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मैरीकॉम ने बताया कैसे लंदन ओलिंपिक में जीता था ब्रॉन्ज, अब ऐतिहासिक गोल्ड लाने पर है नजर

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 1:19 PM IST
मैरीकॉम ने बताया कैसे लंदन ओलिंपिक में जीता  था ब्रॉन्ज, अब ऐतिहासिक गोल्ड लाने पर है नजर
मैरीकॉम भारतीय बॉक्सिंग स्टार हैं

मैरीकॉम (Marykom) ने 2012 में हुए लंदन ओलिंपिक (Lodon Olympic) में ब्रॉन्ज मेजल हासिल किया था

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नई दिल्ली. भारत की स्टार बॉक्सर एमसी मैरीकॉम (MC Marykom) टोक्यो (Tokyo) में होने वाले ओलिंपिक में देश में के लिए मेडल लाने कि प्रबल दावेदार हैं. छह बार की वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ी से देश को काफी उम्मीदें हैं. मैरीकॉम को भी एहसास है कि उनपर काफी बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए हर तरह की कोशिश करने के लिए तत्पर हैं. साल 2012 में लंदन में हुए ओलिंपिक में मैरीकॉम (Marykom) ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. तबसे उनका एक ही सपना है कि वह मेडल का रंग बदलें और देश के लिए गोल्ड लाने वाली पहली भारतीय बॉक्सर बने.

फैंस की उम्मीदों पर खरा उतना चाहती हैं मैरीकॉम
मैरी ने सोनी टीवी के शो द मेडल ग्लोरी में कहा, 'मैं जानती हूं कि मैं जब भी रिंग में होती हूं मुझसे कई लोगों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं. कई बार रात-रात भर मैं इसके बारे में सोचते हुए सो पाती कि मैं अपने अंदर सुधार करने को लेकर क्या करूं, मैं अपनी कमजोरियों पर काम कैसे करूं कि खुद को और बेहतर साबित कर पाऊं. मेरे लिए जो दुआएं की जाती हैं उनकी बदौलत मैं अभी इतनी कामयाब हो पाई हूं. मैं अभी भी अपनी स्ट्रेंथ, स्टेमिना, स्पीड और एंड्यूरेंस पर काम कर रही हूं. इस समय मेरा मुख्य लक्ष्य अपने पदक का रंग बदलना है.'

लंदन ओलिंपिक के दौरान लड़को के साथ किया था अभ्यास



मैरीकॉम ने बताया कैसे लंदन ओलिंपिक के समय उन्हें अपनी वेट कैटेगरी के बॉक्सर न होने के कारण पुरुषों के साथ अभ्यास करना पड़ता था. वह वैसे तो 48 किग्रा भार वर्ग में खेलती थी लेकिन ओलिंपिक के लिए अपनी वेट कैटेगरी बदलनी पड़ी थी. उन्होंने कहा, 'उस समय मेरे पास 51 किलोग्राम भारवर्ग का अनुभव नहीं था. एक साल पहले ही मैंने अपनी कैटेगरी में शिफ्ट किया था. मैंने अपने सभी विश्व चैम्पियनशिप पदक 48 किलोग्राम भारवर्ग में ही जीते हैं.' उन्होंने कहा, '51 किलोग्राम में मुझे अपने से लंबे मुक्केबाजों का सामना करना होता था और उनकी पहुंच भी अच्छी रहती थी. भारत में उस तरह की लंबाई की ज्यादा मुक्केबाज नहीं हैं. इसलिए 2012 ओलिंपिक के लिए मुझे पुरुषों के साथ अभ्यास करना होता था.



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First published: May 21, 2020, 1:17 PM IST
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