क्या इलेक्ट्रिशियन की बेटी टोक्यो ओलिंपिक में भारत को दिलाएगी मेडल! अपने खेल से किया हैरान

जिस इवेंट में चिंकी एक नंबर पर रहीं, उसमें मनु भाकर तीसरे नंबर पर रहीं.

जिस इवेंट में चिंकी एक नंबर पर रहीं, उसमें मनु भाकर तीसरे नंबर पर रहीं.

Mission Olympics Chinki Yadav: जापान के टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक खेलों की तैयारियां पूरी जोरों पर हैं. शूटिंग समेत कुछ खेल ऐसे हैंं, जहां से भारत को पदक मिलने की पूरी उम्मीद है. शूटिंग के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में चिंकी यादव एक नई उम्मीद बनकर उभरी हैं. माना जा रहा है कि वह ओलिंपिक का टिकट लेकर देश को पदक दिला सकती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 18, 2021, 4:45 PM IST
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नई दिल्ली: पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के कर्णी सिंह निशानेबाजी रेंज पर भारत के राइफल और पिस्टल निशानेबाजों के तीसरे और चौथे ट्रायल का पहला दिन था. 25 मीटर पिस्टल वर्ग में सबकी निगाहें देश की नंबर वन निशानेबाज मनु भाकर पर थीं. लेकिन जब नतीजे सामने आए, तो सभी हैरान थे. भोपाल की चिंकी यादव सभी को पीछे छोड़कर विजेता बन चुकी थीं. टोक्यो ओलंपिक की कोटाधारी चिंकी ने मध्यप्रदेश को महिलाओं के 25 मीटर पिस्टल वर्ग में जीत दिलाई. अब उनकी निगाहें जापान ओलिंपिक का टिकट लेकर भारत को पदक दिलाना है. एक साधारण परिवार की लड़की का ये सफर रोमांचकारी है. चिंकी के पिता भोपाल में उसी स्टेडियम में इलेक्ट्रीशियन हैं, जहां चिंकी रहती हैं और प्रैक्टिस करती हैं. यानी जिस जगह को रोशन करने की जिम्मेदारी उनके पिता की है, अब उस जगह, शहर और देश का नाम रोशन का जिम्मा चिंकी के कंधों पर है.

टोक्यो ओलंपिक 2021 के लिए स्पोट् र्स पिस्टल में भारत को ओलंपिक कोटा दिलाने वाली चिंकी यादव के पिता मेहताब सिंह खेल और युवा कल्याण विभाग में इलेक्ट्रिशियन का कार्य करते हैं. चिंकी ने पहली बार वर्ष 2012 में समर कैंप में शूटिंग रेंज में खिलाड़ियों को अभ्यास करते देखा. तत्कालीन शूटिंग प्रशिक्षक वेदप्रकाश पिलानिया ने चिंकी को शूटिंग खेल की बारीकियां सिखाई, जिसके चलते अकादमी में चिंकी का प्रवेश हुआ. चिंकी के माता पिता चाहते थे कि उनकी बेटी भी शूटिंग खेल की अच्छी खिलाड़ी बनकर देश-प्रदेश का नाम रोशन करे.





चिंकी ने 10 मीटर स्पोट् र्स पिस्टल से शुरुआत की. शुरुआत में चिंकी पिस्टल की आवाज से डर जाती थी. लेकिन, उसने हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे इसकी अभ्यस्त होती गई. वर्ष 2013 में 25 मीटर पिस्टल में अभ्यास प्रारंभ किया और दिल्ली में पहला नेशनल गोल्ड मेडल टीम इवेंट में तथा कांस्य पदक व्यक्तिगत स्पर्धा में जीता. उसके बाद चिंकी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तीन स्वर्ण, दो रजत और पांच कांस्य पदक देश को दिलाने वाली चिंकी ने राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में 6 स्वर्ण, 7 रजत और 9 कांस्य पदक अर्जित किए हैं. चिंकी का कहना है कि खेल में हार जैसी कोई चीज नहीं होती, बस जीत का जज्बा होना चाहिए. चिंकी का सपना ओलंपिक में देश को पदक दिलाना है.
पहले था स्नूकर और जिम्नास्टिक में जाने का सपना
चिंकी बताती हैं कि उनका सपना स्नूकर या जिम्नास्टिक में जाने का था. वह इन खेलों के लिए मेहनत भी कर रही थीं, लेकिन बाद में हालात बदले और वह शूटिंग में आ गईं. आज चिंकी की रैंकिंग नंबर दो है. अगर वह इसी रैंकिंग को अपने प्रदर्शन से बरकरार रखती हैं तो उन्हें ओलिंपिक जाने का टिकट मिल सकता है. ओलिंपिक जाने के सवाल पर वह पूरे भरोसे से कहती हैं कि मुझे हर हाल में ओलिंपिक में हिस्सा लेना है.
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