पहले बैन, फिर पीटने वाले पति से तलाक, अब 35 की उम्र में देश के लिए मेडल जीतकर की वापसी

पहले बैन, फिर पीटने वाले पति से तलाक, अब 35 की उम्र में देश के लिए मेडल जीतकर की वापसी
गुरशरण कौर 72 किलोग्राम में रेसलिंग करती है

गुरशरण कौर (Gursharan Kaur) पर साल 2012 में डोपिंग के कराण नौ महीने के लिए बैन लगा दिया गया था

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2020, 12:42 PM IST
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नई दिल्ली. नई दिल्ली में चल रही एशियन चैंपियनशिप (Asian Wrestling Championship) में भारतीय महिला पहलवानों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और देश ने 10 कैटेगरी में से आठ में मेडल हासिल किया. भारत (India) को यह मेडल दिलानें वालों 35 साल की गुरशरण कौर (Gursharan Kaur) भी शामिल थी जिन्होंने 72 किलोग्राम वर्ग में देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया. गुरशरण का यह मेडल जवाब था उन लोगों के लिए जो समझते हैं कि शादी करने के बाद या मां बनने के बाद कोई औरत खेल में वापसी नहीं कर सकती. गुरशरण (Gursharan Kaur) ने अपनी जिंदगी की तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए यह मेडल अपने नाम किया.

पति से मार खाने के बाद लिया तलाक
साल 2012 ने गुरशरण का जीवन पूरी तरह बदल दिया. 2012 में डोप टेस्ट में फेल होने पर नाडा ने 9 महीने का बैन लगाया था. इसके बाद उनके परिवार ने उनकी शादी कराने का फैसला किया. गुरशरण के करियर के लिए शादी श्राप साबित हुई. गुरशरण ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा, '2013 में मेरी शादी हो गई थी. मेरे पति मुझे लड़कों के साथ कुश्ती नहीं करने देते थे. जब मैं लड़कों के साथ अभ्यास करती थी तो वह मुझे बहुत मारते थे. इसके बाद मैं एक लड़की की मां बनी लेकिन मेरे पति लड़की नहीं चाहते थे. मेरे पति ने कहा कि तुम्हें मेरे और बेटी में से किसी एक को चुनना होगा तो मैंने उसी वक्त अपनी बेटी को चुन लिया.'

बेटी के लिए बनना चाहती हैं मिसाल



गुरशरण (Gursharan Kaur) ने कहा कि वह अपनी बेटी के लिए मिसाल बनना चाहती थी जिसके लिए उन्होंने कुश्ती में वापसी की. उन्होंने कहा, 'मुझे उसके लिए मिसाल बनना था, ताकि वह जब मेरे बारे में सुने तो मुझ पर गर्व करे. वह साढ़े 3 साल की है और अभी वो मुझे देखकर मैट पर अभ्यास करती है. वो कहती भी है कि मुझे मां की तरह बनना है और गोल्ड लाना है. मां और बेटी ने ही मुझे वापसी करने की हिम्मत दी है.'



साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर की वापसी
गुरुशरण ने 2018 से फिर से अभ्यास करना शुरू किया. इस दौरान उनकी तीन साल की बेटी की देखभाल उनकी मां ने की. गुरुशरण ने कहा कि उन्होंने जो पदक जीता है वो अपनी मां की मदद से जीता है.  वापसी के बाद 2019-20 गुरशरण के लिए बहुत अच्छा रहा है. उन्होंने पहले नेशनल चैंपियनशिप और फिर साउथ एशियन गेम्स गोल्ड मेडल जीता.

गुरशरण कुश्ती को कभी अलविदा नहीं कहना चाहती. उन्होंने कहा, 'मैं उम्र को नहीं मानती. उम्र सिर्फ एक नंबर है. जब तक मेरे अंदर हिम्मत है, मैं कुश्ती करूंगी. जब तक हम जीत रहे हैं तो हम खेल रहे हैं चाहे हम 50 साल के भी क्यों ना हो. एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में मेरा यह पहला पदक है.' एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीतने के बाद उन्हें लखनऊ में टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफायर ट्रायल में खेलने का मौका मिलेगा.

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First published: February 24, 2020, 12:42 PM IST
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