मैरी कॉम ने कहा, पुरस्कार समिति में उनके रहने से दोगुनी हो जाती समस्या

भाषा
Updated: August 21, 2019, 4:19 PM IST
मैरी कॉम ने कहा, पुरस्कार समिति में उनके रहने से दोगुनी हो जाती समस्या
मैरी कॉम ने कहा कि वह पहले भी समिति में थी, लेकिन तब कोई विवाद नहीं हुआ

मैरी कॉम (Mary kom) ने द्रोणाचार्य पुरस्कार चयन समिति की चयन प्रक्रिया के लिए हुई बैठक से खुद को अलग कर लिया था

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छह बार की विश्व चैंपियन मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम (Mary Kom)  द्रोणाचार्य पुरस्कार चयन समिति और ट्रायल संबंधित विवादों से काफी नाराज दिखीं और उन्होंने कहा कि इनका सीधा असर उन पर पड़ता है.

ओलिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मैरी कॉम (Mary Kom)  ने खुद को द्रोणाचार्य पुरस्कार चयन समिति की शनिवार को चयन प्रक्रिया के लिए हुई बैठक से अलग कर लिया. उनके कोच छोटेलाल यादव इस पुरस्कार की दौड़ में थे, चयन पैनल में मैरीकॉम के शामिल होने की आलोचना हो रही थी. मुक्केबाजी महासंघ ने यादव का नाम मैरीकॉम की सलाह पर भेजा था.

इसके बारे में पूछने पर मैरीकॉम ने यहां अखिल भारतीय गेमिंग महासंघ (एआईएफएफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के मौके पर संवाददाताओं से कहा कि पहले विवाद खड़ा कर दिया, फिर इस पर सवाल पूछे जा रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण था. मैं पहले भी चेयरमैन (पुरस्कार चयन समिति में) थी, इस बार भी मैं चयन समिति में थी. दूसरी बार मैं समिति में थी. उस समय उन दिनों में क्या कोई विवाद हुआ था? मैंने कई कोचों की भी सिफारिश की थी, इस बार क्या हुआ, पता नहीं.


सही हकदार को चुना चाहिए


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यह पूछने पर कि इसलिए आपने समिति की बैठक से हटने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि बिल्कुल, क्यों नहीं? मैं रहूंगी तो फिर इससे ‘दोगुनी’ समस्या होगी. इससे फिर एक अन्य परेशानी खड़ी हो जायेगी. इसका असर मुझ पर पड़ रहा है. मैं बार- बार इससे उबर रही हूं. जो भी द्रोणाचार्य पुरस्कार का हकदार है, उसे चुना जाना चाहिए. निश्चित रूप से उसका योगदान अहम है.





मैरी कॉम ने ट्रायल को लेकर कहा कि अच्छा प्रदर्शन करने वालों को सीधे ही किसी भी टूर्नामेंट के लिये कोटा मिल जाना चाहिए.


विश्व चैंपियनशिप के लिए चुई गई 10 सदस्यीय टीम में मैरीकॉम को बिना ट्रायल के शामिल किया गया. इसके बाद निकहत जरीन 51 किग्रा में ट्रायल नहीं कराने से खफा थीं. भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने मैरीकॉम के प्रदर्शन और पदक की दावेदारी को देखते हुए टीम में शामिल करने का फैसला किया.


टीम चयन के लिये ट्रायल हटाने के बारे में पूछने पर मैरीकॉम ने कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है. बीएफआई सबकुछ देखता है, सरकार सबकुछ देख रही है. जो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें सीधे ही किसी भी टूर्नामेंट के लिये कोटा मिल जाना चाहिए. अन्य खेलों में भी देखो, जैसे बैडमिंटन. उसमें कौन ट्रायल देता है. किसने ट्रायल दिया. सायना नेहवाल या पीवी सिंधु ने ट्रायल दिया. लेकिन हमारे खेल में ट्रायल-ट्रायल. कभी कभार, अजीब सा भी लगता है. मैंने स्पष्ट रूप से बताया कि कौन बेहतर कर रहा है, कौन नहीं.90 साल में जीती थी 800 मीटर की रेस, 100 साल की उम्र में निधन




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First published: August 21, 2019, 4:04 PM IST
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