भारत के लिए 20 मेडल जीतने वाली महिला खिलाड़ी पंजाब में कर रही है खेतों में काम

हरदीप कौर को पंजाब में खेतों में काम करना पड़ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AFP)

हरदीप कौर को पंजाब में खेतों में काम करना पड़ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AFP)

पंजाब के मनसा जिले की रहने वालीं कराटे चैंपियन हरदीप कौर (Hardeep Kaur) ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में अब तक 20 से ज्यादा पदक जीते हैं. वह अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने और अपने परिवार को संभालनेे के लिए खेतों में काम कर रही हैं. उनकी एक दिन की कमाई महज 300-350 रुपये है.

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नई दिल्ली. खिलाड़ियों की खराब स्थिति के बारे में अकसर खबरें मिलती हैं. ऐसी ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की कराटे खिलाड़ी हरदीप कौर (Hardeep Kaur) हैं जो आजकल बुरे दौर से गुजर रही हैं. वह धान के खेतों में काम कर रही हैं और उनकी एक दिन की कमाई महज 300 रुपये है. पंजाब के मनसा जिले के गुरनेकलां गांव की रहने वालीं 23 वर्षीय हरदीप ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में 20 से ज्यादा पदक जीते हैं.

हरदीप ने 'इंडिया टुडे' से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपनी इस तरह की हालत के बारे में कभी नहीं सोचा था. उन्होंने कहा, 'हम एक गरीब दलित परिवार से ताल्लुक रखते हैं. हमारे पास जमीन नहीं है और मजदूरों के रूप में काम करना पड़ता है. मैं धान के खेतों में काम करके 300 रुपये से 350 रुपये के बीच कमा लेती हूं. मुझे अपने परिवार का समर्थन करने के लिए खेतों में काम करना पड़ता है.' हरदीप कौर के पिता नायाब सिंह (55) और मां सुखविंदर कौर (45) भी खेत में काम करते हैं. हरदीप कौर फिलहाल पटियाला से फिजिकल एजुकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर रही हैं.

उन्होंने कहा, 'मैं पटियाला में डीपीईडी की पढ़ाई कर रही हूं. अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने और माता-पिता का समर्थन करने के लिए मैं घरेलू काम करती हूं. अभी धान के खेतों में मजदूरी कर रही हूं.'

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जब उन्होंने साल 2018 में मलेशिया में स्वर्ण पदक जीता, तो हरदीप को सरकारी नौकरी देने का वादा पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी ने किया था. हरदीप ने बताया कि खेल मंत्री ने उनसे मुलाकात की और सरकारी नौकरी की घोषणा की. उन्होंने कहा कि अभी तीन साल बीत चुके हैं और वादा अधूरा है.

हरदीप ने कहा, 'उन्होंने मुझे चंडीगढ़ में अपने कार्यालय में बुलाया और सरकारी नौकरी देने का वादा किया. मुझे एक आवेदन जमा करने के लिए भी कहा गया था, लेकिन उसके बाद मुझे किसी भी सरकारी कार्यालय की ओर से कभी नहीं बुलाया गया. इस नवोदित खिलाड़ी को अपनी नौकरी के लिए चार बार चंडीगढ़ भी जाना पड़ा लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली.

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