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मैरीकॉम: एक ऐसा नाम जो सिर्फ देश की महिलाओं के लिए ताकत और हिम्मत का उदाहरण बना

News18Hindi
Updated: May 20, 2020, 5:29 PM IST
मैरीकॉम: एक ऐसा नाम जो सिर्फ देश की महिलाओं के लिए ताकत और हिम्मत का उदाहरण बना
मैरीकॉम ओलिंपिक मेडलिस्ट भी हैं

मैरीकॉम (MAary Kom) छह बार की वर्ल्ड चैंपियन हैं और ऐसा करने वाली इकलौती बॉक्सर हैं

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नई दिल्ली. मैग्नीफिसेंट मैरी, सुपरमॉम मैरी, गोल्डन गर्ल मैरी...भारत की स्टार बॉक्सर एमसी  मैरीकॉम (MC Marykom) के लिए जितने विशेषण का प्रयोग किया जा सकता है वह कम है. भारत में क्रिकेटर्स के ग्लैमर की चमक-धमक में मैरीकॉम ने अपनी अलग पहचान बनाई. मणिपुर (Manipur) के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया को अपना दम दिखाने वाले मैरीकॉम एक बार नहीं बल्कि छह बार वर्ल्ड चैंपियन का खिताब जीता.

मैरीकॉम ने हासिल की सभी बड़ी उपलब्धियां
मैरीकॉम (Mary Kom) के नाम 6 बार विश्व चैंपियनशिप (World Championship) का खिताब जीतने का विश्व रिकॉर्ड है. अब तक कोई भी महिला मुक्केबाज ऐसा नहीं कर पाई है. दुनिया की सबसे दमदार मुक्केबाजों में शुमार मैरी ने यह ऐतिहासिक जीत अपने देश में अपने लोगों के सामने 2018 में हासिल की थी. वर्ष 2003 में अर्जुन अवॉर्ड, वर्ष 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न (Rajeev Gandhi Khel Ratn) अवॉर्ड मिल चुके हैं. वर्ष 2010 में उन्हें पद्म श्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. मैरी एकमात्र महिला बॉक्सर हैं, जिन्होंने पहले वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सात पदक जीते हैं. उनकी उपलब्धियों के लिए मैरी कॉम (Mary Kom) को एशिया  (Asia) की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट चुना गया था.

लड़कियों के लिए नहीं महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनी मैरीकॉम



मैरीकॉम (Marykom) की बचपन से ही खेल-कूद में काफी रुचि थी और हमेशा से ही वह एथलीट बनना चाहती थी. स्कूल के समय से ही फुटबॉल और कई खेलों में हिस्सा लेती थीं. हालांकि बॉक्सिंग की प्रेरणा उन्हें मिली डिंको सिंह से. साल 1998 में जब मणिपुर के बॉक्सर डिंग्को सिंह (Dingko Singh) ने जब एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता, तब वे उनसे काफी प्रभावित हुईं और उन्होंने बॉक्सिंग में अपने करियर बनाने की ठान ली. शुरुआत में उन्हें परिवार का साथ नहीं मिला लेकिन धीरे-धीरे अपनी सभी मुश्किलों का सामना करते हुए उन्हें खुद को साबित किया. मैरीकॉम (Marykom) के मां बनने के बाद लोगों को लगा कि शायद अब मैरी के सफर का अंत हो चुका है लेकिन इस अंत ने ही उन्हें नई शुरुआत दी. अब तक मैरीकॉम ऐसी लड़कियों के लिए प्रेरणा थीं जो बॉक्सिंग में या किसी खेल में अपना नाम बनाना चाहती थीं लेकिन मां बनने के बाद जो कामयाबी उन्होंने हासिल की उसने एक नई कहानी लिख दी.



मां बनने के बाद सबके लिए बनी प्रेरणा
बॉक्सिंग (Boxing) में अच्छा प्रदर्शन कर रही मैरी ने शादी के बाद वर्ष 2007 में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें बताया कि फिर से रिंग में जाने के लिए अब उन्हें लंबा वक़्त लगेगा और कम से कम तीन साल में वे फिर से फिट होंगी. हालांकि मैरीकॉम 2008 में फिट होकर रिंग में पहुंच गई और एशियन चैंपियनशिर में सिल्वर मेडल जीतकर खुद को साबित दिया.

सुनील छेत्री की प्रेरणा हैं मैरीकॉम
मैरीकॉम की कामयाबी के कायल भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री ने कहा, 'मुझे उन सब दिग्गजों से अच्छा करने की प्रेरणा मिलती हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में बहुत कुछ हासिल कर चुके हैं. मैरी कॉम भी उनमें से एक हैं. उनके पास एक अविश्वसनीय कहानी है. '

छेत्री ने मैरी कॉम की तारीफ करते हुए कहा, 'वह छह बार की विश्व चैंपियन हैं. दो बच्चों की मां होने के बावजूद विश्व चैंपियन होना बहुत बड़ी बात है. इन सबके अलावा उनके पास कुल 14 स्वर्ण पदक है. ऐसे में अगर वह देश को प्रेरित नहीं करेंगी तो कौन करेंगी. मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूं.

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First published: May 20, 2020, 12:27 PM IST
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