मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, लेकिन फाइनल में हारने से अब भी नाराज हूं : अमित पंघल

अमित पंघल ने एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता (Instagram)

अमित पंघल ने एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता (Instagram)

हरियाणा का यह 25 वर्षीय मुक्केबाज गत चैंपियन था, लेकिन दुबई में एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में उन्हें उज्बेकिस्तान के मौजूदा विश्व और ओलंपिक चैंपियन शाखोबिदिन जोइरोव से 3-2 से हार का सामना करना पड़ा.

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नई दिल्ली.ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर चुके भारतीय मुक्केबाज अमित पंघल ने एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल प्रदर्शन को अपने करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करार किया, लेकिन वह इसके फाइनल में मिली हार से अब भी थोड़े नाराज हैं. हरियाणा का यह 25 वर्षीय मुक्केबाज गत चैंपियन था, लेकिन दुबई में एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में उन्हें उज्बेकिस्तान के मौजूदा विश्व और ओलंपिक चैंपियन शाखोबिदिन जोइरोव से 3-2 से हार का सामना करना पड़ा. भारतीय टीम ने इस नतीजे के खिलाफ विरोध दर्ज किया और मुकाबले के दूसरे राउंड की समीक्षा की मांग की जिसे ज्यूरी ने खारिज कर दिया.

मौजूदा एशियाई खेलों के चैंपियन पंघल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘52 किग्रा वर्ग में यह मेरा अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. मुझे उस फाइनल को जीतना चाहिए था और जब मैं नहीं जीता तो मैं गुस्से में था.’’ उन्होंने 2019 विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जोइरोव से मिली हार का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ किया और मुझे लगता है कि मैं जीत का हकदार था लेकिन ठीक है, ऐसा हो सकता है. मैं पिछली बार उससे हार गया था लेकिन इस बार का प्रदर्शन उससे कहीं ज्यादा बेहतर था. इस बार स्कोर 2-3 था जो पहले 0-5 था.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे दल ने इस फैसले के खिलाफ विरोध किया, हम थोड़ा और जोर लगा सकते थे, लेकिन ठीक है, कम से कम हमने कोशिश तो की.’’ पंघल ने कहा कि उन्हें कुछ चीजों पर काम करना होगा और वह ओलंपिक से पहले ऐसा कर लेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सुधार किया है लेकिन मेरा तीसरा राउंड बेहतर हो सकता है. मुझे नहीं लगता कि मैंने तीसरे राउंड में स्कोर के लिए ज्यादा सटीक मुक्के जड़े थे. मैंने इतना सुधार किया है कि मेरा पहला राउंड जल्दी शुरू हो जाए क्योंकि पहले मैं थोड़ा रूका करता था.’’

टोक्यो ओलंपिक के लिए भारत के प्रबल दावेदारों में से एक पंघल का एशियाई चैंपियनशिप में प्रदर्शन काफी शानदार रहा. क्वार्टरफाइनल में उनकी तेजी ने आकर्षित किया तो सेमीफाइनल में उनके करीब से जड़े मुक्के काफी प्रभावशाली रहे. लेकिन प्रतिद्वंद्वी की जकड़ में होने के बावजूद मुक्के लगाने की कला उनके मुक्केबाजी कौशल में अभी जुड़ी है. उन्होंने कहा, ‘‘यह पहली बार है जब मैंने जकड़ने के दौरान मुक्के लगाने की कोशिश की.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे व्यक्तिगत कोच अनिल धनकड़ ने मुझे यह सिखायी है. उन्होंने मुझे कहा कि जकड़ने के मतलब रूकना नहीं है और मुझे मुक्के जड़ते रहना चाहिए. मैंने इस पर काम किया था.’’
लेकिन धनकड़ दुबई में पंघल के इस चैंपियनशिप के दौरान नहीं थे और इस मुक्केबाज ने कहा कि उन्हें अपने कोच की कमी खली. लेकिन अगर तोक्यो में भी उनके कोच साथ नहीं जा पाते तो उनके प्रदर्शन पर असर पड़ेगा? इस पर पंघल ने कहा, ‘‘मैं प्रदर्शन करूंगा, अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा लेकिन उनके साथ होने से निश्चित रूप से मेरी मदद होगी. अगर वह नहीं जा पाएंगे तो मैं फोन पर उनसे संपर्क में रहूंगा और वह मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे. ’’ प्रदर्शन के दबाव के अतिरिक्त ओलपिंक की तैयारियों में जुटे खिलाड़ियों को इस साल कोविड-19 महामारी की चिंता से भी जूझना पड़ रहा है. पंघल ने कहा कि उनकी भी अपनी चिंताएं हैं लेकिन वह रिंग के अंदर जो करते हैं, उस पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘अभ्यास में तो बाधा हुई ही है. एक और डर लगा रहता है कि अगर हम पॉजिटिव आ गए तो हमें पृथवकास में रखा जाएगा और हमारी ट्रेनिंग का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो जाएगा. और अगर हमारे ‘स्पारिंग’ (साथ में अभ्यास करने वाले जोड़ीदार) को पॉजिटिव पाया गया तो हमारा ही नुकसान होगा. हां कभी कभार ए सब चीजें मेरे दिमाग में चलती रहती हैं.’’ ओलंपिक के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘पहला ओलंपिक भी है, साथ में कोविड भी है, देखते हैं क्या होता है लेकिन मैं इसे विशेष बनाना चाहता हूं.’’

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