मैरीकॉम और विजेंदर सिंह जैसे स्टार भारत को देने वाला खेल बॉक्सिंग, जानिए इसके बारे में सबकुछ

मैरीकॉम और विजेंदर सिंह जैसे स्टार भारत को देने वाला खेल बॉक्सिंग, जानिए इसके बारे में सबकुछ
बॉक्सिंग ओलिंपिक में 1920 में शामिल है

खेल जगत में एम्चेयूर और प्रोफेशनल दो तरह की बॉक्सिंग होती हैं. ओलिंपिक (Olympic) में एम्चेयूर बॉक्सिंग (Ametuer Boxing) को 1920 में शामिल किया गया वहीं महिला बॉक्सिंग की शुरुआत 2012 में हुई थी

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 11:12 PM IST
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नई दिल्ली. भारत (India) को ओलिंपिक (Olympic) में जो 28 मेडल हासिल हुए हैं उसमे ंदो ब्रॉन्ज मेडल बॉक्सिंग में मिले हैं. भारत की ओर से 2008 ओलिंपिक में विजेंद्र सिंह और 2012 में लंदन ओलिंपिक्स में मैरीकॉम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. तबसे देश में इस खेल को लेकर रुचि बढ़ी है. आज भारत में मैरीकॉम के अलावा कई दिग्गज खिलाड़ी ऐसे जिनसे देश टोक्यो ओलिंपिक में मेडल की उम्मीद लगाए बैठा है.

मुक्केबाजी के नियम
मुक्केबाज को कमर के नीचे मारने की इजाजत नहीं होती है, यह नियम के खिलाफ है. अगर मुक्केबाज चेतावनी के बाद भी ऐसा करता है तो उसे अयोग्य करार दे दिया जाता है. बॉक्सर को अपने दस्ताने से अपने प्रतिद्वंद्वी के सिर या शरीर पर अटैक करना होता है. एमेच्योर में विजेता का फैसला अंकों के आधार पर किया जाता है. जो मुक्केबाज जितने साफ तरीके से पंच मारता है, उसे ज्यादा अंक मिलते हैं. पुरुषों के बाउट में 3 मिनट के 3 राउंड होते हैं, वहीं महिला वर्ग में 2 मिनट के 4 राउंड होते हैं. इसके अंतर्गत 5 जजों का एक पैनल होता है जो फैसला देता है. यह फैसला 5-0 हो सकता है या बहुमत में (4-1) भी हो सकता है. आपको बता दें कि यह जजों के फैसलों पर 3-2 या ड्रॉ भी हो सकता है.

कैसी होती है बॉक्सिंग रिंग
बॉक्सिंग में हर मुक्‍केबाज को रिंग का एक कोना दिया जाता है. जहां राउंड के बीच में वह आराम करता है. यह कोना कॉर्नर कहलाता है. यहां बॉक्‍सर के साथ तीन और भी लोग ट्रेनर, असिस्‍टेंट और कटमेन होते हैं. बॉक्सिंग अलग-अलग वजन वर्गों में होती है. इस खेल में हर प्रतियोगी को प्रतियोगिता के लिए अपना वजन करवाना होता है. पुरुषों के लिए यह 10 अलग वजन वर्गों में और महिलाओं के लिए तीन वजन वर्गों में होती है.



भारत की स्टार हैं एमसी मैरीकॉम
भारत में एमेच्योर मुक्केबाजी को लगातार बढ़ावा मिल रहा है. जब से विजेंदर सिंह (Vijender Singh) ने 2008 में मुक्केबाजी में भारत की तरफ से पहला ओलिंपिक पदक जीता और उसके बाद एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) ने 2012 में भारत को इस खेल में दूसरा मेडल जिताया. तब से भारतीय फैंस मुक्केबाजों से ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं.
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