ताइक्वांडो मार्शल आर्ट कितना है खतरनाक, जानिए इस खेल के बारे में सबकुछ

ताइक्वांडो मार्शल आर्ट  कितना है खतरनाक, जानिए इस खेल के बारे में सबकुछ
ताइक्वांडो का खेल भारत में भी काफी प्रचलित है

ताइक्वांडो (Taekwando) को 1988 मेें ओलिंपिक में शामिल किया गया था. भारत में इस खेल को खेलने लोगों की तदाद काफी ज्यादा है, खासकर उत्तर पूर्वी राज्यों में

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 27, 2020, 10:30 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. ओलिंपिक्स खेलों में (Olympics) में कई तरह के मार्शल आर्ट खेल शुमार हैं. इन्ही में से एक है ताइक्वांडो. इस खेल को 1988 में सियोल ओलिंपिक (Seoul Olympics) के साथ ही खेलों के महाकुंभ में शामिल किया गया था. मूल रूप से यह कोरियाई मार्शल आर्ट है. इस खेल में अधिकतर किक (पैर से प्रहार) पर जोर दिया जाता है. आज हम आपको इस खेल के बारे में सबकुछ बताने वाले हैं.

ताइक्वांडो कला एक कोरियाई मार्शल कला है. इस खेल में दो खिलाडी एक दूसरे को अपनी लात का प्रयोग करके लड़ते हैं. खिलाड़ी को जहां सामने वाले प प्रहार करके खिलाड़ी को मैट से बाहर ले जाने या जमीन पर गिराने की कोशिश की जाती है. इसमें सिर तक की किक, कूदकर घुमते हुए मारने वाली किक और तेज तरार किक का प्रयोग होता है.

जानिए खेल का इतिहास
इस कला का अविष्कार 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किया गया था. हालांकि धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में फैल गया. आज तायक्वोंडो को 200 से अधिक देशों में लगभग आठ करोड़ लोग यह खेल खेलते हैं. जो पांच महाद्वीपीय यूनियन (अफ्रीका, एशिया, यूरोप, पैन अमेरिका और ओशिनिया) द्वारा प्रशासित हैं, जो इसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक बनाता है. इस खेल को सफ़ेद डोबोक(एक तरह की जैकेट) को पहन कर नंगे पैर खेला जाता है. सिर को बचाने के लिए हेलमेट का प्रयोग किया जाता है जिसे होमयुन कहते हैं और पेट को बचाने वाले गद्देदार जैकेट को होगु कहते हैं.
ताइक्वाडों खेलने के नियम


मैचों में दो मिनट के तीन राउंड होते हैं, जिसमें प्रत्येक राउंड के बीच एक मिनट का ब्रेक होता है. ताइक्वांडो के प्रोटेक्टर और स्कोरिंग सिस्टम या PSS को पहली बार लंदन 2012 ओलंपिक प्रतियोगिता के लिए अपनाया गया था. इस पीएसएस सिस्टम में इलेक्ट्रानिक सेंसट होते हैं जो शरीर के स्कोरिंग के हिस्से में किक लगने पर अंक तय करती है. ओलंपिक खेलों में पहली बार, सभी मैचों को कवर करने के लिए तायक्वांडो कोर्ट में एक 4D कैमरा स्थापित किया जाएगा. ये सिस्टम एक्शन को 360-डिग्री पर स्कैन करता है. जिससे दर्शकों को एथलीटों के शानदार कलाबाजी के हर कोण को देखने में मदद मिलती है. उच्च तकनीक सामग्री का उपयोग करके एक नई प्रतियोगिता पेश की जाएगी.

ओलिंपिक में ताइक्वांडो का सफर
ताइक्वांडो को पहली बार 1988 Seoul के ओलिंपिक खेलों में पहली बार एग्जीबिशन के तौर पर प्रदर्शित किया गया था. 1992 बार्सिलोना के खेलों में इस एक बार फिर से केवल एग्जीबिशन के तौर पर ही शामिल किया गया है. हालांकि सिडनी 2000 में ताइक्वांडो एक पूर्ण खेल के तौर पर ओलिंपिक में शामिल किया गया. इसके बाद एथेंस 2004, बीजिंग 2008, लंदन 2012, रियो 2016, टोक्यो 2020 के बाद पेरिस 2024 में भी पूर्ण मेडल खेल के तौर पर खुद के लिए जगह बना ली है. स्थिति कायम कर ली.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज