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मां ने सब्जी बेचकर पाला-पोसा, बेटी फौज में शामिल हुई अब भारत को दिलाया मेडल

News18Hindi
Updated: October 13, 2019, 9:54 PM IST
मां ने सब्जी बेचकर पाला-पोसा, बेटी फौज में शामिल हुई अब भारत को दिलाया मेडल
जमुना बोरो पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग ले रही है

जामुना बोरो (Jamuna Boro) ने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप (World Boxing Championship) में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया

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  • Last Updated: October 13, 2019, 9:54 PM IST
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रूस. वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप (World Boxing Championship) में भारत (India) ने तीन ब्रॉन्ज और एक सिल्वर के साथ कुल चार मेडल हासिल किया. चैंपियनशिप में पहली बार हिस्सा ले रही असम की जमुना बोरो (Jamuna Boro) ने 54 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया.  जमुना बोरो को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा.

जमुना (Jamuna Boro) को फ्रांस (France) की वर्ल्ड नंबर वन सी क्रुवीलिर ने 5-0 से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया. हालांकि जमुना ने देश के लिए दूसरा ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. असम राइफल (Assam Rifles) में काम करने वाली जमुना ने गरीबी से लड़ते हुए बॉक्सिंग का अपना सपना पूरा किया है. साल 2017 इंडोनेशिया के लाबुआन में हुए प्रेसीडेंट्स कप में गोल्ड मेडल जीतकर वह पहली बार सुर्खियों में आईं थी.

मां ने सब्जी बेचकर किया बेटी का सपना पूरा

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जमुना बोरो की मां सब्जी बेचकर घर का खर्चा उठाती हैं


बोरो केवल 10 साल की थी जब उनके पिता का देहांत हुआ था. तब से उनकी मां ने तीन भाई-बहनों को सब्जी बेचकर पाला हैं. उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है वहीं उनका भाई पूजा -पाठ का काम करके खर्चा चलाता है.  जमुना और उनका परिवार बेलसिरि रेलवे स्टेशन के ठीक सामने रेलवे की ज़मीन पर अस्थाई तौर पर रहता था. जमुना कहती हैं, 'अकसर मैं अकादमी में लड़कों के साथ बॉक्सिंग ट्रेनिंग करती हूं और फ़ाइट के दौरान मेरा लक्ष्य सामने वाले को हराने का होता है. उस समय दिमाग में यह बात बिलकुल नहीं आती कि रिंग में मेरे सामने कोई लड़का फाइट कर रहा हैं.'

बोरो के गांव में कुछ बड़े लड़के वुशु खेला करते थे. पहले बोरो केवल खेल देखने के लिए जाती थी लेकिन बाद में उन्होंने सीखने का मन बनाया. साल 2009 में उगलगुरी में हुए स्टेट वुशु चैंपियनशिप के दौरान साई (Sports Authority of India) के कोच की नजर उनपर पड़ी और राज्य बॉक्सिंग कैंप के लिए उनका चयन हो गया. इसके बाद वह असम राइफल में शामिल हुई और बॉक्सिंग जारी रखी.

10 साल की उम्र में पिता को खोया, गरीबी से लड़ी, अब भारत को दिलाया मेड

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First published: October 13, 2019, 7:31 PM IST
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