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'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर महान धावक मिल्खा सिंह कोविड-19 पॉजिटिव

मिल्खा सिंह घर पर ही आइसोलेट हैं (File Photo/PTI)

Milkha Singh Tests Coronavirus Positive: महान भारतीय फर्राटा धावक मिल्खा सिंह कोरोना वायरस जांच में पॉजिटिव पाए गए हैं और चंडीगढ स्थित अपने आवास पर पृथकवास में हैं.

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    चंडीगढ़. महान भारतीय फर्राटा धावक मिल्खा सिंह (Milkha Singh) कोरोना वायरस जांच में पॉजिटिव पाए गए हैं और चंडीगढ स्थित अपने आवास पर पृथकवास में हैं. ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से मशहूर 91 वर्ष के मिल्खा सिंह में कोई लक्षण नहीं हैं. मिल्खा सिंह ने कहा, ''हमारे कुछ हेल्पर पॉजिटिव पाए गए हैं, लिहाजा परिवार के सभी सदस्यों की जांच कराई गई. सिर्फ मेरा नतीजा पॉजिटिव आया और मैं हैरान हूं.''

    उन्होंने कहा, ''मैं पूरी तरह से ठीक हूं और कोई बुखार या कफ नहीं है. मेरे डॉक्टर ने बताया कि तीन चार दिन में ठीक हो जाऊंगा. मैंने कल जॉगिंग भी की.'' पांच बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मिल्खा सिंह 1960 के रोम ओलंपिक में 400 मीटर फाइनल में चौथे स्थान पर रहे थे.

    मिल्खा सिंह के बेटे गोल्फर जीव मिल्खा सिंह दुबई में है और इसी सप्ताह लौटेंगे. बता दें कि मिल्खा सिंह के जीवन पर फिल्म भी बन चुकी है. ‘भाग मिल्खा भाग’ में मिल्खा सिंह का किरदार फरहान अख्तर ने निभाया था. इस फिल्म को देख युवा पीढ़ी बेहद प्रभावित हुई थी. मिल्खा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म के प्रोड्यूसर ने प्रोत्साहन के लिए 1 रुपए टोकन मनी के रुप में देने का फैसला किया. ये एक रुपए का नोट 1958 में छपा था. इसके पीछे की वजह भी बेहद दिलचस्प है.

    1958 में स्वतंत्र भारत के इतिहास में कॉमनवेल्थ गेम्स में मिल्खा सिंह ने पहला गोल्ड मेडल जीता था. मिल्खा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में आजाद भारत का पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. इसके अलावा एशियन गेम्स में 2 गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम ऊंचा कर दिया था.

    आर्मी की स्‍पेशल ट्रेनिंग के लिए चयन होने के बाद उन्हें नई जिंदगी मिल गई. उन्‍होंने तीन ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया. 1956 मेलबर्न ओलिंपिक, 1960 रोम ओलिंपिक और 1964 टोक्‍यो ओलिंपिक में मिल्‍खा सिंह उतरे. साल रोम ओलिंपिक में लोगों को उम्मीद थी कि मिल्खा सिंह देश के लिए ऐतिहासिक मेडल हासिल करेंगे. वह पांचवीं हीट में दूसरे स्थान पर आए और क्वार्टरफाइनल और सेमीफाइनल में भी उनका स्थान दूसरा रहा. हालांकि फाइनल में मिल्खा अपनी इस कामयाबी को दोहरा नहीं पाए. फाइनल रेस में 250 मीटर तक मिल्खा पहले स्थान पर भाग रहे थे. लेकिन इसके बाद उनकी गति कुछ धीमी हो गई और बाकी के धावक उनसे आगे निकल गए.

    मिल्खा सेकंड के चौथे हिस्से से ब्रॉन्ज मेडल से चूक गए थे. मिल्खा इस रेस में उसी एथलीट से हारे, जिसे उन्होंने 1958 में मात देकर कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. मिल्‍खा 45.73 सेकंड के साथ चौथे स्‍थान पर रहे थे. यह भारत का 40 साल तक नेशनल रिकॉर्ड रहा था. मिल्खा सिंह साल 2014 में गौड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने तक इकलौते भारतीय एथलीट गोल्ड मेडलिस्ट (पुरुष) थे.

    (भाषा के इनपुट के साथ)