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Olympic Count down 167: भारत को पहला व्यक्तिगत मेडल दिलाने वाले केडी जाधव के पास नहीं थे हेलसिंकी जाने के पैसे

News18Hindi
Updated: February 8, 2020, 5:10 PM IST
Olympic Count down 167: भारत को पहला व्यक्तिगत मेडल दिलाने वाले केडी जाधव के पास नहीं थे हेलसिंकी जाने के पैसे
केडी जाधव ने साल 1952 में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था

केडी जाधव (KD Jadhav) ने पहली बार 1948 के लॉस एंजेलिस ओलिंपिक (1948 los angeles Olympic) में हिस्सा लिया था.

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  • Last Updated: February 8, 2020, 5:10 PM IST
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नई दिल्ली. 1952 में भारतीय फैंस को भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team) से गोल्ड मेडल की उम्मीद थी लेकिन इन ओलिंपिक (Olympic) में खेलों में भारत (India) को एक और मेडल अपने नाम किया. भारत (India) की ओर से केडी जाधव (KD Jadhav) ने रेसलिंग भारत (India) को पहला मेडल दिलाया. खाससभा दादासाहेब जाधव (KD Jadhav) ने मेंस फ्री स्टाइल रेसलिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. वह देश के लिए व्यक्तिगत मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी थे.

जाधव (KD Jadhav) ने पहली बार 1948 के लॉस एंजेलिस ओलिंपिक (1948 Los Anjeles Olympic) में हिस्सा लिया था. हालांकि उस बार जाधव (KD Jadhav)  छठे स्थान पर रहे थे लेकिन अपने प्रदर्शन से उन्होंने सबको हैरान कर दिया था.

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के डी जाधव ने दो बार ओलिंपिक में हिस्सा लिया


कौन थे पहला मेडल जीतने वाले केडी जाधव

केडी जाधव (KD Jadhav) का जन्म 1926 में महाराष्ट्र (Maharashtra) के सतारा  (Stara) में हुआ था. वह ऐसे परिवार में पैदा जहां रेसलिंग (Wrestling) से उनका परिचय बचपन में ही हो गया था. उनके पिता दादासाहेब भी रेसलिंग (Wrestling) करते थे और पांच साल की उम्र में उन्होंने जाधव  (KD Jadhav) को रेसलिंग सिखाना शुरू किया. जाधव (KD Jadhav) ने कॉलेज के दिनों से रेसलिंग में हिस्सा लेना शुरू किया. उनके कॉलेज के डीन ने शुरुआत में उनके शरीर को देखते हुए उन्हें खेलने के लिए नहीं भेजा लेकिन जब जाधव को मौका मिला उन्होंने सबको हैरान कर दिया.

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के डी जाधव को अब तक पद्न अवॉर्ड भी नहीं दिया गया है


केडी जाधव  (KD Jadhav)  के पास हेलसिंकी जाने के लिए पैसे नहीं थे. उनके बेटे रंजीत जाधव ने रेडिफ को बताया था कि उन्होंने जब बॉम्बे के मुख्यमंत्री मोरारजी देसाई (Morarji Desai) से मदद मांगी तो उन्होंने खेल खत्म होने के बाद आने को कहा. इसके बाद उनके कॉलेज के प्रिंसिपल ने अपना घर गिरवी रखकर उन्हें पैसे दिए. जाधव  (KD Jadhav)  ने उन्हें निराश नहीं किया.
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एक कार एक्सीडेंट में साल 1983 में उनका देहांत हो गया था


कैसा था केडी जाधव का ओलिंपिक सफर
केदार जाधव  (KD Jadhav)  ने टूर्नामेंट में शुरुआती पांच मुकाबलों में आसान जीत हासिल की थी. उनकी जीत से सभी वहां काफी हैरान थे. हालांकि इसके बाद जापान (Japan) के शोहाची इसी ने उन्हें हराया. जाधव को इसके बाद अगले बाउट से पहले कम से कम 30 मिनट का समय दिया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जाधव की बात रखने के लिए वहां कोई भारतीय ऑफिशियल नहीं था जिसके कारण उन्हें बाउट लड़नी पड़ी. थके हुए होने कारण वह रूसी रेसलर से हार गए. हालांकि इसके बावजूद उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया.

केदार जाधव जब मेडल जीतर वापस आए तब उन्हें बॉम्बे के मुख्यमंत्री मोरारजी देसाई ने उन्हें सम्मानित किया. जाधव अगले ओलिंपिक में इंजरी के कारण हिस्सा नहीं ले पाए थे. वहीं 1955 में स्टेट पुलिस में सब-इंसपेक्टर बन गए थे.

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First published: February 8, 2020, 8:45 AM IST
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