछले साल बिंद्रा की कमाई करीब 40 करोड़ के आस- पास रही. वहीं इनके खाने की बात करें तो बिंद्रा को चिकन काफी पसंद है.

23 साल की उम्र में ओलिंपिक पदक, अब बना टेनिस का इतिहास पुरुष, दिल में बसा भारत
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading